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allahabad,Decision will come today in Azam Khan’s family case | आजम खान, पत्नी और बेटे को जमानत: आजम की सजा पर भी रोक, लेकिन जेल से बाहर नहीं आ पाएंगे; बेटे के फर्जी सर्टिफिकेट पर हाईकोर्ट का फैसला – Prayagraj (Allahabad) News

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यह तस्वीर 18 अक्टूबर, 2023 की रामपुर कोर्ट के बाहर की है। इसी दिन कोर्ट ने तीनों को सजा सुनाई थी।

सपा नेता आजम खान, उनकी पत्नी तंजीन फातिमा और बेटे अब्दुल्ला आजम को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई। शुक्रवार को बेटे के फर्जी सबूत पत्र के मामले में हाईकोर्ट ने यह फैसला सुनाया है। तीनों इस वक्त अलग-अलग जेल में बंद है।

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बेटे अब्दुल्ला के दो जन्म प्रमाण पत्र मामले में 7 महीने पहले 18 अक्टूबर 2023 को रामपुर की स्पेशल एमपी/एमएलए कोर्ट ने आजम, तंजीन फातिमा और अब्दुल्ला को 7-7 साल की सजा सुनाई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने आजम की 7 साल की सजा को भी रोक दिया, जबकि तंजीन फातिमा और अब्दुल्ला की सजा पर कोर्ट ने रोक नहीं लगाई। 14 मई को सुप्रीम कोर्ट में पूरी सुनवाई होने के बाद जस्टिस संजय सिंह की सिंघल बेंच ने फैसला सुरक्षित रखने का लिया था।

उच्च न्यायालय के वकील शरद शर्मा ने बताया कि आजम अभी भी जेल में रहेंगे, क्योंकि हेटस्पीच मामले में भी उन्हें 7 साल की सजा हुई है। बेटा अब्दुल्ला भी एक अन्य मामले में सामने आया है। ऐसे में सिर्फ तंजीन ही जेल से बाहर निकलती है।

यह फोटो भी 18 अक्टूबर 2023 की है।  सजा होने के बाद आजम खान ने कहा था- इंसाफ और जजमेंट में फंसा होता है।

यह फोटो भी 18 अक्टूबर 2023 की है। सजा होने के बाद आजम खान ने कहा था- इंसाफ और जजमेंट में फंसा होता है।

हाईकोर्ट में आजम परिवार ने रिहाई की थी रिव्यू याचिका
आजम खान, तंजीन और अब्दुल्ला ने एमपी/एमएलए कोर्ट की सजा के खिलाफ रामपुर सत्र कोर्ट में याचिका दायर की थी। सत्र न्यायालय में याचिका खारिज होने के बाद इलाहाबाद उच्च न्यायालय में आपराधिक रवीजन याचिका दाखिल की गई। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार को अपना पक्ष रखने के लिए कहा था। बहस पूरी होने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।

आजम खान अभी सीतापुर जेल में बंद हैं, जबकि तंजीन रामपुर और अब्दुल्ला हरदोई जेल में बंद हैं। राज्य सरकार ने सजा के ऐलान के बाद ही आजम और बेटे को रामपुर से अलग जेल में शिफ्ट कर दिया था। पूरे परिवार को सजा सुनाने जाने के बाद आजम ने कहा था- इंसाफ और फैसले में फैसला होता है।

चुनाव ऐलान के बाद 26 मार्च को अखिलेश यादव आजम से मिलने सीतापुर जेल पहुंचे थे।  वह आजम से लम्बे समय तक मिले थे।

चुनाव ऐलान के बाद 26 मार्च को अखिलेश यादव आजम से मिलने सीतापुर जेल पहुंचे थे। वह आजम से लम्बे समय तक मिले थे।

चुनाव लड़ने के लिए बेटे का बनवाया था फर्जी बर्थ सर्टिफिकेट
आजम के बड़े बेटे अब्दुल्ला ने दो जन्म प्रमाण पत्र बनवाए थे। एक की उम्र 1993 थी, जबकि दूसरे की उम्र 1990 थी। रामपुर से भाजपा विधायक आकाश सक्सेना ने 2019 में रामपुर के गंज थाने में दो जन्म प्रमाण पत्र होने का मामला दर्ज किया था।

