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- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की विश्वसनीयता दांव पर, पूरी प्रोफ़ाइल जांचें
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दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के सबसे प्रतिष्ठित शेयरों में से एक इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया यानी ईसीआई की साख इन दिनों में है। अपोजीशन के संस्थापक राहुल गांधी ने तीसरी बार प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मोदी सरकार और ईसीआई पर वोट चोरी का आरोप लगाया है।
राहुल ने 1 घंटे 20 मिनट लंबी प्रेस कॉन्फ्रेंस में वोटर वैयर को बुलाया। उन्होंने बताया कि हरियाणा में 3.5 लाख मतदाताओं के नाम की सूची काट दी गई। बिहार में भी यही निबंध जा रहा है। चुनाव से ठीक पहले वोटर लिस्ट दी जाती है, ताकि लोकतंत्र को मारा जा सके।
राहुल लगातार इलेक्शन कमीशन और बीजेपी पर हमलावर हैं। इससे पहले उन्होंने 7 अगस्त को फिर 18 सितंबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस में ईसीआई प्रमुख पर वोटिंग मशीन की रक्षा करने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि ‘मुख्य विद्युत आयुक्त ज्ञानेश कुमार लोकतंत्र को नष्ट करने वालों और वोटों को बचा रहे हैं।’
ऐसे में जानिए कौन हैं देश के मुख्य चुनाव आयु राशि ज्ञानेश कुमार…


यूनियन कोऑपरेशन केस्थित रह गए हैं
ज्ञान कुमार 31 जनवरी, 2024 को सहकारिता मंत्रालय (सहकारिता मंत्रालय) के सचिव यानी यूनियन कोऑपरेशन के पद से हटा दिए गए। ये केंद्रीय मंत्री अमित शाह के दौरे पर हैं। ज्ञानेश का यह दूसरा पद था, जब वे शाह के साथ काम कर रहे थे। मई वो 2022 से गृह मंत्रालय में कटौती थी।
उन्होंने 5 साल तक गृह मंत्रालय में काम किया, जहां उन्होंने मई 2016 से लेकर सितंबर 2018 तक कॉस्ट जॉइंट किया और उसके बाद सितंबर 2018 से लेकर अप्रैल 2021 तक सब्सिल क्लब के पद पर रहे।
जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन की तैयारी
परदे पर चर्चा के दौरान ज्ञानेश कुमार जम्मू-कश्मीर के मामलों को देख रहे थे। इसी तरह 5 अगस्त, 2019 के दौरान एडिट 370 को रद्द करने की घोषणा की गई थी।
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, जब एलोकेशन 370 को रद्द करने का कानून लाया जा रहा था तो उस वक्त वह विपक्षी अमित शाह के साथ लगातार संसद में आए थे। साथ ही उन्हें जम्मू-कश्मीर रिज़र्व बैंक को तैयार करने की ज़िम्मेदारी दी गई थी।

नॉर्थ ब्लॉक में ज्ञानेश कुमार को एक बार फिर से सबसे बेहतरीन रेस्टोरेंट कहावा में रखा गया था। इसी आदत के चलते उन्हें ‘कहवा मन’ कहा जाने लगा।
राम जन्मभूमि ट्रस्ट के गठन में भी शामिल हैं
गृह मंत्रालय में रहते थे ज्ञानेश श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन में भी शामिल थे। वे ट्रस्ट बन गए रिलेटेड लीगल और कॉन्ट्रैक्ट में काम करने में फाइनल में अहम भूमिका निभाई थी। इन्हें केन्द्र सरकार द्वारा अपने प्रतिनिधि के रूप में सदस्य (पदेन सदस्य या पदेन सदस्य) के रूप में नियुक्त किया जाता है।
इसके अलावा उन्होंने तीन तलाक कानून की मसौदे की तैयारी में भी भूमिका निभाई थी।
प्लेसमेंट के 2 महीने में चुनाव आयुक्त बने
उत्पाद होने के दो महीने बाद 14 मार्च, 2024 को चुनाव आयुक्त बनाया गया था। उनके वैज्ञानिक विश्लेषण के अगले ही दिन यानी 15 मार्च, 2024 को चुनाव आयोग ने चुनाव कार्यक्रम की घोषणा की थी।
चुनाव आयुक्त का पद आश्चर्यजनक के लगभग एक साल बाद, 19 फरवरी, 2025 को उन्हें मुख्य चुनाव आयुक्त बनाया गया। वो भारत के 26वें मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) बने।
नए विधानमंडल के बाद पहले सीईसी बने ज्ञानेश कुमार
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की अध्यक्षता वाले चीफ इलेक्शन कमिश्नर एंड इलेक्शन कमिश्नर (अपार्टमेंट, कंडीशन्स ऑफ सर्विस और टर्म ऑफ ऑफिस) अधिनियम, 2023 के तहत हुआ। होने वाले वो नए कानून के तहत नियुक्त होने वाले वे पहले सीईसी बने।
इससे पहले तक मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्त की धमकी 1991 में कानून के तहत बनी थी। इसमें तीन मंडलों की समिति के समर्थक थे-
- प्रधानमंत्री (पीएम)
- समाजवादी पार्टी के नेता Lop)
- भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई)
नये अधिनियम में सीजेआई को प्रस्तावना, चयन समिति का परिवर्तन दिया गया। हालाँकि, नई समिति में भी 3 लोग हैं-
- प्रधानमंत्री (अध्यक्ष)
- समाजवादी पार्टी के नेता (सदस्य)
- प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री (सदस्या)
नई दिल्ली में 17 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 3 वें सलाहकार समिति की बैठक में ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) बनाने का निर्णय लिया गया। बैठक में नामांकित अमित शाह और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी शामिल हुए।

ज्ञानेश के अलावा, विवेक जोशी (हरियाणा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और 1989 बैच के आईएएस अधिकारी) को चुनाव आयुक्त बनाया गया था। वहीं, इलेक्शन कमिश्नर सुखबीर सिंह संधू अपने पद पर बने रहे।
20 राज्यों में चुनाव होना है
ज्ञानेश कुमार के 4 साल के कार्यकाल के दौरान 20. और 1 एक केंद्रशासित प्रदेश (पुडुचेरी) में चुनाव हुआ। अंतिम चुनाव मिजोरम में होगा। इसके अलावा 2027 में राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव और 2029 में लोकसभा चुनाव की तैयारी भी नीयन के पद पर होगी।
ज्ञानेश कुमार ने राजीव कुमार की जगह ली
इससे पहले सीईसी पद पर रहे राजीव कुमार 18 फरवरी, 2025 को पद से हट गए थे। 15 मई, 2022 को 25वें मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में नियुक्त किया गया था। वे 2022 में 16 वें राष्ट्रपति और उप-राष्ट्रपति चुनाव के साथ-साथ 11 राज्यों में विधानसभा चुनाव के लिए जिम्मेदार रहे।
बेटी की नौकरानी है
ज्ञानेश के पिता सुशील कुमार गुप्ता के मुख्य चिकित्सा अधिकारी के पद से छुट्टी ले ली गई। उनके भाई एक आईआरएस अधिकारी हैं और बहन डेकोर में एक स्कूल चलाती हैं। ज्ञान कुमार की बेटी मेधा रूपम की गर्लफ्रेंड और मनीषी बैसाखी, 2014 बैच के आईएएस अधिकारी हैं।
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