बंगाल चुनाव से पहले पुलिस विभाग में बड़ा फेरबदल, डीआईजी से इंस्पेक्टर स्तर तक 30 अधिकारियों का तबादला


चुनाव तारीखों के ऐलान के साथ ही बंगाल में प्रशासनिक फेरबदल का सिलसिला शुरू हो गया था। आयोग ने सबसे पहले राज्य के मुख्य सचिव और गृह सचिव को बदल दिया था। इसके बाद डीजीपी और कोलकाता पुलिस आयुक्त को भी हटाते हुए उन्हें चुनावी ड्यूटी से दूर कर दिया था।

बंगाल चुनाव से पहले पुलिस विभाग में बड़ा फेरबदल, डीआईजी से इंस्पेक्टर स्तर तक 30 अधिकारियों का तबादला

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पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर भारतीय निर्वाचन आयोग ने शनिवार को पुलिस महकमे में बड़े पैमाने पर फेरबदल करते हुए डीआईजी से लेकर इंस्पेक्टर स्तर तक कुल 30 अधिकारियों के तबादले के आदेश जारी किए हैं। 23 अप्रैल से शुरू होने वाले दो चरणों के मतदान से महज 12 दिन पहले किए गए इस फैसले को चुनावी तैयारियों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

तबादला आदेश के अनुसार, कोलकाता पुलिस में जॉइंट कमिश्नर (क्राइम) का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे रूपेश कुमार की जगह अब सोमा दास मित्रा को नियुक्त किया गया है, जो पहले पश्चिम बंगाल पुलिस के सीआईडी में डीआईजी के पद पर तैनात थीं। इसी तरह, कोलकाता पुलिस के जॉइंट कमिश्नर (हेडक्वार्टर) मिराज खालिद को हटाकर उनकी जगह पश्चिम बंगाल पुलिस के डीआईजी (पर्सनल) रहे सुदीप सरकार को जिम्मेदारी दी गई है। जॉइंट कमिश्नर (इंटेलिजेंस) सौम्य रॉय को भी हटाकर उनकी जगह राज्य पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स में डीआईजी रहीं देब्स्मिता दास को नियुक्त किया गया है।

इसके अलावा चुनाव आयोग ने कोलकाता पुलिस और अन्य पुलिस कमिश्नरेट में डिप्टी कमिश्नर स्तर के सात अधिकारियों का भी तबादला किया है। मनीष जोशी को भांगर के डिप्टी कमिश्नर के रूप में सैकत घोष की जगह जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं वीएसआर अनंतनाग को कोलकाता पुलिस के डिप्टी कमिश्नर (साउथ) के पद पर दीपक सरकार की जगह नियुक्त किया गया है।

प्रशांत चौधरी, सैकत घोष और प्रदीप कुमार यादव को क्रमशः डिप्टी कमिश्नर (ईस्ट), (साउथ-ईस्ट) और (नॉर्थ) के पदों पर तैनात किया गया है। इसके साथ ही राज्य के विभिन्न पुलिस जिलों और कमिश्नरेट में भी कई अन्य बदलाव किए गए हैं। वरिष्ठ और मध्यम स्तर के अधिकारियों के अलावा आयोग ने 18 इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारियों का भी तबादला किया है।

गौरतलब है कि 16 मार्च को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही राज्य में प्रशासनिक फेरबदल का सिलसिला शुरू हो गया था। आयोग ने तब राज्य के मुख्य सचिव और गृह सचिव को भी बदल दिया था। इसके बाद राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और कोलकाता पुलिस आयुक्त को भी हटाते हुए उन्हें चुनावी ड्यूटी से दूर रखने का आदेश जारी किया था।




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