ऑप्शन (प्रीमियम) और ऑप्शन (एक्साइजड)पर एसटीटी को बढ़ाकर 0.15 प्रतिशत कर दिया है, जो कि पहले क्रमश: 0.1 प्रतिशत और 0.125 प्रतिशत था।
इसके अलावा, एक अप्रैल से फ्यूचर एंड ऑप्शन में 50 प्रतिशत कैश-मार्जिन नियम लागू हो जाएगा।
एक्सचेंज ने एफएंडओ सेगमेंट में सभी ट्रेडों के लिए आवश्यक कुल मार्जिन की जरूरत के नियमों में संशोधन किया है। अब से, ब्रोकरों को यह सुनिश्चित करना होगा कि एफएंडओ सेगमेंट में उनके प्लेटफॉर्म द्वारा ली गई सभी पोजीशनों के लिए आवश्यक कुल मार्जिन का न्यूनतम 50 प्रतिशत नकद के रूप में हो।
म्यूचुअल फंड्स से जुड़े नियम में भी एक अप्रैल से बड़ा बदलाव होने जा रहा है।
नए वित्त वर्ष से बेस एक्सपेंस रेश्यो (बीईआर) सभी म्यूचुअल फंड्स स्कीम में प्रभावी हो जाएगा। इसमें एसेट मैनेजमेंट कंपनी (एएमसी) केवल फीस को शामिल करेंगी, जो कि निवेशकों का फंड मैनेज करने के लिए ली गई है। अन्य लागत जैसे एसटीटी, स्टांप ड्यूटी, ब्रोकरेज और एक्सचेंज फीस आदि को अन्य लागत में दिखाया जाएगा। अब तक इन सभी को एक्सपेंस रेश्यो में जोड़ दिया जाता था, जिसे टोटल एक्सपेंस रेश्यो (टीईआर) कहा जाता है।
शेयर बायबैक से जुड़ा नियम भी नए वित्त वर्ष से बदला जाएंगे। एक अप्रैल से कंपनियों के प्रमोटर्स को शेयर बायबैक में हुए कैपिटल गेन पर 12 प्रतिशत का सरचार्ज देना होगा। हालांकि, इसका रिटेल निवेशकों पर कोई असर नहीं होगा, क्योंकि यह नियम सिर्फ प्रमोटर्स के लिए है।





