राहुल गांधी ने इस नारे को राज्य की जनता का ‘‘अपमान’’ और ‘‘अहंकार की पराकाष्ठा’’ बताया।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं मुख्यमंत्री को सलाह दूंगा कि वह इस अभियान को केरल की सड़कों से हटा लें। जब भी कोई केरलवासी उस पोस्टर को देखता है, तो इससे अपमान होता है।’’
राहुल गांधी ने कहा, ‘‘यही वह अहंकारी मानसिकता है जिससे हम लड़ रहे हैं। यह वही मानसिकता है जो नरेन्द्र मोदी, अमित शाह और असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा की है- यह सोच कि वे यहाँ लोगों पर राज करने आए हैं।’’
उन्होंने कहा कि राजनीतिक नेताओं को विनम्रता के साथ और लोगों के साथ मिलकर काम करना चाहिए।
कांग्रेस नेताओं ने कहा, ‘‘यह महाराजाओं का जमाना नहीं है कि वे यह दावा करें कि केवल वही शासन कर सकते हैं। यह एलडीएफ का भी अपमान है, क्योंकि इसका मतलब यह निकलता है कि कोई अन्य व्यक्ति सक्षम नहीं है।’’
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि बीजेपी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और वाम मोर्चा में ‘‘शासन करने के लिए ही जन्म’’ लेने वाली मानसिकता मौजूद है।
केरल के पिछले कांग्रेस नेताओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि के. करुणाकरण, ओमन चांडी और ए.के. एंटनी ने ऐसे नेतृत्व की मिसाल पेश की जिसकी जड़ें विनम्रता और जनसेवा में थीं।





