रायबरेली में मीडिया से बात करते प्रदेश सरकार के मंत्री दिनेश प्रताप सिंह।
रायबरेली में राहुल गांधी से मिली करारी हार के बाद भाजपा सांसद दिनेश प्रताप सिंह ने अपने राजनीतिक कार्यक्रमों से एक साल की छुट्टी ले ली है। उन्होंने कहा- अब जनता दर्शन कार्यक्रम को रोक कर अपने परिवार की जिम्मेदारियां पूरी करूंगी। उन्होंने कहा, मेरे
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एक साल तक अपनी तैयारी को राहुल गांधी को सौंपने की बात कहते हुए दिनेश सिंह ने कहा- जिन 3 लाख लोगों ने मुझे वोट दिया है, अब उनके लिए ही काम होगा। जिन लोगों ने राहुल गांधी को वोट दिया है, उनके लिए अब वह अपना उत्तरदायित्व पूरा करें।
अब हुबहू वह पढ़िए, जो योगी के मंत्री दिनेश प्रताप ने कहा

तीसरे कार्यकाल में मोदी देश को और ऊंचाई देने में कामयाब होंगे
दिनेश सिंह ने कहा- मैं सबसे पहले देश की जनता का आभार प्रकट करता हूं। पीएम मोदी को तीसरी बार जिता दिया गया है, इसके लिए जनता का धन्यवाद देता हूं। देश की जनता ने जो फैसला लिया है, वह हम सबके सिर-माथे पर है। मैं मानता हूं कि पीएम मोदी इस तीसरे कार्यकाल में और बेहतर सेवा, देश को ताकतवर बनाने और देश को और ऊंचाइयां देने में कामयाब होंगे।
इंडी गठबंधन की विचारधारा बढ़ने में कांग्रेस का कोई रोल नहीं है। मैं मानता हूं, इसमें सिर्फ और सिर्फ सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का बहुत बड़ा रोल है। राहुल गांधी का कोई रोल नहीं है, प्रियंका का कोई रोल नहीं है। सबसे बड़ा रोल सपाप का है।
राहुल गांधी जो कुछ भी हैं, समाजवादी पार्टी के दम पर हैं। मैं नहीं मानता कि मैं राहुल गांधी से चुनाव हारू हूं। अगर राहुल गांधी के अंदर दम है, तो रायबरेली में अकेले मुझसे चुनाव लड़ें और मरे। अगर मुझे हरा दें, तब मैं मानूंगा। यह दिनेश सिंह से हार कर गए हैं न कि जीत कर गए हैं।

हर के बाद ये पोस्ट रायबरेली से भाजपा सांसद दिनेश प्रताप सिंह ने किया था।
राहुल गांधी को किया चैलेंज, कहा- अगर हारा तो कभी मुंह नहीं दिखाऊंगा
मैं राहुल गांधी को चुनौती देता हूं। वह फिर से मेरे सामने पंजा लेकर आए और लड़े। अगर हार गया, तो कभी मुंह नहीं दिखाऊंगा। राहुल गांधी हमें अकेले दम पर चुनाव नहीं जीतवाएंगे। हमारी पार्टी से जनता की कोई नाराजगी नहीं है। अगर दुखी होती, तो मध्य प्रदेश कैसे जीतते। मेरी और अन्य भाजपा नेताओं की हार के लिए प्रतिक्रिया का नकारात्मक माहौल फैलाना जिम्मेदार है। जनता दल यूनाइटेड हुई, इसका असर रायबरेली और आसपास की जनता पर पड़ा।
अयोध्या में जनता आंदोलन हुआ है
500 साल बाद अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण हुआ। इसके बावजूद हम वहां हार गए। इसका विश्लेषण जरूरी है। जनता प्रभावित हुई है। आशा है, हम अपने नेतृत्व से आने वाले समय में इस भ्रम को दूर करेंगे। चुनाव में दुख ने खूब मेहनत की है। जिन महेंद्र ने मुझे वोट दिया,उन्हें मैं धन्यवाद देता हूं।

3 लाख 90 हजार वोट से जीते राहुल गांधी
गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली में कांग्रेस एक बार फिर अपनी जीत दर्ज करने में कामयाब रही। यहां राहुल गांधी ने 3 लाख 90 हजार 30 वोटों के लिए भाजपा के दिनेश प्रताप को शिकस्त दी। राहुल को 6 लाख 87 हजार 649 वोट मिले। दिनेश प्रताप को 2 लाख 97 हजार 619 वोट मिले।

रायबरेली में जीतने के बाद 4 जून की शाम को राहुल गांधी ने नई दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान संविधान की कॉपी दिखाई।
कांग्रेस का गढ़ माना जाता है रायबरेली
रायबरेली वो सीट है, जो 2014 की मोदी लहर में भी कांग्रेस हारी नहीं है। 2019 के चुनाव में भी यूपी की 80 सीटों में से कांग्रेस सिर्फ इसी सीट पर चुनाव जीती थी। रायबरेली के 72 साल के इतिहास में 66 साल से कांग्रेस के सांसद रहे हैं।
देश के पहले लोकसभा चुनाव में फिरोज गांधी रायबरेली से लड़े थे। रायबरेली सीट गांधी परिवार की पारंपरिक सीट रही है। इस सीट से फिरोज गांधी के कारण इंदिरा गांधी, अरुण जेटली और सोनिया गांधी संसद तक रहे हैं। अब सोनिया गांधी राजस्थान से राज्य बन चुकी हैं। इस बार राहुल गांधी चुनाव जीते हैं।

सोनिया गांधी ने 2024 चुनाव के दौरान रायबरेली में इकलौती रैली की। उन्होंने जनता से कहा था- आपको अपना बेटा चाहिए।
अब राहुल भी रायबरेली को अपनी कर्मभूमि सुधारेंगे
राहुल गांधी ने रायबरेली सीट से 3.90 लाख और केरल की वायनाड सीट से 3.64 लाख वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। अब 18 जून तक एक सीट छोड़नी होगी, जहां मतदान होगा। ऐसे में पूरी संभावना है कि वह वायनाड सीट छोड़ देंगे, रायबरेली से सांसद बने रहेंगे।
इसके पीछे कारण यह है कि दिल्ली की सत्ता का रास्ता यूपी से निकलता जा रहा है। यहां चीन की सबसे ज्यादा 80 मौतें हुई हैं। 2014 और 2019 में यूपी में जबरदस्त प्रदर्शन करके भाजपा ने बहुमत हासिल किया था। 2024 में यहां भाजपा की सीट घटी और वह बहुमत से काफी पीछे रह गयी।
2019 में राहुल गांधी के अमेठी से हारने के बाद यूपी कांग्रेस का खूंटा उखाड़ दिया गया था। रायबरेली की इकलौती सीट मिली थी। 2024 के चुनाव में कांग्रेस ने सपा के साथ गठबंधन किया और अमेठी-रायबरेली समेत 6 सीटों पर जीत दर्ज की। कांग्रेस को एक उम्मीद दिख रही है कि यूपी में एक बार फिर उसकी जड़ मजबूत हो सकती है। इसलिए अब राहुल रायबरेली को अपनी कर्मभूमि बनाना है।
