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Claim in the petition- Decision given without hearing our side; Calcutta HC has stopped advertisements till June 4 | याचिका में दावा- ह: याचिका में दावा- हसेगढ़फजसस मारा पक्ष सुने बिना फैसला दिया; कलकत्ता HC ने 4 जून तक विज्ञापन रोके हैं

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  • याचिका में दावा, हमारा पक्ष सुने बिना दिया गया फैसला; कलकत्ता हाईकोर्ट ने 4 जून तक विज्ञापनों पर रोक लगाई है

नई दिल्ली8 मिनट पहले

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कलकत्ता हाईकोर्ट ने भारतीय जनता पार्टी को फेस्ट कांग्रेस के खिलाफ विज्ञापन छापने से रोक दिया था। इसके खिलाफ भाजपा ने सुप्रीम कोर्ट की वेकेशन बेंच में याचिका लगाई थी, जिस पर 27 मई को सुनवाई होगी। 20 मई को कलकत्ता उच्च न्यायालय की सिंगल जज बेंच ने एक आदेश में कहा था कि ये विज्ञापन अपमानजनक हैं और कांग्रेस चुनाव 2024 की आचार संहिता का उल्लंघन करते हैं।

22 मई को सुप्रीम कोर्ट की डिवीजन बेंच ने कहा था कि वह सिंगल जज बेंच से अंतरिम आदेश के खिलाफ याचिका पर विचार करने की जरूरत नहीं है।

इसके बाद भाजपा ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष याचिका दायर की, जिस पर न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की बेंच सुनवाई करेगी।

याचिका में 20 मई के अंतरिम आदेश के साथ-साथ अग्रिम आदेश पर भी रोक लगाने की मांग की गई है।

भाजपा का दावा- कोर्ट ने हमारा पक्ष सुना ही नहीं
भाजपा ने डिवीजन बेंच की तस्वीरें इंटर-कोर्ट अपील लगाई थी। इसमें दावा किया गया था कि सिंगल जज बेंच ने बिना किसी सुनवाई के आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट में दी गई अपनी याचिका में, भाजपा ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट की डिवीजन बेंच को इस बात पर विचार करना चाहिए था कि पार्टी की बात नहीं सुनी गई और सिंघल जज ने केवल एक पक्ष पर रोक लगा दी।

भाजपा ने कहा कि यह सामने लाना जरूरी है कि सुप्रीम कोर्ट ने जो राहत टीएमसी को दी है, वह उनकी अपील में ही नहीं थी। उनकी अपील केवल चुनाव आयोग को कानून के अनुसार कदम उठाने का निर्देश देने वाले अंतरिम आदेश तक ही सीमित थी।

याचिका में यह भी दावा किया गया है कि सिंघल जज ने आचार संहिता उल्लंघन के आधार पर रोक लगाकर गलती की। उन्होंने यह मामला चुनाव आयोग में नहीं देखा। जिसके पास आचार संहिता उल्लंघन करने वाली पार्टी के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार है।

पूरा मामला क्या था
कुछ विज्ञापनों के प्रकाशन के बाद टीएमसी ने चुनाव आयोग में भाजपा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। चुनाव आयोग ने 18 मई को शिकायत के आधार पर भाजपा को कारण बताते हुए नोटिस जारी किया। जिस पर 21 मई तक जवाब मिल गया।

इस बीच टीएमसी 20 मई को याचिका लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट पहुंची, जहां सुनवाई के दौरान सिंघवी जज बेंच ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को 4 जून तक आचार संहिता का उल्लंघन करने वाले विज्ञापन प्रकाशन से रोक दिया।

कोर्ट ने भाजपा को उन विज्ञापनों को भी प्रकाशित करने से रोक दिया था, जिसके बारे में टीएमसी ने याचिका में कहा था कि इन विज्ञापनों में उनके खिलाफ झूठे आरोप लगाए गए थे।

डिवीजन बेंच ने कहा था कि भाजपा फैसले की समीक्षा, बदलाव या आदेश वापस लेने के लिए सिंगल जज बेंच में जा सकती है।

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बंगाल में 2010 के बाद जारी सभी ओबीसी सर्टिफिकेट रद्द, हाईकोर्ट ने बताया अवैध

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने बुधवार को पश्चिम बंगाल में 2010 के बाद जारी सभी अदर बैकवर्ड वर्ग (ओबीसी) प्रमाणपत्र रद्द करने के आदेश दिए हैं। न्यायमूर्ति तपोब्रत चक्रवर्ती और राजशेखर मंथर की बेंच ने कहा कि 2011 से प्रशासन ने किसी नियम का पालन किए बगैर ओबीसी सर्टिफिकेट जारी कर दिया।

बेंच ने कहा- इस तरह से ओबीसी सर्टिफिकेट देना असंवैधानिक है। यह प्रमाणपत्र पिछड़ा वर्ग आयोग की किसी भी निर्धारित शर्त के अधीन जारी किया गया। इसलिए इन सभी सर्टिफिकेट को कैंसिल कर दिया गया है। यद्यपि यह आदेश उन लोगों पर लागू नहीं होगा, जिन्हें पहले नौकरी मिल गई या मिलने वाली है। पढ़ें पूरी खबर…

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