डायबिटीज के मरीजों के लिए बड़ी राहत! इन दूध के सेवन से कम हो सकता है शुगर


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डायबिटीज़ के मरीज अक्सर इस बात को लेकर असमंजस में रहते हैं कि उन्हें किस तरह के दूध का इस्तेमाल करना चाहिए. अगर आप अपने ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल में रखना चाहते हैं, तो आपको इस बात पर खास ध्यान देना चाहिए कि आप किस तरह का दूध पी रहे हैं चाहे वह डेयरी-बेस्ड हो या प्लांट-बेस्ड.

डायबिटीज़ से जूझ रहे लोगों को अक्सर अपने खाने-पीने को लेकर कई सवाल होते हैं. चाय या कॉफी पीने वालों को समझ नहीं आता कि कौन सा दूध इस्तेमाल करें. अगर आप अपने खून में शुगर लेवल कंट्रोल करना चाहते हैं, तो आपको जो दूध पीते हैं उस पर ध्यान देना चाहिए. चाहे वो डेयरी दूध हो या प्लांट बेस्ड दूध, हर तरह का दूध आपके ग्लूकोज लेवल पर अलग असर डालता है.

MSN वेबसाइट और एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अच्छा दूध चुनते समय तीन बातें ध्यान में रखनी चाहिए. कम कार्बोहाइड्रेट, बिना शक्कर और अच्छा प्रोटीन वाला दूध पीना चाहिए. इससे डायबिटीज़ स्पाइक कम होते हैं और एनर्जी भी बनी रहती है.

दूध चुनना क्यों जरूरी है?: दूध में मौजूद कार्बोहाइड्रेट्स शरीर में शुगर में बदल जाते हैं और सीधा ब्लड ग्लूकोज लेवल पर असर डालते हैं. अगर एक साथ ज्यादा कार्बोहाइड्रेट्स ले लिए जाएं, खासकर टाइप 1 या टाइप 2 डायबिटीज़ वालों के लिए, तो ब्लड शुगर लेवल बढ़ सकता है. इसलिए सही दूध चुनना ही नहीं, बल्कि आप कितना पीते हैं ये भी जरूरी है. पूरे दिन कार्बोहाइड्रेट्स को बराबर मात्रा में लेना भी जरूरी है.

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सोया दूध: सोया दूध को खून में शुगर कंट्रोल करने के लिए बहुत अच्छा माना जाता है. इसमें कम कार्बोहाइड्रेट और ज्यादा प्रोटीन का बैलेंस होता है. एक कप दूध में करीब 8–9 ग्राम प्रोटीन होता है, जो शुगर के अवशोषण को धीमा करता है. इससे ग्लूकोज धीरे-धीरे खून में जाता है और शुगर स्पाइक नहीं होता. इसमें फाइबर भी होता है, जो शुगर कंट्रोल करने में मदद करता है. लेकिन हमेशा बिना मीठा वाला सोया दूध ही चुनें.

बकरी का दूध: बकरी के दूध में अच्छे पोषक तत्व होते हैं. इसमें मीडियम मात्रा में प्रोटीन भी है. लेकिन इसमें कार्बोहाइड्रेट और नेचुरल शुगर ज्यादा होती है, जिससे ब्लड शुगर लेवल बढ़ सकता है. इसलिए इसे पूरी तरह से छोड़ने की जरूरत नहीं है, लेकिन इसे सीमित मात्रा में ही लेना चाहिए.

बकरी का दूध: बकरी के दूध में अच्छे पोषक तत्व होते हैं. इसमें मीडियम मात्रा में प्रोटीन भी है. लेकिन इसमें कार्बोहाइड्रेट और नेचुरल शुगर ज्यादा होती है, जिससे ब्लड शुगर लेवल बढ़ सकता है. इसलिए इसे पूरी तरह से छोड़ने की जरूरत नहीं है, लेकिन इसे सीमित मात्रा में ही लेना चाहिए.

बादाम दूध: बादाम दूध में कार्बोहाइड्रेट कम होते हैं, बिना मीठा वर्जन में तो शक्कर भी नहीं होती. इसलिए ये ग्लूकोज लेवल पर कम असर डालता है. लेकिन इसमें प्रोटीन भी कम होता है, जिससे पेट ज्यादा देर तक भरा नहीं रहता. इसलिए ड्राई फ्रूट्स या अंडे जैसे प्रोटीन वाले खाने के साथ लेना बेहतर है.

गाय का दूध: खून में शुगर कंट्रोल करने के लिए गाय का दूध आखिरी विकल्प है. एक कप में करीब 12 ग्राम कार्बोहाइड्रेट होता है. इसमें लैक्टोज नाम की नेचुरल शुगर भी होती है. इससे ग्लूकोज लेवल जल्दी बढ़ सकता है. प्रोटीन के अलावा, ज्यादा कार्बोहाइड्रेट की वजह से ये इस्तेमाल के लिए ज्यादा सही नहीं है.

कार्बोहाइड्रेट, फैट और प्रोटीन का क्या रोल है?.. दूध में सिर्फ कार्बोहाइड्रेट ही नहीं, बल्कि फैट और प्रोटीन भी शुगर पर असर डालते हैं. ज्यादा कैलोरी वाला खाना पचने में टाइम लेता है, जिससे कार्बोहाइड्रेट का असर बदल जाता है. इसलिए डॉक्टर अक्सर कोलेस्ट्रॉल या कैलोरी फ्री दूध पीने की सलाह देते हैं. इससे कैल्शियम और दूसरे पोषक तत्व भी मिलते हैं.

असल खतरा तो मिलाई गई चीनी है. बिना चीनी वाले कई पैक्ड दूध, सिरप और फ्लेवर मिलते हैं. लेकिन ये आपके खून में शुगर लेवल जल्दी बढ़ा सकते हैं. इसलिए लेबल पढ़ना बहुत जरूरी है.



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