अखिलेश यादव ने कहा कि उन्होंने पहले भी लोगों को सलाह दी थी कि किसी संभावित संकट को देखते हुए वे गोबर के उपले, जलावन (लकड़ियां) और कोयले के चूल्हे जैसे विकल्प तैयार रखें। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने आपसे कहा था कि गोबर के उपले, जलावन (लकड़ियां) और कोयले के चूल्हे तैयार रखें… लेकिन आपने मेरी सलाह पर ध्यान नहीं दिया। जहां तक हमारी बात है, हमने अपने घर के लिए पहले ही मिट्टी के दो चूल्हे खरीद लिए हैं, क्योंकि खाना पकाने वाली गैस को लेकर हर किसी को मुश्किलों का सामना करना ही पड़ेगा।’’
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि मौजूदा हालात की वजह से लोगों को खाना पकाने के लिए लकड़ी और कोयले जैसे पारंपरिक तरीकों पर ज्यादा से ज्यादा निर्भर होना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि यह समस्या बड़े पैमाने पर फैली हुई है और किसी खास तबके तक ही सीमित नहीं है। रसोई गैस की किल्लत की वजह से लोगों की आजीविका पर पड़ने वाले असर का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि छोटे उद्यमी और व्यापारी सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं, खासकर वे लोग जो रोज कमाते-खाते हैं। आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार के गलत फैसलों की वजह से नागरिकों को गंभीर मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।





