तेरहवीं पार्टी में शामिल हुए थे पार्टी के सबसे बड़े नेता जयंत सिन्हा उन्हें दो दिनों के अंदर के अंदरूनी सूत्र ने बताया है। चुनावी प्रचार से खुद को दूर रखें और वोट न देने की बात लेकर लेकर जाने वाली पार्टी ने तलब किया है।
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वहीं प्रदेश भाजपा ने अपने क्षेत्रीय अध्यक्ष राज सिन्हा और उनके क्षेत्रीय पांच मंडल अध्यक्षों को भी नोटिस जारी किया है। प्रदेश के सबसे बड़े आदित्य साहूकार का साइन सेल लेटर जारी हो गया है।
इस बार के चुनाव में बीजेपी ने हजारीबाग से मनीष पॉल को टिकट दिया था। कल इस सीट के लिए वोटिंग हुई। जयंत सिन्हा ने पार्टी की पहली लिस्ट आने से पहले ही चुनाव लड़ने की इच्छा नहीं जताई थी।
प्रदेश भाजपा की ओर से जारी पत्र में लिखा गया है कि पार्टी की पसंदीदा पार्टी ने चुनावी प्रचार में किसी भी खिलाड़ी को शामिल नहीं किया है। आप पाठ्यपुस्तक कार्य में भी रुचि नहीं ले रहे हैं।
लोकतंत्र के महापर्व में अपने फ्रैंचाइज़ी का प्रयोग करना भी नहीं समझा। आपकी इस ननिहाल से पार्टी की छवि धूमिल हुई है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी के निर्देश आप इस संबंध में दो दिन में साजिरन डे।

पार्टी के काम से दूरियां बनाने वाली पार्टी ने शो-कॉज किया है।
पार्टी की छवि खराब हो रही है
प्रतुल शाहदेव ने कहा कि जयन्त सिन्हा की पोलिंग इमेज से पार्टी की छवि खराब नहीं हो रही है। वे चुने हुए न्यूनतावादी हैं। उन्हें कम से कम मतदान में सक्रिय किया जाना चाहिए। इस तरह का कदम नहीं है. यह नकारात्मक संदेश जाता है।
दिवंगत सहयोगी राज सिन्हा को भी नोटिस
पार्टी की ओर से धनबाद विधायक राज सिन्हा और उनके विधानसभा क्षेत्र के पांच मंडल अध्यक्षों को भी नोटिस जारी किया गया है। आदित्य साहू ने एक पत्र जारी किया है जिसमें लिखा है कि धनबाद कांग्रेस क्षेत्र से धुलु राजू को इस्तीफा देने की घोषणा करने के बाद उन्होंने सांगठनिक कार्यों से दूरी बना ली है। इतना ही नहीं आप चुनाव प्रचार में भी रुचि नहीं दिखा रहे हैं।
पत्र में विधानसभा क्षेत्र में भाजपा और घोषित लोहिया के खिलाफ नकारात्मक बातें कही जा रही हैं। इससे जनता के बीच गलत मैसेज जा रहा है। पार्टी से राज सिन्हा ने पूछा है कि आपको पार्टी का पद क्यों नहीं हटाया जाए। उदाहरण के लिए दो दिनों में उत्तर भी कहा गया है।

टिकट कटने के बाद जयन्त ने बनाई दूरी
यशवंत सिन्हा के बेटे जयंत सिन्हा ने कुछ ही घंटे पहले बीजेपी की पहली लिस्ट घोषित होने से कुछ ही घंटे पहले राजनीति से दूरी बनाने की घोषणा कर दी। इस संबंध में उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से पार्टी नेतृत्व को लेकर अपने विचार व्यक्त किए थे।
वह सालों में रहने की बात कहती थी। लेकिन जब भाजपा की ओर से चुनावी तैयारियों को लेकर सभी सदस्यों और राष्ट्रव्यापी हड़ताल के साथ अप्रैल माह के पहले सप्ताह में बैठक हुई तो जयंत सिन्हा इसमें शामिल नहीं हुए।
