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Amaravati will be the official capital of Andhra from June 12 | 12 जून से अमरावती आंध्र की आधिकारिक राजधानी होगी: कैपिटल बनाने में खर्च हुए 25,000 करोड़; 2014 में हुई घोषणा, पर जगन ने काम रोका

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हैदराबाद4 मिनट पहले

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पीएम मोदी की उपस्थिति में 2015 में अमरावती को कैपिटल के रूप में स्थापित करने की आधारशिला रखी गई थी।  - दैनिक भास्कर

पीएम मोदी की उपस्थिति में 2015 में अमरावती को कैपिटल के रूप में स्थापित करने की आधारशिला रखी गई थी।

पिछले 2 जून से आंध्र प्रदेश बिना आधिकारिक पूर्ण राजधानी के ही काम कर रहा है, लेकिन 12 जून से राज्य को पहली आधिकारिक राजधानी मिल जाएगी। हैदराबाद से करीब 510 किलोमीटर दूर अमरावती ही आंध्र की नई राजधानी होगी।

तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) प्रमुख चंद्रबाबू नायडू चौथी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। इसकी राजधानी बनाने में अब तक करीब 25 हजार करोड़ खर्च हो चुके हैं।

2034 तक कुल एक लाख करोड़ खर्च हो चुके हैं। टीडीपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता ज्योत्सना के अनुसार इसी कार्यक्रम के साथ अमरावती राजधानी के रूप में काम करने पर जोर दिया गया।

ज्योत्सना के अनुसार अमरावती में शपथ के पीछे यही संदेश देना चाहते हैं कि अब से सरकार अमरावती से ही ली जाएगी। सबसे पहले सरकारी कर्मचारी, विधायक, विधायक के घर रहेंगे।

अमरावती को आधिकारिक राजधानी बनाने की घोषणा चंद्रबाबू एम.डी.यू. की सरकार के दौरान 2014 में हुई थी, लेकिन 2019 में जगन के सीएम बनने के बाद यहां काम रोक दिया गया था।

२५, २०१४ से अब तक हैदराबाद गर्म और आंध्र की संयुक्त राजधानी थी, लेकिन २ जून को समय सीमा समाप्त होने के बाद हैदराबाद गर्म की राजधानी हो गई।

वैश्य केंद्र सरकार ने 2014 में ही अमरावती को आंध्र की पूर्ण राजधानी का दर्जा दे दिया था, लेकिन यहां सचिवालय, हाई कोर्ट, विधानसभा नहीं थी, इसलिए हैदराबाद से ही काम चल रहा था।

पीएम मोदी ने 22 अक्टूबर 2015 को अमरावती परियोजना की आधारशिला रखी थी।

पीएम मोदी ने 22 अक्टूबर 2015 को अमरावती परियोजना की आधारशिला रखी थी।

सिंगापुर जैसी ब्लू-ग्रीन सिटी को विकसित करने की योजना बनाई गई थी
जब 2014 में उपमुख्यमंत्री बने तो उन्होंने आंध्र प्रदेश राजधानी क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एपीसीआरडीए) का गठन किया। तब से अमरावती में 217 किमी क्षेत्र को सिंगापुर जैसी ब्लू ग्रीन सिटी के रूप में विकसित करने की तैयारी चल रही है। तय हुआ था कि इस पर 20 साल में 1.09 लाख करोड़ रु. खर्च होंगे।

इसमें विधानसभा, हाई कोर्ट, सचिवालय, विधायक, सदस्य, विधायक और सरकारी कर्मचारियों के आवास के साथ ही 144 सरकारी व गैर सरकारी चयनित वार्ड बन रहे हैं। शुरुआत में आंध्र की खराब आर्थिक स्थिति के बावजूद चंद्रबाबू नायडू ने 50 हजार करोड़ रु. की बात रखी।

प्रदेश की 3 अलग-अलग राजधानियां बनाना चाहते थे जगन
2019 तक सचिवालय, विधानसभा और हाईकोर्ट बन चुके हैं। जबकि शेष परियोजना 50% ही पूरे हुए हैं। 2019 में जगन मोहन के सत्ता में आने के बाद यहां एक भी ईंट नहीं रखी गई। बल्कि प्रज्ञा वेदिकाखंड पर बुलडोजर चला दिया गया। APCRDA परियोजना रोक दी गई। लेकिन, यह परियोजना पांच साल से रुकी हुई है।

राजधानी का श्रेय एम.डी.पी. को नहीं मिला, इसलिए जगन जिद में तीन राजधानी अमरावती, विशाखापत्तनम और कुरनूल बनाना चाहते थे, लेकिन पांच साल में तीनों में से किसी भी एक शहर का विकास नहीं कर सके। अब चंद्रबाबू फिर वापसी कर रहे हैं।

जमीन देने वालों को 5 साल से नुकसान
इस परियोजना के लिए शुरुआत में 29 गांवों की 54 हजार एकड़ जमीन से 39 हजार एकड़ जमीन ली गई है। यहां बनीं चीज़ें आज भी सुनी पड़ी हैं। जिन्होंने प्रोजेक्ट के लिए एक एकड़ से ज्यादा जमीन दी थी। उन्हें अधिग्रहित राशि से अलग हर साल 30 से 50 हजार रु. की सहायता दी जा रही है। जिनकी जमीन एक एकड़ से कम है और खेती करने वाली है, उन्हें हर महीने 2500 रुपए पेंशन दे रहे हैं।

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