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Agra News: अक्सर लोग व्रत में कुट्टू का आटा खाते हैं, लेकिन यह कभी-कभी सेहत के लिए बेहद नुकसानदायक होता है. आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि किन-किन स्थितियों में और कब कुट्टू का आटा नहीं खाना चाहिए.
आगरा: उत्तर प्रदेश के आगरा में कई लोग कुट्टू का आटा खाने के शौकीन होते हैं. वैसे तो यह आटा अक्सर व्रत के दौरान खाया जाता है, लेकिन कई लोग शोक के तौर पर भी इसकी पकौड़ी खाते हैं. चिकित्सक बताते हैं कि वैसे कुट्टू का आटा बॉडी के लिए काफी फायदेमंद होता है, लेकिन इसका अधिक सेवन नुकसानदेय होता है. उन्होंने बताया कि कई बार इसमें मिलावट कर दी जाती है, जिससे इंसान की तबियत खराब हो सकती है.
उन्होंने बताया कि शुद्ध कुट्टू का आटा ही खाना चाहिए. रखा हुआ या बासी आटा पेट में गैस, दर्द और उल्टी का कारण बन सकता है और आपकी सेहत को खराब कर सकता है. बीपी और शुगर के मरीजों को अपने चिकित्सक के अनुसार ही इसका सेवन करना चाहिए, क्योंकि कुट्टू से डायबिटिज अचानक से कम या बढ़ भी सकती है.
पेट संबंधित रोगी कुट्टू के सेवन से बचें
आगरा के वरिष्ठ चिकित्सक आशीष मित्तल ने बताया कि कुट्टू का आटा बेहद फायदेमंद होता है. उन्होंने कहा कि पेट संबंधित मरीजों को चिकित्सक की सलाह के बिना इसका सेवन नहीं करना चाहिए. पेट रोगियों को चिकित्सक सीमित मात्रा मे इसके सेवन की सलाह दे सकते हैं. उन्होंने बताया कि कुट्टू का आटा जिसे अंग्रेजी में Buckwheat flour भी कहते है, वैसे तो शरीर के लिए स्वास्थ्यवर्धक है, लेकिन पुराना या खराब आटा पेट दर्द, दस्त, उल्टी, एलर्जी और घबराहट जैसी गंभीर फ़ूड पॉइजनिंग का कारण बन सकता है.
डॉ. मित्तल ने कहा कि कुट्टू की तासीर गर्म होने से ज्यादा सेवन से गैस की समस्या, ब्लोटिंग और एसिडिटी की समस्या भी हो सकती है. डॉ. आशीष बताते हैं कि यह लो ब्लड प्रेशर वाले लोगों के लिए भी नुकसानदेह हो सकता है.
सीमित मात्रा में करें सेवन
आगरा के वरिष्ठ चिकित्सक आशीष मित्तल ने बताया कि कुट्टू का आटा शरीर के लिए फायदेमंद तो है, लेकिन कई बीमारियों में इसका विपरीत असर पड़ सकता है. उन्होंने कहा कि ब्लड प्रेसर और डायबिटिज के मरीजों को अपने चिकित्सक की सलाह या बेहद सीमित मात्रा में ही इसका सेवन करना चाहिए.
डॉ. आशीष मित्तल ने कहा कि कुट्टू के आटे का सेवन एलर्जी, कमजोर पाचन (पेट दर्द, गैस) किडनी की समस्या, लो ब्लड प्रेशर, गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को सावधानी से या डॉक्टर की सलाह पर ही करना चाहिए. डॉ. मित्तल ने बताया कि कुट्टू का आटा उच्च फाइबर और फास्फोरस के कारण भारी हो सकता है और बासी होने पर फूड पॉइजनिंग का कारण भी बन सकता है, जिससे मरीज को काफी परेशानी हो सकती है.
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आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.
Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.





