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Artemis 2 Moon Mission: हम धरती से जैसे चांद को देखते हैं, क्या ये अंतरिक्ष से भी वैसा ही दिखता होगा? इसका जवाब है बिल्कुल नहीं. हाल ही में हैनसेन ओरियन कैप्सूल से आर्टेमिस-II मून मिशन पर गए हुए अंतरिक्षयात्रियों ने अपना अनुभव बताते हुए कहा कि खिड़की से उन्हें जब चंदा को देखा, तो ये वैसा बिल्कुल नहीं लगता, जैसे धरती से लगता है.
आर्टेमिस-2 मिशन पर गए एस्ट्रोनॉट्स के अनुभव.
वाशिंगटन: नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन यानि नासा के अंतरिक्ष यात्री क्रिस्टीना कोच, रीड वाइसमैन, विक्टर ग्लोवर और जेरेमी हैनसेन ओरियन कैप्सूल से आर्टेमिस-II मून मिशन पर गए हुए हैं. नासा के अंतरिक्ष यात्रियों ने स्थानीय समयानुसार रविवार को अमेरिकी मीडिया को बताया कि उन्होंने हैनसेन ओरियन कैप्सूल की खिड़की से चंद्रमा को देखा. अमेरिकी मीडिया एनबीसी के साथ बातचीत के दौरान क्रिस्टीना कोच ने चांद देखने का अपना अनुभव शेयर किया.
अंतरिक्षयात्रियों ने कहा कि यह धरती से दिखने वाले चांद से अलग दिखता है. कोच ने कहा- ‘हम आमतौर पर चांद को देखते आ रहे हैं, यहां आपकी समझ में कुछ ऐसा होता है जो चांद को वैसा नहीं दिखने देता है. जैसे कि चांद का अंधेरे वाला हिस्सा बिल्कुल सही जगह पर नहीं लगता है.’ कोच ने यह भी स्पष्ट किया कि यह चांद का वही अंधेरा वाला हिस्सा है, जिसे अंतरिक्ष यात्रियों ने पहले भी देखा है. कोच ने आगे बताया कि उन्होंने और तीन दूसरे क्रू मेंबर्स अंतरिक्ष यात्री रीड वाइसमैन और विक्टर ग्लोवर और कैनेडियन एस्ट्रोनॉट जेरेमी हैनसेन ने अपने ट्रेनिंग मटेरियल की समीक्षा की और जो कुछ वे देख रहे थे, उससे उसकी तुलना की ताकि उस अनजान नजारे को समझा जा सके.
कैसा लग रहा है कैप्सूल के अंदर?
अंतरिक्ष यात्री ने बताया कि जो दृश्य उन्हें अंतरिक्ष से दिखाई दे रहा था, वह उनके लिए नया और थोड़ा अनजान था. इसलिए उन्होंने अपनी ट्रेनिंग के दौरान सीखी गई जानकारी से उसकी तुलना की. इस प्रक्रिया के जरिए वे उस अलग दिखने वाले नजारे को बेहतर तरीके से समझने की कोशिश कर रहे थे. अंतरिक्ष यात्री यह समझने की कोशिश कर रहे थे कि वास्तव में वे क्या देख रहे हैं और वह उन्हें अलग क्यों महसूस हो रहा है. कोच ने कहा कि सभी क्रू मेंमबर में इसे लेकर काफी उत्साह है. वे ओरियन कैप्सूल के अंदर आराम से सो पा रहे हैं. कैप्सूल लगभग 16.5 फीट चौड़ा है और इसमें कैंपर वैन जितनी रहने की जगह है.
चांद के पार जाने की खुशी
उन्होंने कहा- ‘यहां इंसान होना इस मिशन की सबसे दिलचस्प चीजों में से एक है, उन्होंने बताया कि वे सब बस सामान्य इंसानों की तरह ही अपनी दिनचर्या संभालने की कोशिश कर रहे हैं.’ कोच ने हल्के-फुल्की भाषा में समझाते हुए कहा कि हम चांद के दूसरी तरफ जाकर उसकी शानदार चीजों को देख सकते हैं और फिर सोच सकते हैं. हम्म, शायद मुझे अपने मोजे बदल लेने चाहिए और मोजों की एक जोड़ी ढूंढने की कोशिश कर सकते हैं, तो यह मानव अंतरिक्ष यात्रा का एक अनोखा पहलू है. बता दें कि नासा का ये मिशन 10 अप्रैल को प्रशांत महासागर में स्प्लैशडाउन के साथ पूरा होगा. नासा का लक्ष्य 2028 तक चांद के दक्षिणी ध्रुव के पास दो अंतरिक्ष यात्रियों को उतारना और भविष्य में चांद पर स्थायी बेस बनाना है.
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News18 में इंटरनेशनल डेस्क पर कार्यरत हैं. टीवी पत्रकारिता का भी अनुभव है और इससे पहले Zee Media Ltd. में कार्य किया. डिजिटल वीडियो प्रोडक्शन की जानकारी है. टीवी पत्रकारिता के दौरान कला-साहित्य के साथ-साथ अंतरर…और पढ़ें