पुलिस ने आईपीसी की धारा 193, 420, 467, 468, 471 के तहत एफआईआर दर्ज की थी। इसमें आजम और तंजीन को भी शामिल किया गया था। जांच में पता चला कि बेटे अब्दुल्ला को आजम विधायक का चुनाव लड़ना चाहते थे। इसलिए, उसकी उम्र 3 साल बढ़ाकर फर्जी सर्टिफिकेट बनाया गया।

अब उस केस के बारे में, जिसमें आजम परिवार को हुई थी सजा

सियासत के शिखर पर चल रहे आजम के परिवार पर राजनीतिक हमला वर्ष 2017 से शुरू हुआ। जब पहली बार उनके बेटे के खिलाफ स्वराज विधानसभा सीट से चुनाव जीतने के बाद उम्र के गलत दस्तावेजों का आरोप लगा था। 2017 के चुनाव में आजम के बेटे अब्दुल्ला आजम स्वार सीट से सपा के विधायक चुने गए थे।

अब्दुल्ला के सामने बीएसपी से चुनाव लड़े नवाब काजिम अली खान ने नामांकन के समय अब्दुल्ला की उम्र 25 साल से कम होने का आरोप लगाया। इसमें आया कि अब्दुल्ला आजम ने फर्जी आयु प्रमाण पत्र पर चुनाव लड़ाई लड़ी थी और वह नामांकन के समय 25 साल के नहीं थे। इसके बाद अब्दुल्ला का निर्वाचन रद्द कर दिया गया। उनकी सदस्यता भी चली गई।

इस मामले में दर्ज शिकायत में अब्दुल्ला आजम के साथ उनके पिता आजम और मां तंजीन फातिम को भी जेल जाना पड़ा। हालांकि, 2022 में हुए विधानसभा चुनाव में स्वार सीट से वह दोबारा जीते थे। इस बार सरकारी कार्य में बाधा डालने के एक नमूने में उन्हें फिर सजा हुई और उनकी सदस्यता रद्द हो गई थी।

अब पढ़िए आजम खान के राजनीतिक पतन की कहानी…
उत्तर प्रदेश में आजम खान के करीबी रसूख का मानना ​​है कि वह रामपुर सीट से ही 10 बार विधायक और एक बार सांसद रहे हैं। उनकी पत्नी तंजीन फातिमा भी विधायक बनीं और बेटा अब्दुल्ला आजम दो बार विधायक बने।

सपा सरकार में आजम का जलवा किसी सीएम से कम नहीं था। स्टेट प्लेन को रामपुर तक सिर्फ ड्रॉप करने के लिए भेजा गया था। ऐसा माना जाता है कि प्रदेश की पूर्ववर्ती सरकार रामपुर से ही चलती है। आजम के इस जलवे पर साल 2017 से ग्रहण लगना शुरू हो गया।

“इन कलक्टर-फलक्टर से मत डरियो, ये तनखैये हैं”
2019 में कांग्रेस में आजम खान सपा के स्टार प्रचारक के रूप में रामपुर में चुनाव प्रचार कर रहे थे। इसी बीच चुनावी रैली में सुर्खियां बटोरने और अपनी ताकत दिखाने के लिए आजम ने ब्यूरोक्रेसी के खिलाफ एक बड़ा डायलॉग मारा। उन्होंने कहा, “इन कलक्टर-फलक्टर से मत डरियो, ये तनावग्रस्त हैं। अल्लाह ने चाहा तो चुनाव बाद में जूते साफ कराऊंगा।”

यही डायलॉग आजम के लिए नासूर बन गया। इस बयानबाजी के बाद से ही आजम और उनके परिवार के खिलाफ मुकदमों का दौर शुरू हो गया। पहले आजम को जेल जाना पड़ा। फिर उनकी पत्नी डॉ. तंजीन फातिमा को भी जेल हुई।

जौहर यूनिवर्सिटी की जमीन से शुरू हुआ था दांव का दौर
जब आजम ने रामपुर के जूते से साफ करने वाला डायलॉग मारा था, वे उस समय वहां के भगवान अंजनेय कुमार थे। इसी दौरान कुछ पत्रकारों ने जौहर यूनिवर्सिटी में गलत तरीके से जमीन लेने की शिकायत आजम खान के खिलाफ की। डेम ने उस पर जांच के आदेश दिए और धीरे-धीरे आजम पर करीब 105 दर्ज हो गए।



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