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- भास्कर राय | दिल्ली लोकसभा चुनाव से पहले स्वाति मालीवाल मारपीट मामला
नई दिल्ली17 मिनट पहलेलेखक: नवनीत गुर्जर, नेशनल भास्कर, दैनिक भास्कर
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दिल्ली में 25 मई को चुनाव है और यहां आपकी पार्टी की राज्यसभा सदस्य स्वाति मालीवाल की तलाश चल रही है। स्वाति का कहना है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री के पीए ने उनका साथ दिया। जिस दिन जारी हुई उसी दिन उन्होंने रिपोर्ट लिखी, स्टेशन भी पहुंचे लेकिन रिपोर्ट नहीं लिखी।
इस बीच आप नेता संजय सिंह ने इस बात को स्वीकार किया कि स्वाति के साथ बदसलूकी हुई है और सीएम एसके शर्मा पर कार्रवाई जरूर होगी। लेकिन यह हुआ सिद्धांत। इस इवेंट के बाद स्ट्रॉबेरी के टूर पर बिभव कुमार की नजर उनके साथ चली गई। अन्य लोगों ने इसकी निंदा करते हुए कहा कि जब ग्लानि के खिलाफ कार्रवाई ही होती है तो उसके लिए भला क्यों?

इंडिया ब्लॉक की प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल होने के लिए गुरुवार सुबह कृष्णा और संजय सिंह दिल्ली से लखनऊ पहुंचे।
इस बीच कुछ लोगों ने कहा कि स्वाति का पासपोर्ट किसी और को दिया जा रहा है इसलिए ये पूरा मामला बना है। स्वाति ने इन सभी सहयोगियों का खंडन किया और अंतिम गुरुवार को मुख्यमंत्री के पीए विभव कुमार के खिलाफ बंधक दर्ज करवा दिया।
जब घटना के दिन से ही भाजपा विचारधारा ने इस मुद्दे को उठाया तो आप पार्टी के मूड में आ गए थे। इसलिए संजय सिंह ने एक सधा बयान दिया था लेकिन अब इस बेरोजगारी के बाद मामला आर-पार का हो गया है। मान लीजिए स्वाति और आपकी पार्टी में अब किसी भी कलाकार की भूमिका नहीं बताई गई है।
अगर वे राजनीति में हैं तो किसी और पार्टी का दामन थामना पड़ सकता है। फिलहाल तो बीजेपी के कार्यकर्ता इस विवाद को खूब हवा दे रहे हैं। इस घटना के खिलाफ भी प्रदर्शन किया जा रहा है। अब तक यह बात सार्वजनिक नहीं हुई है कि एक महिला सांसद के साथ मुख्यमंत्री के पीए ने ऐसा नारा क्यों लगाया?

शुक्रवार को तीस हज़ारी अदालत में पुष्टि दर्ज की गई, स्वाति मालीवाल।
आख़िरकार यह पूरा मामला किससे हुआ? खैर हक़ीक़त जो भी हो, आपकी पार्टी ने खुद ही चुनाव के पहले दूसरी बार राजनीतिक सिद्धांत को एक बड़ी समृद्धि दी है। इंडिया अलायंस में शामिल शास्त्र को इस मामले में कुछ भी बोलना भारी पड़ सकता है इसलिए वे बस यही कह रहे हैं कि महिला का सम्मान हमारे लिए सर्वोपरि है और जो भी होगा, उसके खिलाफ मुख्यमंत्री कार्रवाई जरूर करेंगे।
ऐसा लगता है कि मामला इतनी जल्दी ठंडा होने वाला नहीं है। इस तरह का विवाद क्यों हुआ? इसके पीछे आखिर क्या छिपा हुआ है, कोई नहीं जानता। कोई नहीं बताता। बिजनेस के दिल्ली चुनाव तक तो ये मामला खानदान तय ही माना जा रहा है।
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