‘ईरानी तेल ले लेंगे, खार्ग आईलैंड पर कब्जा है टारगेट’, ईरान में मिलिट्री ऑपरेशन को लेकर ट्रंप ने कर दिया चौंकाने वाला खुलासा


ट्रंप ने कहा कि उनकी प्राथमिकता ईरान के तेल पर नियंत्रण स्थापित करना है। उन्होंने अपने इस संभावित कदम की तुलना वेनेजुएला की स्थिति से करते हुए कहा कि वहां भी पहले ऐसी ही कार्रवाई के बाद तेल संसाधनों पर नियंत्रण की कोशिश की गई थी।

फोटो: सोशल मीडिया

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मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध आज 31वें दिन में पहुंच गया है। ईरान के साथ चल रहे संघर्ष के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने एक साक्षात्कार में कहा कि अमेरिका ईरान के तेल संसाधनों पर नियंत्रण करने और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण खार्ग द्वीप पर कब्ज़ा करने के विकल्प पर विचार कर रहा है। साथ ही उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान के माध्यम से ईरान के साथ अप्रत्यक्ष बातचीत में प्रगति हो रही है और समझौता जल्द संभव है।

ट्रंप ने कहा कि उनकी प्राथमिकता ईरान के तेल पर नियंत्रण स्थापित करना है। उन्होंने अपने इस संभावित कदम की तुलना वेनेजुएला की स्थिति से करते हुए कहा कि वहां भी पहले ऐसी ही कार्रवाई के बाद तेल संसाधनों पर नियंत्रण की कोशिश की गई थी।

युद्ध के असर से तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी

करीब एक महीने से जारी इस युद्ध का असर वैश्विक तेल बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। संघर्ष शुरू होने के बाद से कच्चे तेल की कीमतों में 50 प्रतिशत से अधिक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सोमवार को एशियाई बाजार में कच्चे तेल की कीमत 116 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जो इस युद्ध के दौरान अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है।

खार्ग द्वीप पर कब्ज़े को लेकर क्या बोले ट्रंप?

ट्रंप ने कहा कि ईरान के तेल पर नियंत्रण उनकी “सबसे पसंदीदा रणनीति” है, हालांकि अमेरिका के भीतर कुछ लोग इस कदम का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने संकेत दिया कि खार्ग द्वीप, जहां से ईरान का अधिकांश तेल निर्यात होता है, उस पर कब्ज़ा करने का विकल्प भी विचाराधीन है। हालांकि अंतिम निर्णय अभी नहीं लिया गया है और सभी विकल्प खुले हैं।

मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैनिकों की तैनाती बढ़ी

इस बीच अमेरिका ने क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाने का फैसला किया है। जमीनी कार्रवाई की तैयारी के तहत 10 हजार अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती का आदेश दिया गया है। शुरुआती चरण में दर्जनों सैनिक क्षेत्र में पहुंच चुके हैं, जबकि लगभग 2,200 मरीन सैनिक और 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के हजारों जवानों को भी तैनाती के लिए भेजा जा रहा है।




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