2.7 C
New York

AI Summit: डीपफेक और चाइल्ड सेफ्टी पर बोले पीएम मोदी, कहा- और ज्यादा विजिलेंट होने की जरूरत

Published:


पीएम मोदी- इंडिया टीवी हिंदी
छवि स्रोत: पीटीआई
मोदी

एआई इम्पैक्ट समिट में पीएम मोदी ने डीपफेक से लेकर गैजेट को लेकर सवाल उठाए हैं। नई दिल्ली के भारत पैवेलियन में चल रहे दुनिया के सबसे बड़े स्टूडियो इवेंट में मोदी ने दुनिया के टॉप लीडर्स और ग्लोबल टेक स्टार्स को लेकर आ रहे हैं साथ आने के लिए कहा है। उन्होंने डीपफेक, फेब्रिक डिटेक्टेड स्केट और चैल्ट शयाईट को लेकर विजिलेंट होने की तैयारी दी है। पिछले दिनों केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी मॉडल मॉडल्स की ट्रेनिंग और डीपफेक सामान पर सवाल उठाए थे।

डीपफेक की वजह से सोसायटी हो रही प्रभावित

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एआई इम्पैक्ट समिट को दिखाते हुए कहा कि डीपफेक और फेब्रिक आधारित दृश्यों की वजह से समाज प्रभावित हो रहे हैं। इस तरह की तैयारी के लिए वॉटरमार्किंग और स्पष्ट मानक मानक सेट करना आवश्यक है। इसके अलावा वो ऑफलाइन ऑफलाइन असिस्टेंट को लेकर भी और भी ज्यादा विजेंट होने की बात है। नई दिल्ली में आयोजित इस होटल इम्पैक्ट समित में दुनिया भर के गीतकारों के साथ-साथ टेक जगत की बड़ी हस्तियां भाग ले रहे हैं। इनमें से गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई, ओपन पैलेस के सैम ऑल्टमैन सहित धर्मशाला इंस्टीट्यूट के दिग्गज भारत आ चुके हैं।

पीएम मोदी ने अपनी रिसर्च के दौरान कहा कि कुछ लोगों को नई तकनीक पर संदेह है लेकिन युवा पीढ़ी इसे हाथ-हाथ अपना रही है, जो कि निराशाजनक है। इस मानव इतिहास में एक परिवर्तनकारी अध्याय है। भारत इस ऐतिहासिक क्रांति का केवल हिस्सा नहीं है, बल्कि इसका नेतृत्व भी कर रहा है और आकार भी तय कर रहा है। होटल समिति में केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी डिपाफेक को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा कि डिपाफेक की वजह से लोगों का विश्वास खत्म हो रहा है।

20 फरवरी से लागू हो रहे डीपफेक के नए नियम

डीपफेक और फेब्रिक स्क्रैच को लेकर सरकार ने पिछले दिनों नए नियम जारी किए हैं। ये नियम 20 फरवरी यानी कल से लागू हो जाएंगे। इंटरनेट पर एसजीआई रिसर्च को लेकर नई दिशा-निर्देशन जारी किए गए हैं। इन किताबों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और इंटरनेट पर शेयर करने के लिए टाइम लेबलिंग अनिवार्य कर दी गई है, ताकि लोगों के लिए तैयार की गई किताबों और वास्तविक किताबों की पहचान करना आसान हो जाए।

नए नियमों में कंप्यूटरीकृत वीडियो और एसजीआई को नए दस्तावेजों से पारिभाषित किया गया है। इसमें कहा गया है कि जोऑड-विज़ुअल स्केप्स, मैटल्स, टूल्स या कंप्यूटर का मिश्रण बनाया गया है और देखने में यह वास्तविक बातें और कहानियाँ चित्रित की गई हैं, उन्हें एसजीआई माना जाएगा। इस तरह की सामग्री को साझा करने के लिए समय वॉटरमार्किंग या लेबलिंग आवश्यक है। इसके अलावा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी भी शामिल है। इन कटेंट को सोशल प्लेटफॉर्म पर शेयर करने से पहले मस्क का डिक्लेयरेशन अनिवार्य कर दिया गया है। प्लेटफ़ॉर्म को ऐसे सामान को वेरिफाई करने के लिए टेक्निकल टूल का उपयोग करने के लिए कहा गया है।

सोशल मीडिया या ऑफलाइन प्लेटफॉर्म पर प्रचारित डीपफेक और अफवाहों की समय सीमा को भी लोकप्रिय बना दिया गया है। ऐसे में 36 घंटे की बजाय अब 3 घंटे में एक्शन लेने की बात कही गई है। रिस्पॉन्स टाइमलाइन को भी 15 दिन से 7 दिन और 24 घंटे से लेकर 12 घंटे तक किया गया है। पीएम मोदी ने एआई समित में टेक कंपनी और ग्लोबल लीडर्स से बिल्ट-इन फिक्स्ड स्टडीज को और सैट से रेग्युलेट करने के लिए कहा है।

यह भी पढ़ें – पीएम मोदी ने दिया ‘मानव’ दर्शन, 5 हिस्सों वाले इस लक्ष्य की विस्तृत जानकारी



Source link

Related articles

spot_img

Recent articles

spot_img