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Datun for healthy Tooths: मॉर्डन जमाने के टूथब्रश से ज्यादा दांतों को हेल्दी रखने के लिए दातुन फायदेमंद होते हैं. आयुर्वेद में इसे ओरल हेल्थ केयर के लिए अहम बताया जाता है. यदि आप दांतों की सफाई के लिए नीम या जामुन की दातुन का इस्तेमाल करते हैं, तो मुंह की दुर्गंध से दांतों की सड़न तक जैसी ओरल हेल्थ इश्यूज कभी नहीं होगी.
Datun for healthy Tooths: मुंह की सफाई का असर आपके पूरे सेहत पर दिखता है. इसलिए सही क्लिनिंग प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करना जरूरी होता है. ओरल हाइजीन के महत्व को समझाने के लिए हर साल 20 मार्च को वर्ल्ड ओरल हेल्थ डे भी मनाया जाता है. इसका उद्देश्य लोगों को मौखिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना है. ऐसे में इस मौके पर आयुर्वेद की पुरानी परंपरा दातुन का महत्व समझना जरूरी है, जिसे आधुनिक टूथब्रश से ज्यादा असरदार माना गया है.
आयुर्वेद के महान आचार्य महर्षि वाग्भट ने अपने ग्रंथ अष्टांग हृदयम में दातुन के फायदे बताए हैं. उनके अनुसार, दातुन करने से मुंह की बदबू दूर होती है, दांत और जीभ साफ रहते हैं और स्वाद भी बेहतर होता है. हाइजीन के नजरिए से भी ये एक बेस्ट विकल्प होता है, क्योंकि रोजाना दांतों को साफ करने के लिए नए और फ्रेश दातुन का इस्तेमाल करना होता है. ऐसे में दातुन सिर्फ दांत साफ करने का तरीका नहीं, बल्कि पूरे शरीर के लिए लाभकारी है.
कौन से पेड़ के दातुन दांतों के लिए फायदेमंद?
वाग्भट ने कड़वी और कसैली टहनियों को दातुन के लिए सबसे अच्छा माना है. इनमें नीम, मदार, बबूल, अर्जुन, आम, अमरूद, जामुन, महुआ, करंज, बरगद, अपामार्ग और बेर शामिल हैं. इसके अलावा शीशम और बांस का भी उपयोग बताया गया है.
मौसम के अनुसार बदलें दातुन (Health Benefits of Using Datun)
मौसम के हिसाब से दातुन चुनना भी जरूरी है. गर्मियों में नीम, मदार या बबूल, सर्दियों में अमरूद या जामुन और बरसात में आम या अर्जुन की टहनी फायदेमंद होती है. नीम में एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं, जो दांतों की गंदगी, प्लाक और बदबू को खत्म करते हैं. यह मसूड़ों की सूजन और खून आने की समस्या में भी राहत देता है.वहीं, बबूल कफ-पित्त को संतुलित करता है और मसूड़ों को मजबूत बनाता है. अर्जुन दिल और ब्लड प्रेशर से जुड़ी समस्याओं में मददगार है. महुआ, बरगद, अपामार्ग, करंज और बेर भी अलग-अलग बीमारियों में लाभ पहुंचाते हैं.
इन बातों का ध्यान रखें
दातुन हमेशा 6–8 इंच लंबी होनी चाहिए और उसके सिरे को चबा कर ब्रश जैसा बना लेना चाहिए. सुबह-शाम दातुन करना बेहतर है. करते समय उकड़ू बैठना लाभदायक माना गया है. ध्यान रखें कि नीम जैसी दातुन लगातार तीन महीने से ज्यादा न करें, बीच-बीच में बदलाव करना जरूरी है.
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शारदा सिंह बतौर सीनियर सब एडिटर News18 Hindi से जुड़ी हैं. वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्यू पर आधारित रिपोर्ट्स बनाने में एक्सपर्ट हैं. शारदा पिछले 5 सालों से मीडिया …और पढ़ें
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