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Agniveer Scheme Controversy; P Chidambaram Vs Election Commission | Rahul Gandhi Congress | चिदंबरम बोले-सरकारी नीति की आलोचना विपक्ष का अधिकार: चुनाव आयोग ने कहा था- कांग्रेस संविधान पर गलत बयानबाजी और सेना का राजनीतिकरण न करें

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नई दिल्ली2 मिनट पहले

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चुनाव आयोग ने 22 मई को कांग्रेस अध्यक्ष को नोटिस भेजा है। इसमें निर्देश दिया गया है कि उनकी पार्टी अग्निवीर योजना जैसे मामलों पर सेना का प्रचार-प्रसार नहीं करे। इस निर्देश के एक दिन बाद वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि चुनाव आयोग का यह निर्देश गलत है।

सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में उन्होंने लिखा- एक नागरिक के तौर पर यह कहना मेरा अधिकार है कि चुनाव आयोग का कांग्रेस को अग्निवीर योजना का प्रचार न करने का निर्देश गलत है। प्रचार का क्या मतलब है? ईसीआई का क्या मतलब है?

EC ने बीजेपी अध्यक्ष जापान सरकार को भी भेजा नोटिस. आयोग ने दोनों गुटों के अध्यक्षों और स्टार प्रचारकों से अपने भाषण को सही करने, सावधानी बरतने और निषेध बनाए रखने के लिए कहा है।

चिदंबरम ने अपनी पोस्ट में और क्या लिखा…

  • अग्निवीर एक योजना है। सरकार की नीति का उत्पाद है। किसी विपक्षी राजनीतिक दल का यह अधिकार है कि वह सरकार की किसी नीति की आलोचना करे और घोषणा करे कि यदि वह सत्ता में आती है तो योजना को खत्म कर दिया जाएगा।
  • अग्निवीर सैनिकों की दो श्रेणी की रचनाएँ हैं जो एक साथ संचालित होती हैं, और यह गलत है। फायरवीयर एक युवा को चार साल तक नौकरी पर रखता है और बिना नौकरी और बिना पेंशन के निकाल देता है, और यह गलत है।
  • अग्निवीर का सेना ने विरोध किया था, फिर भी सरकार ने इस योजना को सेना पर थोप दिया। यह भी गलत है, इसलिए अग्निवीर योजना को खत्म किया जाना चाहिए। कांग्रेस पार्टी को निर्देश देने में चुनाव आयोग गलत था।

राष्ट्रपति कांग्रेस को ये निर्देश भी दिए
कट्टर, यूक्रेनी चुनाव में प्रचार के दौरान राहुल गांधी समेत कांग्रेस के नेता अपने भाषणों में असहमत और अग्निवीर स्कॉच का बार-बार ज़िक्र कर रहे हैं। इसलिए चुनाव आयोग ने कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे को नोटिस भेजा है। जिसमें यह भी कहा गया है कि वह संविधान को लेकर गलत बयानबाजी न करें, जैसे कि भारत के संविधान को खत्म किया जा सकता है या हटाया जा सकता है।

पढ़िए कांग्रेसी नेताओं ने अग्निवीर स्कीम पर कब-क्या कहा…

25 अप्रैल को भी चुनाव आयोग ने भाजपा-कांग्रेस को नोटिस दिया था
25 अप्रैल को चुनाव आयोग के पोल पैनल के खिलाफ कांग्रेस और बीजेपी के एक-दूसरे की तरफ से गठबंधन के आधार पर दोनों के अध्यक्षों को नोटिस जारी किया गया था। यह लोक प्रतिनिधित्व कानून 1951 की धारा 77 के तहत लोक प्रतिनिधित्व कानून के उल्लंघन की धारा 77 के तहत जारी किया गया था।

ऐसा पहली बार हुआ, जब आयोग ने स्टार प्रचारक की जगह पार्टी अध्यक्षों को नोटिस जारी किया। पीएम नरेंद्र मोदी भाजपा और राहुल गांधी कांग्रेस के स्टार प्रचारक हैं। इस दावे से उद्घोषणाओं के लिए चुनाव आयोग ने पार्टी अध्यक्षों को जिम्मेदार माना।

चुनाव आयोग से पीएम मोदी और राहुल गांधी के भाषण में आचार संहिता के उल्लंघन की शिकायत की गई थी। इसमें कहा गया है कि ये लीडर्स धर्म, जाति, समुदाय और भाषा के आधार पर लोगों को भड़काने और नफरत फैलाने का काम कर रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें…

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