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रामविलास पासवान की सियासी विरासत बचा पाएंगे चिराग? जानें क्या कहते हैं हाजीपुर के समीकरण

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लोकसभा चुनाव 2024, लोकसभा चुनाव, , चिराग पासवान हाजीपुर सीट- इंडिया टीवी हिंदी

छवि स्रोत: पीटीआई
हाजीपुर की रैली में लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल हैं।

हाजीपुर: अपने केलों के लिए प्रसिद्ध बिहार के हाजीपुर संसदीय क्षेत्र दुनिया के लोकतंत्र का पाठ्यचर्या वाले वामपंथी जिले का ही हिस्सा है। गंगा और गंडक नदियों के संगम वाला यह क्षेत्र समाजवादियों के प्रभाव वाला क्षेत्र माना जाता है। इस कारण यहां चुनाव को लेकर कई मुद्दे सामने आ रहे हैं। इस चुनाव में न केवल इस संसदीय क्षेत्र पर पूरे देश की नजर है, बल्कि यह कहा जा रहा है कि इस क्षेत्र का अध्ययन करने के बाद इस क्षेत्र के स्थायी भवनों के कार्मिकों और उनकी विरासत को भी तय किया जा सकेगा।

मुख्य मुकाबला दोनों गठबंधन के बीच

स्थायी चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले एनडीए ने यहां से लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष बने चिराग़ चुनावी मैदान में उतारा गया है, जबकि अन्य दलों के दलों ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता शिवचंद्र राम को परेशान किया है। इस क्षेत्र में मुख्य मुकाबला दोनों गठबंधन के बीच ही माना जा रहा है। 19.53 लाख से अधिक विशाल मस्जिद वाले हाजीपुर संसदीय क्षेत्र में हाजीपुर, लालगंज, जापान, राजापाकर, राघोपुर और महनार विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं। हाजीपुर संसदीय क्षेत्र 1952 में सारण साहा संसदीय क्षेत्र का हिस्सा था। वर्ष 1957 में इस क्षेत्र में अनुभव आया था।

4 दशक तक फार्मासिस्ट-पॉटर्न केंद्र

1957 से 1971 तक यह क्षेत्र केसरिया संसदीय क्षेत्र के नाम से जाना गया। पिछले चुनाव में यहां से प्लाट पॉट के पशुपति कुमार पार्स विजयी हुए थे। यहां से रिकॉर्ड किए गए गणित से नॉइथ गिनीज बुक में नाम दर्ज किया गया था। यहां की सभ्यता 4 दशक तक संग्रहालय संग्रहालय के संग्रहालय घूमती रही है। पिछले चुनाव से इस बार बाकी जगह नजर आ रही हैं। पिछले चुनाव से अलग इस चुनाव में इस कर्मभूमि से उनके बेटे चिराग मैदान में उतरे हैं।

चाचा से मामा के बाद चिराग ने मारी बाजी

2024 के चुनाव में जहां पासवान को जाति के आधार पर वोट, बीजेपी और विचारधारा के आधार पर वोट और पीएम मोदी के नाम पर भरोसा है, वहीं राजद को अपने सामाजिक आधार पर वोट देने का भरोसा है। फ़्लोरिडा को अपनी ओर आकर्षित करने में दोनों गठबंधन के नेता भी कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं। पार्टी के निधन के बाद एलजेपी के दो गुट टूट गये. चिराग़ और उनके चाचा पारस में सम्मानित हो गए। दोनों अलग-अलग पार्टियों का नेतृत्व कर रहे हैं। इस सीट पर दोनों ने इशारा किया था, लेकिन अंत में यह सीट चिराग के हाथ लग गई।

मोदी ने चिराग के समर्थन में निकाली रैली

हालाँकि उनके चाचा पार्स की पार्टी नेशनल रिपब्लिक भी एनडीए के साथ है। पिछले चुनाव में चिराग जमुई से सांसद चुने गए थे। जातीय आधार पर इस क्षेत्र में यादव, राजपूत, भूमिहार, कुशवाह और किसान की संख्या अधिक है। अति पिछड़ा वर्ग के पात्रों का भी चुनावी प्रभाव प्रभावित होता है। सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हाजीपुर में चिराग के समर्थन में एक रैली को संबोधित करते हुए शेयर बाजार को याद किया। उन्होंने सामाजिक न्याय के सच्चे साधक को बताया और कहा कि शास्त्रकार जी की आत्मा को केवल भर से शांति नहीं मिलती, उनकी आत्मा को शांति तब मिलती है जब उन्हें अनुयायी से भारी वोट मिलेगा।

राजद ने भी अपना पूरा जोर लगाया

ऐसा माना जाता है कि दोनों गठबंधन में गठबंधन को लेकर अपने-अपने वोट बैंक और कैडर सीट को अंतिम समय तक सहज कर बनाए रखने की चुनौती है। हालांकि विपक्षी शिवचंद्र राम के लिए राजद ने पूरा जोर लगाया है। सोहना, चिराग पासवान को जहां मोदी और नीतीश के नाम और बीजेपी के कैडर की मजबूत स्थिति का सहारा है, वहीं शिवचंद्र राम को अपने वोट बैंक पर भरोसा है। अब इनमें भरोसेमंद कलाकार कितने खरे उतरते हैं, यह तो 4 जून के चुनाव नतीजों के बाद ही पता चलेगा। हाजीपुर में 20 मई को मतदान होना है। (आईएएनएस)

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