America Iran War | Trump Political Suicide | US Midterm Elections | ईरान अमेरिका जंग | अमेरिका मिडटर्म


तेहरान: खामेनेई और ट्रंप के बीच ईगो वॉर अब खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है. दोनों राष्ट्रपति ही एक-दूसरे पर बंदूक ताने खड़े हैं. खामेनेई जानते हैं कि ईरान, ट्रंप के हथियारों का सामना शायद ना कर पाए लेकिन उन्होंने ट्रंप की कमजोर नब्ज पकड़ ली है. अब अमेरिकी राष्ट्रपति भले ही अब तक जंग की जिद पर अड़े हैं लेकिन अगर उन्होंने ईरान पर अटैक किया तो अपने पैरों में ही कुल्हाड़ी दे मारेंगे. आगे जानें आखिर ऐसे हालात क्यों बन गए कि ईरान पर अटैक करके ट्रंप, खामेनेई नहीं बल्कि अपना ही नुकसान कर लेंगे.

ट्रंप के लिए ‘पॉलिटिकल सुसाइड’ हो सकता है ईरान पर अटैक

एक तरफ राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ईरान को घुटने पर लाने के लिए युद्धपोत और फाइटर जेट्स तैनात कर दिए हैं, तो दूसरी तरफ खुद अमेरिका के भीतर उनके खिलाफ माहौल गरमाता जा रहा है. अगर ट्रंप ने ईरान पर हमला किया, तो उसका सबसे बड़ा खामियाजा उन्हें नवंबर 2026 के मिड-टर्म चुनाव में भुगतना पड़ सकता है. जानकारों का मानना है कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई की सेहत या सत्ता पर क्या असर होगा यह तो बाद की बात है, लेकिन ट्रंप के लिए यह ‘पॉलिटिकल सुसाइड’ साबित हो सकता है.

क्या है ट्रंप का असली इरादा?

ट्रंप की ‘स्ट्रैटेजिक एम्बिगुइटी’ यानी रणनीतिक रहस्य के कंफ्यूजन ने सबको उलझा रखा है. कोई नहीं जानता कि वह क्या चाहते हैं. यही कन्फ्यूजन उनकी अपनी ही पार्टी रिपब्लिकन के लिए सिरदर्द बन गया है. ट्रंप की ईरान के प्रति रुख के बीच कई सवाल उठ रहे हैं.

  • क्या वह सिर्फ ईरान के परमाणु प्रोग्राम को तबाह करना चाहते हैं?
  • क्या वह तख्तापलट की कोशिश करेंगे?
  • या फिर वह सिर्फ इजराइल को खुश करने के लिए सर्जिकल स्ट्राइक की योजना बना रहे हैं?

चुनाव में भारी पड़ सकता है ‘जंग का शौक’

2026 के मिड-टर्म चुनाव सिर पर हैं और इतिहास गवाह है कि अमेरिकी जनता अब ‘कभी न खत्म होने वाली जंगों’ से ऊब चुकी है. अमेरिकी वोटर के लिए महंगाई और रोजी-रोटी सबसे बड़ा मुद्दा है. अगर युद्ध हुआ, तो तेल की कीमतें आसमान छुएंगी और महंगाई ट्रंप की लुटिया डुबो सकती है.
ट्रंप ने हमेशा ‘अमेरिका फर्स्ट’ और फालतू की जंगों से दूर रहने का वादा किया था. अगर वह ईरान के साथ लंबी लड़ाई में फंसते हैं, तो उनके अपने समर्थक और ‘इंडिपेंडेंट’ वोटर्स उनसे किनारा कर सकते हैं.

सलाहकारों की वॉर्निंग

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप के करीबी रणनीतिकार भी उन्हें युद्ध से बचने की सलाह दे रहे हैं. उनका कहना है कि ‘वोटर को ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम से ज्यादा अपनी जेब की चिंता है’. अगर ट्रंप ने घरेलू मुद्दों के बजाय विदेशी जंग को प्राथमिकता दी, तो हाउस और सीनेट की सीटों पर रिपब्लिकन पार्टी को भारी नुकसान हो सकता है.

ट्रंप को लगता है कि एक कड़ा फैसला उन्हें ‘मजबूत कमांडर-इन-चीफ’ के रूप में दिखाएगा, लेकिन जानकारों का तर्क है कि वियतनाम और इराक के कड़वे अनुभवों के बाद अमेरिकी जनता अब युद्ध को किसी भी राष्ट्रपति की कामयाबी का पैमाना नहीं मानती. बिना किसी ठोस घरेलू फायदे के, ईरान पर हमला करना ट्रंप के लिए एक ऐसा जुआ है जिसमें हारने का रिस्क बहुत ज्यादा है.



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