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BJP NDA Meeting LIVE Updates: PM Modi, Nitish Kumar, Chandrababu Naidu, JDU, TDP | NDA गठबंधन: संसद के सेंट्रल हॉल में NDA सांसदों की बैठक आज, मंत्रालयों के बंटवारे पर बातचीत होगी; मोदी 9 जून को शपथ लेंगे

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नई दिल्ली8 मिनट पहले

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5 जून को एनडीए की पहली बैठक पीएम आवास में शाम 4 बजे हुई थी।  - दैनिक भास्कर

5 जून को एनडीए की पहली बैठक पीएम आवास में शाम 4 बजे हुई थी।

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के संसदीय दल की बैठक आज सुबह 11 बजे संसद के सेंट्रल हॉल में होगी। इसमें सरकार बनाने का दावा पेश किया जाएगा। साथ ही एनडीए सदस्यों के बीच मंत्रालयों के बंटवारे पर भी सहमति बनाने की कोशिश होगी।

न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, नरेंद्र मोदी 9 तारीख को तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। उन्हें एनडीए के नेता बुधवार को ही चुन लिया गया था।

मोदी ने बुधवार को राष्ट्रपति को अपना उम्मीदवार बनाया था। राष्ट्रपति ने अपनी स्वतंत्रता स्वीकार कर 17वीं राष्ट्र भंग कर दी। हालाँकि, नई सरकार के गठन तक मोदी कार्यवाहक प्रधानमंत्री हैं।

नड्डा के आवास पर भाजपा नेताओं की बैठक
दिल्ली में गुरुवार को भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के घर अहम बैठक हुई। इसमें अमित शाह और राजनाथ सिंह भी मौजूद रहे। बैठक में नई सरकार बनाने, भाजपा और उसके सहयोगी दलों को कैबिनेट में जगह देने और शपथ ग्रहण की तैयारियों सहित कई मुद्दों पर चर्चा की खबर है।

भाजपा को बहुमत नहीं, 14 सहयोगी दलों के 53 सांसदों का समर्थन
कांग्रेस चुनाव में भाजपा को 240 वोट मिले हैं। यह बहुमत के आंकड़े (272) से 32 प्रतिशत कम हैं। हालांकि, एनडीए ने 293 सीटों के साथ बहुमत के आंकड़े को पार कर लिया। एनडीए में भाजपा के अलावा 14 सहयोगी दलों के 53 सांसद हैं।

गठबंधन में चंद्रबाबू की टीडीपी 16 सीटों के साथ दूसरी और नीतीश की जेडीयू 12 सीटों के साथ तीसरी सबसे बड़ी पार्टी है। दोनों ही इस वक्त भाजपा के लिए जरूरी हैं। इनके बिना भाजपा की सरकार बनाना मुश्किल है।

16 मंत्री चुनाव हारे, 35-40 नए चेहरे शामिल हो सकते हैं

एनडीए ने नरेंद्र मोदी को संसदीय दल का नेता चुन लिया है। लगातार तीसरी बार उनका प्रधानमंत्री बनना तय है। हालांकि, इस बार उनकी कैबिनेट बिल्कुल नई नजर आएगी। इसमें 40 नए चेहरे शामिल हो सकते हैं। भास्कर एक्सप्रेस में जानिए कि आखिर अमित शाह, राजनाथ सिंह जैसे कुछ प्रमुख मंत्रियों को इस बार क्यों छोड़ा जाएगा कैबिनेट…

महाराष्ट्र में 5-6 लाख की संपत्ति हो सकती है मिल
मोदी सरकार के नए कैबिनेट में महाराष्ट्र के 5-6 सचिवालय को शामिल करने की चर्चा है। सूत्रों के अनुसार, सभी पांच सांसदों के लिए एक कैबिनेट मंत्री पद का फॉर्मूला तय हुआ है। नितिन गडकरी, नारायण राणे और पीयूष गोयल का नाम मंत्री पद के लिए दौड़ में आगे है।

सरदार पटेल (शिंदे गुट) एक कैबिनेट मंत्री और एक राज्यमंत्री का पद मांग रही है। एनसीपी (अजित गुट) भी एक कैबिनेट पद की मांग रख सकती है। एनडीए सरकार के प्रति मराठाओं की नाराजगी दूर करने के लिए मराठा समुदाय से एक मंत्री बनाया जा सकता है।

महाराष्ट्र की 48 लोकसभा सीटों में भाजपा ने 9 सीटों पर जीत दर्ज की है। इस साल भाजपा के दो मंत्रियों को मंत्री बनाया जा सकता है। वहीं, सहयोगी पार्टी भाजयुमो (शिंदे) को 7 और एनसीपी (अजित) को 1 सीट मिली है। 1-1 मंत्री पद मिलने की संभावना है।

भाजपा का जेडीयू-टीडीपी से तालमेल की चुनौती, कई फैसले-सुधार लटकेंगे

भाजपा के पास बहुमत नहीं है। गठबंधन की सरकार में सहयोगी भाजपा की पिछली गलतियों और कई सुधारों को लागू करने में रोड़ा बन सकता है।

उत्साहित, गठबंधन में अहम भूमिका निभाने वाली जेडीयू और टीडीपी के अपने-अपने हित हैं। विगत में एन. चंद्रबाबू नायडू और नीतीश कुमार दोनों भाजपा के साथ दुखद रिश्ते में हैं।

विश्लेषक बताते हैं कि ऐसे में भाजपा को 10 सालों से जारी सुधार के अहम पड़ाव, प्रोजेक्ट को ठंडे बस्ते में डाल सकते हैं।

वो 6 बड़े मुद्दे, जिन पर ठिठक सकते हैं कदम

एक देश-एक चुनाव: इस पर आगे बढ़ना मुश्किल होगा। टीडीपी इसका विरोध कर रही है, जबकि जेडीयू इसका समर्थन कर रही है। विरोध करने वाला फीडबैक भी मजबूत हुआ है।

परिसीमन : भाजपा ने 2029 तक महिला आरक्षण का वादा किया है। यह परिसीमन पर ही लागू होगा। दक्षिण में असर के चलते टीडीपी विरोध में है।

समान नागरिक संहिता : भाजपा इसे देश में लागू करने को तैयार थी। अब पार्टी इसे राष्ट्रीय स्तर से हटा सकती है।

काशी-मथुरा : राम मंदिर का फायदा न मिलने से इस दावे की प्रक्रिया धीमी पड़ सकती है।

विनिनिवेश : जेडीयू सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में विनिवेश के विरोध में हो रही है। भाजपा को इससे कदम पीछे खींचे जा सकते हैं। पार्टी बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की भी मांग करती रही है

मुस्लिम आरक्षण : टीडीपी ने 2018 में आंध्र को विशेष राज्य का दर्जा न देने के मुद्दे पर भाजपा से नाता तोड़ लिया था। अब वह फिर मांग दोहरा सकती है। यही नहीं, आंध्र में मुसलमानों को 4% आरक्षण के मुद्दे पर भी दोनों देशों के अहम मुद्दे टकरा सकते हैं।

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