सुप्रीम कोर्ट ने मैटरनिटी लीव को लेकर एक बहुत अहम और बड़ा फैसला सुनाया है, जो खास तौर पर बच्चा गोद लेने वाली महिलाओं के लिए राहत भरा माना जा रहा है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि अब सिर्फ तीन महीने तक के बच्चे को गोद लेने वाली ही नहीं, बल्कि उससे ज्यादा उम्र के बच्चे को गोद लेने वाली महिलाएं भी मातृत्व अवकाश की हकदार होंगी।
दरअसल, पहले कानून में यह प्रावधान था कि अगर कोई महिला तीन महीने तक के बच्चे को गोद लेती है, तभी उसे 12 हफ्तों की मैटरनिटी लीव मिलती थी। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने इस नियम को गलत और भेदभावपूर्ण माना।
कोर्ट ने सामाजिक सुरक्षा संहिता के सेक्शन 60(4) को रद्द करते हुए कहा कि यह प्रावधान संविधान के आर्टिकल 14 (समानता का अधिकार) और आर्टिकल 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) का उल्लंघन करता है।





