-3.6 C
New York

इंसानों को नौकरी पर रख रहा एआई:‘रेंट-ए-ह्यूमन’ पर 5 लाख से ज्यादा लोग जुड़े; एक्सपर्ट की चिंता- जोखिम वाले काम करवा लिए तो जवाबदेही किसकी

Published:




वर्षों से लोगों के मन में यह डर था कि भट्ठी और रोबोट में उनकी हिस्सेदारी है। हाल ही में ये सोच बदल गई। अब होटल इंसानों को काम पर रख रहे हैं। एक नया ऑनलाइन मार्केटप्लेस रेंट-ए-हुमन पर 5 लाख से भी ज्यादा लोग सेरेमनी देने के लिए जुड़ते हैं। यहां मालिक होटल प्रोग्राम हैं। ये सूटकेस पैसे कमाने के लिए इंसानों को दिए जाते हैं जो वे खुद नहीं कर सकते, जैसे- बाजार से सामान लाना, फोटो खींचना या किसी कार्यक्रम में शामिल होना। यह इनोवेशन 26 साल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर एलेक्जेंडर लाइटेप्लो के दिमाग की उपज है। लिप्टेलो ने देखा कि दुनिया में करोड़ों ‘मैट एजेंट’ (जैसे वीडियो) मौजूद हैं, जहां दिमाग तो है, लेकिन हैंड-पैर नहीं थे। वे कोडिंग कर सकते हैं, शेयर बाजार बनाए रख सकते हैं, भौतिक दुनिया में विक्रेता काम नहीं कर सकते। इसी कमी को मंजूरी के लिए रेंट-ए-हुमन का जन्म हुआ। इसकी टैगलाइन भी आकर्षक है… ‘मैट कांट टच ग्रास, यू कैन’। ऐसा बाजार जहां बोतल-बोट इंसानों को किराए पर दिया जाता है। लिप्टेलो ने खुद कोडिंग के लिए प्लेटफॉर्म तैयार नहीं किया। वे प्लास्टिक मशीनरी को काम पर ले गए और पोलो एसोसिएशन अर्जेंटीना निकल गए। जब वे घुड़सवारी कर रहे थे, तो उनका डिजिटल एजेंट मंच बनाया जा रहा था। सूची को लेकर उत्साहवर्धन देखने से पता चलता है कि लिप्टेलो का मूल रूप सही है। प्लेटफॉर्म पर मिलने वाले काम भी बेहद दिलचस्प हैं। बिज़नेस में एक होटल की कीमत 2700 रु. प्रति घंटे पर इंसानों को कबूतर गिनने के लिए रखा गया। वहीं, खेल रणनीति सीख रहे होटल ने 9 हजार रु. प्रति घंटा बेंगलुरु में किराए पर लिया गया। टोरंटो के मिंजे कांग ने दुनिया का पहला व्यक्ति-बाड़े सहित काम किया। उन्हें एक बोर्डोटोकॉकलिस्ट होना था। जिस पर लिखा था- ‘मशीन ने मुझे बिलबोर्ड कैप्चर के विवरण दिए हैं।’ सिस्टम प्लेटफ़ॉर्म पर इंसानी मैनेजर कैसे काम करता है। बोतल बॉट विज्ञापन विज्ञापन है, साक्षात्कार और काम की विविधता है। इंसान का काम पूरा करने के बाद फोटो या वीडियो से सबूत मिलता है। पुष्टि इसी से होती है कि आलौकिक या ऑफलाइन वैधानिक पदनाम से क्या होता है। मनी सेफ एस्क्रो फंड में रखा गया है सोसा रोबोट मनी न मार सके। भुगतान और रजिस्ट्री जैसे दस्तावेजों पर विवाद को लेकर स्पष्टता नहीं है, शोधकर्ता एडम डॉर कहते हैं- इंसानों से काम के जरिए धोखाधड़ी में नियम और कानून बहुत पीछे हैं। अगर वह किसी फिल्म का इरादा गलत हो तो बड़े खतरनाक काम को छोटे-छोटे हिस्सों में बाटकर इंसानों से करवा सकती है। यानी लोग बिना समझे किसी ऐसे प्रोजेक्ट का हिस्सा बन सकते हैं जो नुकसान पहुंचाए। डॉक्टर का मानना ​​है कि हमें जल्द ही सख्त नियम और सुरक्षा उपाय बनाने होंगे, ताकि जिम्मेदारी से हो प्रयोग। गुड टेक एडवाइजरी के सीईओ केफर्थ बटरफील्ड का कहना है कि कई देशों में इंसानों की सुरक्षा के लिए कानून नहीं हैं, इसलिए कौन तय करेगा और हादसे की जिम्मेदारी कौन लेगा, यह तय करना जरूरी है।



Source link

Related articles

spot_img

Recent articles

spot_img