ताकत और नैतिकता की जंग: डोनाल्ड ट्रंप की सत्ता को पोप की खुली चुनौती, वेटिकन को झुकाने की कोशिश में व्हाइट हाउस


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वेटिकन के एक अधिकारी ने ‘द फ्री प्रेस’ को बताया कि पेंटागन पोप लियो से विशेष रूप से नाराज़ था, क्योंकि उन्होंने अपने भाषण में ट्रंप के तथाकथित ‘डोनरो डॉक्ट्रिन’ को चुनौती दी थी. यह ‘डोनरो डॉक्ट्रिन’ असल में अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा ‘मनरो डॉक्ट्रिन’ का ही एक नया रूप है, जिसके तहत यह मांग की गई है कि पश्चिमी गोलार्ध पर अमेरिका का प्रभाव पूरी तरह से निर्विवाद होना चाहिए.

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वेटिकन और डोनाल्ड ट्रंप के बीच टकराव तेज होता जा रहा है. (फाइल फोटो)

वॉशिंगटन. दुनिया की सबसे ताकतवर राजनीतिक सत्ता और सबसे प्रभावशाली धार्मिक संस्था आमने-सामने खड़ी हैं… और टकराव अब खुलकर सामने आ चुका है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के व्हाइट हाउस और वेटिकन के बीच रिश्ते इस कदर बिगड़ चुके हैं कि हालात ‘कूटनीतिक दरार’ से आगे बढ़कर ‘खुली भिड़ंत’ में बदलते दिख रहे हैं.

Pope Leo XIV लगातार ट्रंप प्रशासन की सैन्य नीतियों और आक्रामक विदेश नीति पर हमला बोल रहे हैं. उन्होंने साफ कहा कि दुनिया में संवाद की जगह ‘ताकत की राजनीति’ हावी हो रही है. यानी सीधा निशाना अमेरिका पर. लेकिन असली भूचाल तब आया जब रिपोर्ट्स में खुलासा हुआ कि पेंटागन में हुई एक सीक्रेट मीटिंग में अमेरिकी अधिकारियों ने वेटिकन के प्रतिनिधि को ‘कड़वी चेतावनी’ दे डाली.

अंडरसेक्रेटरी एलब्रिज कोल्बी ने कथित तौर पर साफ शब्दों में कहा, “अमेरिका के पास दुनिया में जो चाहे करने की ताकत है… चर्च को हमारे साथ खड़ा होना होगा.” यह सिर्फ एक बयान नहीं, बल्कि सीधे-सीधे दबाव की राजनीति का इशारा माना जा रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारियों ने यहां तक कि Avignon Papacy का उदाहरण देकर संकेत दिया, जब फ्रांस ने अपनी ताकत से पोप को झुकने पर मजबूर कर दिया था. इस तुलना ने वेटिकन में खलबली मचा दी है और इसे ‘छिपी धमकी’ के तौर पर देखा जा रहा है.

नतीजा? पोप लियो XIV अब अमेरिका जाने से पीछे हट सकते हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने अमेरिका की प्रस्तावित यात्रा तक रद्द कर दी है और यहां तक कहा जा रहा है कि ट्रंप के कार्यकाल में वे अमेरिका का दौरा ही नहीं करेंगे. टकराव की जड़ साफ है – ट्रंप की आक्रामक नीतियां. चाहे ईरान पर हमले हों, इमिग्रेशन पर सख्ती या वैश्विक प्रभुत्व की रणनीति – पोप ने हर मोर्चे पर खुलकर विरोध किया है. उन्होंने ट्रंप की भाषा को ‘पूरी तरह अस्वीकार्य’ बताया, खासकर तब जब ट्रंप ने ईरान को ‘पूरी सभ्यता खत्म करने’ की धमकी दी.

Pope Leo XIV ने साफ कहा, “युद्ध कुछ हल नहीं करता, यह सिर्फ नफरत बढ़ाता है.” वहीं ट्रंप का रुख बिल्कुल उलट – ताकत, दबाव और सैन्य कार्रवाई. अब हालात ये हैं कि अमेरिका और वेटिकन के बीच विश्वास की दीवार लगभग ढह चुकी है. यह सिर्फ दो संस्थाओं का टकराव नहीं, बल्कि ‘ताकत बनाम नैतिकता’ की जंग बनता जा रहा है. सवाल बड़ा है कि क्या यह टकराव सिर्फ बयानबाजी तक रहेगा या फिर वैश्विक राजनीति में एक नए और खतरनाक ध्रुवीकरण की शुरुआत करेगा?

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Rakesh Ranjan Kumar

राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें



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