कुछ दिन पहले नायरा एनर्जी ने भी पेट्रोल और डीजल के दाम में इजाफा किया था। इसने पेट्रोल की कीमत 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 3 रुपये प्रति लीटर बढ़ाई थी। शेल इंडिया के कर्नाटक, महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु, तेलंगाना और असम में पेट्रोल पंप हैं।

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पश्चिम एशिया संकट के कारण देश में ईंधन के दाम नहीं बढ़ने के मोदी सरकार के तमाम दावे झूठ साबित हो रहे हैं। बुधवार को कमर्शियल एलपीजी के दाम बढ़ने के बाद अब एक निजी कंपनी ने पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ा दिए हैं। शेल इंडिया ने आज से ही पेट्रोल और डीजल के दाम में बढ़ोतरी का ऐलान किया है। कुछ दिन पहले ही नायरा कंपनी के ईंधन पंपों पर पेट्रोल और डीजल के दाम में इजाफा किया गया था।
पेट्रोल 7.41 रुपये, डीजल 25 रुपये महंगा
शेल इंडिया की ओर से पेट्रोल की कीमतों में 7.41 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। साथ ही डीजल की कीमत में 25 रुपये का इजाफा किया गया है। अब सामान्य पेट्रोल की कीमत 119.85 रुपया और पॉवर वेरिएंट की कीमत 129.85 रुपये हो गई है। डीजल की कीमतों में और ज्यादा बढ़ोतरी हुई है, जो 25.01 रुपये प्रति लीटर बढ़ा है। अब सामान्य डीजल 123.52 रुपये और प्रीमियम डीजल 133.52 रुपये लीटर मिलेगा। स्थानीय टैक्स के कारण अन्य शहरों के इन पंपों पर ईंधन की कीमतें थोड़ी अलग हो सकती हैं।
नुकसान की भरपाई के लिए दाम बढ़ाए
रिपोर्ट में कहा गया है कि कच्चे तेल के दाम 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर जाने के कारण निजी ईंधन विक्रेता ने नुकसान की भरपाई के लिए ईंधन की कीमतों में इजाफा किया है। प्राइवेट फ्यूल रिटेल कंपनी दबाव में हैं, क्योंकि सरकारी कंपनियों ने कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बावजूद कीमतें नहीं बढ़ाई हैं। इनका कहना है कि पब्लिक सेक्टर की कंपनियों की तुलना में प्राइवेट रिटेल तेल कंपनियों को मुआवजा नहीं मिलता है, जिससे उन्हें कीमतों में हुई बढ़ोतरी का बोझ कस्टमर्स पर डालना पड़ता है।
इससे पहले नायरा ने बढ़ाए थे दाम
कुछ दिन पहले नायरा एनर्जी ने भी पेट्रोल और डीजल के दाम में इजाफा किया था। नायरा एनर्जी ने अपने पंपों पर पेट्रोल की कीमत 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 3 रुपये प्रति लीटर बढ़ाई थी। इस कंपनी के देशभर में 6,967 पेट्रोल पंप हैं। वहीं शेल इंडिया के कर्नाटक (खासकर बेंगलुरु), महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु, तेलंगाना और असम में कुल 325 से ज्यादा पेट्रोल पंप हैं।
कच्चे तेल पर संकट से बढ़ी कीमतें
भारत अपने कच्चे तेल का करीब 88 फीसदी हिस्सा आयात करता है। लेकिन पश्चिम एशिया में संघर्ष के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते तेल लेकर आने वाले जहाजों को इजाजत नहीं मिलने के कारण आपूर्ति में रुकावट आई है जिससे ईंधन की कीमतें संवेदनशील बनी हुई हैं। 8 फरवरी को जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले किए थे, तब से ब्रेंट क्रूड की कीमतें 60 प्रतिशत तक बढ़ चुकी हैं। हालांकि, इससे पहले कच्चे तेल की कीमतें काफी नीचे थीं, लेकिन इसका लाभ उपभोक्ताओं को नहीं मिला था।





