मुंबई की मेयर रितु तावड़े ने इस मुद्दे पर स्पष्ट किया कि बीएमसी इन आवेदनों को सिर्फ सुरक्षित रख रही है। उन्होंने कहा, “जो भी मरीज इच्छामृत्यु के लिए पत्र देता है, हम उसे सुरक्षित रखते हैं, लेकिन उसे लागू करने का अधिकार हमारे पास नहीं है। यह जिम्मेदारी परिवार की होती है। कोर्ट ने हमें इन दस्तावेजों को रखने की अनुमति दी है, लेकिन उन्हें लागू करने का अधिकार नहीं दिया है।”
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के बाद, जिसमें भारत में निष्क्रिय इच्छामृत्यु को कानूनी मान्यता दी गई, बीएमसी ने हर वार्ड में मेडिकल अधिकारियों को ‘लिविंग विल’ पर नजर रखने की जिम्मेदारी दी है। जो भी व्यक्ति लिविंग विल जमा करना चाहता है, उसे नोटरी फॉर्मेट में दस्तावेज तैयार कर अपने वार्ड ऑफिस में जमा करना होता है।





