चीन से डर गया अमेरिका? नासा ने रोका अपना ड्रीम प्रोजेक्ट, अब चांद पर बनाएगा 20 अरब डॉलर का आलीशान बेस!


नई दिल्ली: दुनिया की सबसे बड़ी स्पेस एजेंसी नासा ने अपने अब तक के सबसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट ‘लूनर गेटवे’ पर फिलहाल ब्रेक लगा दिया है. वाशिंगटन में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान नासा के नए प्रमुख जेरेड इसाकमैन ने यह चौंकाने वाली घोषणा की. उन्होंने साफ किया कि नासा अब अपना पूरा ध्यान और संसाधन चंद्रमा की कक्षा में स्टेशन बनाने के बजाय उसकी सतह पर एक स्थायी बेस तैयार करने में लगाएगा. इस बड़े बदलाव के तहत अगले सात सालों में लगभग 20 अरब डॉलर (करीब 1.6 लाख करोड़ रुपये) खर्च किए जाएंगे. इसाकमैन के मुताबिक, एजेंसी अब उन इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस करेगी जो चांद की सतह पर लंबे समय तक रुकने और वहां से काम करने में मदद कर सकें. हालांकि, गेटवे के लिए अब तक तैयार किए गए उपकरणों को बेकार नहीं फेंका जाएगा, बल्कि उन्हें मून बेस के निर्माण में इस्तेमाल किया जाएगा.

चीन से बढ़ती चुनौती और आर्टेमिस प्रोग्राम में बदलाव क्यों जरूरी था?

नासा का यह फैसला केवल तकनीकी नहीं, बल्कि रणनीतिक भी माना जा रहा है. चीन ने 2030 तक चांद पर अपने अंतरिक्ष यात्री भेजने का लक्ष्य रखा है. ऐसे में अमेरिका अपनी बढ़त बनाए रखना चाहता है. इसाकमैन ने संकेत दिया कि गेटवे प्रोजेक्ट काफी महंगा था और इससे चांद की सतह पर उतरने के मिशन में देरी हो रही थी.

आर्टेमिस प्रोग्राम, जिसका उद्देश्य इंसानों को फिर से चांद पर ले जाना और वहां से मंगल ग्रह की राह आसान करना है, पिछले कुछ समय से देरी का सामना कर रहा है. गेटवे को रोकने से नासा को वह पैसा और समय मिलेगा जो सीधे मून लैंडिंग और बेस बनाने के लिए जरूरी है. अब नासा का लक्ष्य है कि 2028 तक हर हाल में अमेरिकी तिरंगा चांद की सतह पर लहराए.

क्या अंतरराष्ट्रीय पार्टनर्स और निजी कंपनियां इस फैसले से खुश हैं?

इस अचानक आए बदलाव ने नासा के अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों, जैसे यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ESA), को सोच में डाल दिया है. ESA इस प्रोजेक्ट में एक बड़ा हिस्सेदार था और अब वह इस घोषणा के बाद अपने भविष्य के कदमों की समीक्षा कर रहा है. हालांकि, नासा ने भरोसा दिलाया है कि वह अपने सहयोगियों को साथ लेकर ही ‘मानवता का पहला स्थायी आउटपोस्ट’ बनाएगा.

दूसरी ओर, एलन मस्क की स्पेसएक्स और जेफ बेजोस की ब्लू ओरिजिन जैसी निजी कंपनियों की भूमिका अब और अहम हो गई है. ये कंपनियां चांद पर उतरने वाले ‘लूनर लैंडर’ विकसित कर रही हैं. नासा अब इन कंपनियों के साथ मिलकर साल में कम से कम एक बार चांद पर लैंडिंग की तैयारी कर रहा है ताकि अंतरिक्ष यात्रियों की ‘मसल मेमोरी’ और अनुभव को बढ़ाया जा सके.

आर्टेमिस 2 मिशन की नई टाइमलाइन और आगे का रास्ता क्या है?

फिलहाल सबकी नजरें आर्टेमिस 2 मिशन पर टिकी हैं, जो अप्रैल की शुरुआत में लॉन्च होने वाला है. यह 50 से भी ज्यादा सालों में पहली बार होगा जब इंसान चांद के करीब से उड़ान भरेगा. इसके बाद 2027 में एक टेस्ट मिशन होगा और फिर 2028 में आर्टेमिस 4 और 5 के जरिए इंसानों को चांद की सतह पर उतारा जाएगा.

इसाकमैन का मानना है कि चांद की सतह पर बेस बनाना विज्ञान और सुरक्षा दोनों के लिहाज से बेहतर है. यह भविष्य में मंगल मिशन के लिए एक ‘प्रूविंग ग्राउंड’ यानी टेस्टिंग लैब की तरह काम करेगा.



Source link

Latest articles

spot_imgspot_img

Related articles

spot_imgspot_img