1 घंटा पहलेलेखक: नवनीत गुर्जर, राष्ट्रीय संपादक, दैनिक भास्कर
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बिहार की राजनीति में कुछ पल रहा है। पक रहा है। तप रहा है। क्या निकलेगा, स्पष्ट तो नहीं है लेकिन जैसा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का राजनीतिक स्वभाव रहा है, कुछ बड़ा ही होने वाला है। फ़िहाल अयोध्या के बाद पटना सबसे व्यस्त शहर बन चुका है।
अंतर सिर्फ इतना है कि अयोध्या में धार्मिक समागम हुआ और पटना में राजनीतिक महाघमाघी चल रही है। लालू प्रसाद यादव नीतीश कुमार को मनाने में लगे हैं। राजनीतिक दूत और अफसर बड़ी घटनाओं के साथ इधर से उधर हो रहे हैं। पलटन यहाँ से वहाँ हो रही है।

लालू प्रसाद यादव नीतीश कुमार को मनाने में लगे हैं।
मेल-मिलाप भी चल रहा है और रससाक्षी भी। कहने के लिए किसी के पास कुछ नहीं है लेकिन एक रेल की तरह सबके इधर उधर आ रहे हैं। वैसे तो राज्य विधानसभा के चुनाव 2025-26 के करीब होने वाले हैं लेकिन अगर विधानसभा भंग कर दी जाए तो ये चुनाव भी कांग्रेस चुनाव के साथ दिख सकते हैं।
व्यापक, अफ़रा तफ़री का माहौल है। भाजपा के कुछ चुने हुए नेता बार-बार दिल्ली दौड़ रहे हैं। कुछ केंद्रीय मंत्रियों को अचानक दिल्ली तलब किया गया है। लगभग ऐसी ही घटना महाराष्ट्र में भी हुई थी और नतीजा यह हुआ कि उद्धव ठाकरे की सरकार गिर गई थी। नीतीश कुमार क्या करेंगे, यह दो-तीन दिन में सामने आने वाला है।
क्या वे विधानसभा भंग कर भाजपा के साथ चुनाव के लिए उतरेंगे या भाजपा के साथ लेकर सरकार को अगले पूरे कार्यकाल तक चलाने के लिए तैयार रहेंगे? उत्साहित, कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न देने के केंद्र सरकार के फैसले से नीतीश कुमार खुश नजर आ रहे हैं। ख़ुश होना भी चाहिए लेकिन इसकी वजह से वे भाजपा के बहुत क़रीब आ जाएंगे, ऐसा किसी ने पहले कभी नहीं सोचा होगा।

पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी लिख रहे हैं कि ‘खेला होबे’।
करीब भी इतने की अपने सहयोगी से उनकी तल्खी ही हो जाए। सुना है राज्य सरकार की पिछली कैबिनेट में भी पार्टियों और पार्टियों के मंत्रियों में बड़ा विवाद हुआ। हालांकि इस मुलाकात में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव कुछ ज्यादा नहीं बोले लेकिन हुआ यह कि मुलाकात के बाद तेजस्वी यादव नीतीश कुमार की राह तकते रहे और नीतीश उनसे बात किए बिना ही आगे बढ़ गए।
तटस्थ विवाद के ये छोटे-छोटे क़िस्से हैं। पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी लिख रहे हैं कि ‘खेला होबे’। वे स्पष्ट संकेत दे रहे हैं कि नीतीश जी फिर से पाला बदलने वाले हैं और ये अवश्य होगा। वैसे इन खबरों या सुविधाओं को फिट होने से रोका भी नहीं जा सकता क्योंकि नीतीश ऐसा कई बार कर चुके हैं। यह देखना है कि नेता उन्हें मनाना चाहते हैं या नीतीश ने जो कुछ ठान लिया है वह अवश्य ही रहेंगे।
