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AI Generated Content New Rules: AI कंटेंट के नए नियम आज से लागू, इंटरनेट पर कुछ भी पोस्ट करने से पहले रखें इन बातों का ध्यान

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एआई जनित सामग्री के नए नियम- इंडिया टीवी हिंदी
छवि स्रोत: अनस्प्लैश
होटल एसोसिएशन के नए नियम लागू

AI जनरेट की गई सामग्री के नए नियम: केंद्र सरकार ने पिछले दिनों फ्लैट फ्लैटेड सैट को लेकर अंतिम चरण में संशोधन किया था। ये नियम आज यानि 20 फरवरी से लागू हो गए हैं। अब सोशल मीडिया या इंटरनेट पर सैटरेड सैक्स शेयर करना भारी पड़ सकता है। आईटी मंत्रालय ने इस नए नियम को 10 फरवरी 2026 को अधिसूचित किया था। आईटी (डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) नियम 2021 का यह नया नियम आधिकारिक तौर पर लागू किया गया है। सरकार ने इस नियम को जॉचली या एआई द्वारा जेनेरेटड अध्ययन में समझाया है। साथ ही, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी भी तय है। इस तरह की बातें शेयर करने वाले ग्राहकों पर भी एक्शन की बात इस नए नियम में स्पष्ट किए गए हैं।

नई के दिल्ली भारत पैवेलियन में चल रहे एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान मोदी ने भी स्टेमैल पर फ्रैंक बात अपनी रखी है। पीएम मोदी ने अपनी किताब में कहा कि डीपफेक और फेब्रिक की वजह से समाज प्रभावित हो रहा है। इस तरह की तैयारी के लिए वॉटरमार्किंग और स्पष्ट मानक मानक सेट करना आवश्यक है। इसके अलावा वे ऑफलाइन बिजनेस बिजनेस को लेकर भी और भी ज्यादा विजेंट होने की बात कर रहे हैं।

इजेक्टली एस्केडेड (एसजीआई) सैट क्या है?

नए नियमों के अनुसार, ऐसे भी कंप्यूटरीकृत अध्ययन एसजीआई माने जाएंगे, जिसमें लैपटॉप या कंप्यूटर द्वारा मॉडिफिकेशन द्वारा कोई शामिल नहीं किया जाएगा। यदि, वो रचना किसी वास्तविक व्यक्ति, घटना या स्थान की विशेषता जैसी हो रही है। ऐसी किताबों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म या इंटरनेट पर शेयर करने से पहले वॉटरमार्किंग या लेबलिंग जरूरी है, ताकि लोग पहचान सकें कि ये एआई समर्थित है। हालाँकि, एसजीआई द्वारा फोटो और वीडियो को एडिट करने पर विचार नहीं किया जाएगा। इसके लिए लेबलिंग या वॉटरमार्किंग की आवश्यकता नहीं है।

हुए तीन बड़े बदलाव

  1. डीपफेक वीडियो और इमेज को लेकर सरकार ने पिक्चर दिखाते हुए तीन बड़े बदलाव करने का फैसला किया है। इनमें से किसी भी होटल की शीट को शेयर करने से पहले लेबलिंग करना अनिवार्य कर दिया गया है। यदि, किसी भी छवि या वीडियो पर एक बार स्थापत्य वाला लेबल लगा हुआ है, तो उसे हटाया नहीं जाएगा।
  2. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को वैरिफाई करने के लिए आवश्यक टूल्स डेवलप करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि बिना वे सभी ग्रुप्स के ऐसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अपलोड न किए जा सकें।
  3. इसके अलावा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को यह भी निर्देश दिया गया है कि वो अपने ग्राहकों को हर तीन महीने में ये चेतावनी जारी करें कि थिएटर के मिसयूज पर जुर्माना या सजा हो सकती है। इसे एक सोशल मीडिया अवेयरनेस के तौर पर देखा जाना चाहिए।

इन तीन बड़े बदलावों के अलावा सरकार ने नो गो जोन में कुछ क्लास रखी हैं, जिनमें बच्चों से जुड़े सामान, फर्जी दस्तावेज या भेजे गए इलेक्ट्रॉनिक्स रिकॉर्ड, हथियार, गोला-बारूद से संबंधित जानकारी, डीपफेक फोटो और वीडियो शामिल हैं।

सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म की ज़िम्मेदारी तय

MeitY ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी सूची जारी करते हुए कहा कि किसी भी रचना को सोशल मीडिया से हटाने के निर्देश जारी होने पर 3 घंटे में उसे हटा दिया जाएगा। पहले यह सीमा 36 घंटे की थी। इसके अलावा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को एक कोडिंग युग में लाने के लिए कहा गया है ताकि यह पता चल सके कि किस प्लेटफॉर्म ने स्टूडियो स्टेज को तैयार किया है। बच्चों से जुड़े हिंसक और अश्लील वीडियो पर तुरंत एक्शन लेने के लिए कहा गया है। इसके अलावा रिस्पॉन्स की टाइमलाइन को भी 12 घंटे दिया गया है।

कानूनी कार्रवाई का प्रोविजन

सरकार ने एसजीआई या फ्लैटएड सैट के उल्लंघन पर कानूनी कार्रवाई का भी प्रस्ताव रखा है। एसजीआई के नए उल्लंघन के तहत भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिकता सुरक्षा संहिता और पॉक्सो अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी। हालाँकि, सरकार ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि एसजीआई की पहुंच से उपयोग किए जाने वाले स्वचालित उपकरण और तकनीक को आईटी अधिनियम की धारा 79 के उल्लंघन पर विचार नहीं किया गया है। ऐसी कार्रवाई को अनिर्धारित के तहत माना जाएगा।

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