City of Literature : कौन-सा भारतीय शहर कहलाता है ‘साहित्य की नगरी’? यूनेस्को की लिस्ट में शामिल, जानें क्यों है खास


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UNESCO City of Literature : क्या आप जानते हैं कि भारत का एक ऐसा शहर भी है जिसकी रग-रग में साहित्य बसता है? जी हां, केरल के कोझिकोड शहर को यूनिस्‍को ने आधिकारिक तौर पर ‘साहित्य की नगरी’ (City of Literature) घोषित किया है. चलिए जानते हैं इसकी खासियत.

UNESCO City of Literature Kozhikode : क्या आप जानते हैं कि हमारे देश का एक शहर ऐसा भी है जिसे दुनिया भर में ‘साहित्य के शहर’ (City of Literature) के नाम से पहचाना जाता है? केरल का खूबसूरत शहर कोझिकोड, जिसे हम कालीकट भी कहते हैं, भारत का पहला ‘यूनेस्को सिटी ऑफ लिटरेचर’ बन चुका है. यह सम्मान इसे अपनी पुरानी पठन संस्कृति और मलयालम साहित्य में दिए गए योगदान के लिए मिला है.

कोझिकोड के लिए यह सफर रातों-रात तय नहीं हुआ. साल 2023 में जब यूनेस्को ने यह घोषणा की, तो कोझिकोड यह खिताब पाने वाला देश का पहला शहर बना. यहाँ के लोगों का किताबों और पढ़ाई से पुराना नाता है. लेखन, पढ़ना और किताबें छापना—ये सब यहाँ की रग-रग में बसा हुआ है.

कोझिकोड की सबसे खास बात यह है कि यहाँ की गलियों में आपको किताबों की खुशबू मिल जाएगी. यहाँ के लोग सिर्फ न्यूज़पेपर ही नहीं, बल्कि मैगज़ीन और किताबें पढ़ने के भी बेहद शौकीन हैं. यहाँ के लेखकों ने समाज और संस्कृति से जुड़ी ऐसी कहानियाँ लिखी हैं, जो आम आदमी के जीवन को दिखाती हैं.

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इस शहर को साहित्य का केंद्र बनाए रखने में यहाँ के पुस्तकालयों (Libraries) और छोटी-बड़ी बुकशॉप्स का बहुत बड़ा हाथ है. यहाँ कई ऐसे ग्रुप्स हैं जो नियमित रूप से साहित्य पर चर्चा करते हैं, जिससे नई पीढ़ी का जुड़ाव किताबों से बना रहता है. साहित्य यहाँ केवल अलमारियों में बंद नहीं है, बल्कि लोगों की बातचीत का हिस्सा है.

यूनेस्को ने जब यह टाइटल देने का सोचा, तो उन्होंने कई चीजें देखीं. जैसे—शहर का इतिहास कैसा है? यहाँ कितने लेखक हैं? कितनी किताबें छपती हैं? और क्या यहाँ किताबें आसानी से उपलब्ध हैं? कोझिकोड इन सभी पैमानों पर खरा उतरा. यहाँ होने वाले साहित्यिक फेस्टिवल और इवेंट्स ने भी इसे नंबर-1 बनाने में मदद की.

इतिहास की बात करें, तो ‘जामोरिन’ राजाओं के समय से ही कोझिकोड ज्ञान का केंद्र रहा है. आजादी के पहले और बाद में यह शहर छपाई और पब्लिशिंग का हब बन गया. कई पुराने और मशहूर मलयालम अखबार यहीं से शुरू हुए थे, जिन्होंने लोगों तक नई सोच और खबरें पहुँचाने का काम किया.

कोझिकोड की मिट्टी से वैकोम मोहम्मद बशीर और एम.टी. वासुदेवन नायर जैसे दिग्गज लेखकों का नाम जुड़ा है. इन लेखकों ने अपनी कलम से इंसान की भावनाओं, राजनीति और समाज की हकीकत को बयां किया. आज भी इनकी लिखी किताबें स्कूलों और कॉलेजों में बड़े चाव से पढ़ाई जाती हैं.

कोझिकोड की एक और अच्छी बात यहाँ के पब्लिक रीडिंग रूम्स हैं. यहाँ आपको छात्र, टीचर्स और बुजुर्ग—सब एक साथ बैठकर पढ़ते हुए मिल जाएंगे. यहाँ केवल कहानियाँ ही नहीं छपतीं, बल्कि साइंस, इतिहास और दूसरी भाषाओं की किताबों के अनुवाद भी बड़ी मात्रा में पब्लिश होते हैं.

कुल मिलाकर, कोझिकोड को मिला यह वैश्विक सम्मान हर भारतीय के लिए गर्व की बात है. यह शहर हमें सिखाता है कि जिस जगह पर किताबों की कद्र होती है, वह जगह दुनिया के नक्शे पर अपनी अलग चमक बिखेरती है. अगर आप भी किताबों के शौकीन हैं, तो एक बार इस शहर की सैर जरूर करें.(All Image Credit : Canva)



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