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Classes up to 5th standard in Delhi in hybrid mode | दिल्ली में 5वीं तक की क्लासेज हाइब्रिड मोड में: हर साल प्रदूषण की वजह से बंद करने पड़ते हैं स्कूल, सरकारी स्कूलों के बच्चों पर दोहरी मार

Published:


9 मिनट पहलेलेखक: उत्कर्षा गीतकार

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दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण का स्तर दिन पर दिन खराब हो रहा है। केंद्र सरकार ने ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान यानि GRAP का स्टेज 3 लागू किया है। न्यू डायरेक्टिव्स के 5वीं तक के स्कॉच के अनुसार हाइब्रिड मॉडल का उल्लेख किया गया है। इसके तहत पेरेंट या छात्र जहां अवेलेबल हैं, वहां ऑनलाइन क्लासेज का विकल्प चुन सकते हैं।

ये फैसला दिल्ली में AQI यानि एयर क्वालिटी स्टाक के खराब होने के स्तर को लेकर लिया गया है। 10 नवंबर को AQI 362 था, जो सोमवार को 425 हो गया. इसके बाद दिल्ली के लोगों को घर में ही रहने की सलाह दी गई।

अधिकारियों का कहना है कि बच्चों और बुजुर्गों को कम से कम घर से बाहर निकलना चाहिए।

अधिकारियों का कहना है कि बच्चों और बुजुर्गों को कम से कम घर से बाहर निकलना चाहिए।

5वीं तक की क्लासेज हाइब्रिड मोड़ में चलेंगी

नए निदेशक के, डीओई, एनडीएमसी, एमसीडी और दिल्ली कैंटोनमेंट के सभी सरकारी और गैर-सरकारी स्कूलों को 5वीं तक की कक्षाओं में कोचिंग करने का निर्देश दिया गया है। इन अद्यतन का तुरंत पालन किया जाएगा। साथ ही अभिभावकों और मित्रों को इसकी जानकारी होगी।

कोविड के बाद राजधानी दिल्ली में हर साल कम से कम एक हफ्ता या फिर स्कूलों की छुट्टियां शुरू हो जाती हैं या ऑनलाइन क्लासेज चालू हो जाती हैं।

पेरेंट्स की मांग- 12वीं तक के लिए हो मिशिगन मोड़

पेरेंट्स एसोसिएशन की अपराजिता गौतम का कहना है, ‘5वीं तक के लिए हाइब्रिड मॉड का सरकार का फैसला अच्छा है लेकिन प्रदूषण की उम्र नजर नहीं आती। ऐसे में 12वीं तक के बच्चों के लिए डायबिटीज मोड होना चाहिए। बच्चों के यूनिट टेस्ट आने वाले हैं, ऐसे में बच्चा अभी बीमार होगा तो उनका नुकसान हो सकता है। इसके अलावा, बोर्ड एग्ज़ाम वालों को बच्चों के लिए ऑफ़लाइन एग्ज़ाम की सुविधा भी मिलनी चाहिए।’

अभिभावकों का कहना है कि डायबिटीज से बच्चों की पढ़ाई का नुकसान होता है लेकिन इसके अलावा कोई दूसरा पद नहीं है। बच्चे लगातार बीमार हो रहे हैं। एक हफ़्ता बीमार होने के बाद कुछ बच्चा जब स्कूल गया तो एक सप्ताह के लिए बीमार पड़ गया। गला, ख़राब नाक, खांसी, थकान और बुखार से पीड़ित बच्चों को हो रही है परेशानी। कई बच्चों में ब्रोंकाइटिस और मोटापे के लक्षण भी देखे जा रहे हैं, जिनकी वजह से उन्हें नेबुलाइजर पर प्रतिबंध लगना पड़ रहा है।

अपराजिता ने कहा, ‘स्कूलों में बच्चों की अटेंडेंस देखने से पता चलता है कि बच्चे लगातार बीमार पड़ रहे हैं।’

अभिभावक सवाल कर रहे हैं कि 5वीं तक के बच्चों के लिए पॉल्यूशन क्या है?

अभिभावक सवाल कर रहे हैं कि 5वीं तक के बच्चों के लिए पॉल्यूशन क्या है?

सरकारी स्कूल के बच्चों के लिए एक तरफ का कुआँ, दूसरी तरफ का कुआँ

अपराजिता गौतम का कहना है कि बच्चों का स्कूल जाना सुरक्षित नहीं है। ऐसे में उन्हें ऑनलाइन क्लासेज की सुविधा मिलनी चाहिए।

यूनिसेफ की 2021 की आई एक रिपोर्ट में, केवल 24% भारतीय घरों में ऑफ़लाइन भागीदारी को समर्थन करने के लिए इंटरनेट पर शामिल किया गया है। दिल्ली जैसे शहरों में भी, बहुत से बच्चों को अपने माता-पिता और भाई-बहनों के साथ साझा करना है।

2023 में आई वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट ‘लर्निंग लॉस इन साउथ एशिया’ के मुताबिक ऑफलाइन क्लासेज की वजह से प्राइवेट और सरकारी स्कूलों के बीच में गैप बड़ा हो गया। कुछ तर्कशास्त्रियों ने कहा कि इस लर्निंग गैप को कवर करने के लिए ब्रिज कोर्सेज की जरूरत है, नहीं तो यह लर्निंग गैप इनकम डिवाइड के रूप में लिया जा सकता है।

ऐसे में जब दिल्ली में हर साल प्रदूषण के कारण सरकारी स्कूल भी बंद हो जाते हैं या ऑफलाइन क्लासेज बंद हो जाते हैं, तो सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों का नुकसान हो जाता है। उनकी स्थिति ऐसी हो गई है कि स्कूल जाओगे तो बीमार हो जाओगे और स्कूल नहीं जाओगे तो पढ़ाई का भारी नुकसान होगा। इससे आगे उनके भविष्य पर भी गहरा असर पड़ सकता है।

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