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Budget 2026 Expectations : ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग को मिलेगा बूस्ट, बजट में नई ड्रोन स्कीम की संभावना: सूत्र – budget 2026 expectations drone manufacturing to get a boost new drone scheme likely in the budget sources

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बजट 2026 उम्मीदें: देश में डूबी मैन्युफैक्चरिंग को बूस्ट मिल सकता है। दस्तावेज़ के अनुसार बजट में नई डूबत स्कॉच आने की संभावना है। इस पर मुख्य विवरण के साथ सीएनबीसी-आवाज़ के रोशन सिंह ने गोदाम के बारे में जानकारी के आधार पर बताया कि बजट में नई डूबान आने की संभावना है। नागरिक परिवहन मंत्रालय ने एक खास प्रस्ताव रखा है। इसके तहत डूबान विनिर्माण इकाई की स्थापना पर कैपेक्स प्रोत्साहन संभव है।

कंपनी के मुताबिक, प्रोडक्शन मैन्युफैक्चरिंग में R&D (रिसर्च एंड कंपनी) को भी प्रोत्साहन संभव है। इस श्लोक में जापानी कंपनी का निर्माण विशेष जोर-शोर से किया जा सकता है। नई योजना पिछली पीएलआई स्काई की जगह। सिर्फ असेंबली नहीं, बल्कि इसमें पूरी तरह से मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस होगा। इसके अलावा एंटी-ड्रोन तकनीक के अलावा ड्रोन ऐज ए सर्विस और इसकी लीजिंग से भी मदद मिल सकती है। इस स्कीम में स्वदेशी और सॉफ्टवेयर पर फोकस होगा।

साइंटिस्ट है कि पिछले कुछ सागर में पीएलआई स्कॉच ने सूरज सेक्टर को काफी समर्थन दिया है, लेकिन अब सरकार इसे और बड़े पैमाने पर फलक पर ले जाना चाहती है। नई योजना के तहत बैटरी, मोटर और सेंसर को भारत में ही बनाने के लिए भारी मात्रा में रकम दी जा सकती है। वित्त मंत्रालय के कार्मिकों के टुकड़े जब फरवरी 2026 में बजट पेशोस्कोपी में शामिल हुए, तो अंबानी नजरें डूबते सेक्टर पर टिकी होंगी। सरकार का मानना ​​है कि समुद्र सिर्फ मनोरंजन या फोटोग्राफी के लिए नहीं है, बल्कि यह खेती, रक्षा, आपदा और आपदा प्रबंधन में गेम-चेंजर साबित हो सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए, बजट 2026 में एक डेडिकेटेड योजना का कार्यान्वयन होने की संभावना है जो न केवल बड़े सहयोगियों को बल्कि छोटे लक्ष्यों को भी जरूरी मदद तक पहुंचाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले कुछ सागर में भारत में करोड़ों लोगों को रोजगार मिले और भारतीय डूब में पूरी दुनिया के टुकड़े बिकें।

भारत में जापानी बनाने वाली लिस्टेड निवेशक

आइडियाफोर्ज, आरव मानवरहित सिस्टम और स्काईलार्क ड्रोनएस जैस भारतीय डूबम डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग में इंजीनियर और तकनीशियन काम करते हैं। आइडियाफोर्ज टेक्नोलॉजी मुख्य रूप से मानव अनुपयोगी हवाई वाहन (यूएवी) यानि डायवर्जन बनाने के व्यवसाय में शामिल है। कंपनी के उत्पादों पर सुरक्षा और निगरानी का प्रयोग किया जाता है। इन अन्य हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स मुख्य रूप से विमान और एयरोस्पेस सिस्टम पर फोकस किया जाता है लेकिन कंपनी मानव रहित हवाई वाहन (यूएवी) यानी डूब और डूब तकनीक में भी है।

ज़ेन टेक्नोलॉजीज एक बचाव जहाज़ निर्माण करने वाली कंपनी है। इसके एंटी-ड्रोन सिस्टम डूबे हुए कम्युनिकेशन को जाम करके पसंद का पता लगाते हैं, उन्हें ट्रैक करते हैं और उन्हें चिल्लाते हैं। कंपनी सहायक और रक्षा उपकरण के लिए सिम एंबोलर का भी स्थान है। पारस डिफेंस एंड स्पेस टेक्नोलॉजीज अपनी एक सहायक कंपनी में एंटी-ड्रोन सिस्टम से एंटी-ड्रोन सिस्टम सहित डूब क्षेत्र में प्रमुख उपस्थिति दर्ज की गई है।

नवरत्न कंपनी भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) ने भी समय के साथ कदम बढ़ाए हैं और अब यह सूर्यास्त के नए और उभरते क्षेत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा है। DRDO ने एक काउंटर-ड्रोन सिस्टम विकसित किया, जिसे बाद में BEL द्वारा निर्मित और संचालित किया गया।

डिक्सन टेक्नोलॉजीज डूब के उत्पादन में शामिल हैं, समुंद्री कंज्यूमर और ऐतिहासिक उपयोग के लिए डूब शामिल हैं। भारत में एक अग्रणी इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माता कंपनी है, जिसके पास विविध उत्पादों का पोर्टफोलियो है, जिसमें साम्राज्य सहित विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद शामिल हैं।

लार्सन एंड टुब्रो लिमिटेड (एलएंडटी) इसमें भी पर्यवेक्षण और टोही सहित विभिन्न उपयोगों के लिए साम्राज्य प्रौद्योगिकी के विकास और इंटीग्रेशन मिशन को सक्रिय रूप से शामिल किया गया है। इसके अलावा रतनइंडिया एंटरप्राइजेज उन्होंने भी उद्यमों की योजना की घोषणा की है, विशेष रूप से हवाई सर्वेक्षक, वैज्ञानिकों का निरीक्षण और स्टार्टअप सेवा पर ध्यान केंद्रित किया गया है।



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