बिना पर्चा धड़ल्ले से बिक रहीं अबॉर्शन पिल्स, अमेरिकी सांसद ने उठाया मुद्दा, पर क्यों आया भारत का नाम?


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बिना पर्चा धड़ल्ले से बिक रहीं अबॉर्शन पिल्स, अमेरिकी सांसद ने उठाया मुद्दा

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US Abortion Pills without Prescription: अमेरिका में सीनेटर्स के एक ग्रुप ने ऐसी समस्या की ओर ध्यान आकर्षित कराया है, जो लड़कियों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है. उन्होंने लेटर लिखकर कहा है कि ऑनलाइन बिना प्रिस्क्रिप्शन के मिलने वाली गर्भ निरोधक दवाएं एक समस्या बन चुकी हैं और इस पर तुरंत रोक की जरूरत है.

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ऑनलाइन बिक रही हैं अबॉर्शन पिल्स. (Credit- REUTERS)

वॉशिंगटन: अमेरिकी सीनेटरों के एक ग्रुप ने फेडरल रेगुलेटर्स से अबॉर्शन पिल्स की गैर-कानूनी ऑनलाइन बिक्री के खिलाफ कार्रवाई करने की अपील की है. इसके साथ ही उन्होंने गैर-कानूनी ऑनलाइन बिक्री का लिंक भारत समेत विदेशी सप्लाई चेन से भी बताया है. सीनेटरों ने बुधवार को फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन, कमिश्नर मार्टिन मकारी को लिखे एक लेटर में अमेरिकी मार्केट में केमिकल अबॉर्शन दवाओं, मिफेप्रिस्टोन और मिसोप्रोस्टोल के गलत ब्रांड वाले और बिना मंजूरी वाले दवाओं को आने से रोकने के लिए तुरंत कार्रवाई करने की मांग की.

उन्होंने कहा- ‘इन दवाओं की गैर-कानूनी बिक्री महिलाओं को नुकसान पहुंचाती है और एफडीए के अमेरिकी कंज्यूमर्स की सुरक्षा के मुख्य मिशन को कमजोर करती है.’ सीनेटरों ने चेतावनी दी कि बिना मेडिकल देखरेख के आसान ऑनलाइन एक्सेस महिलाओं की सेहत के लिए गंभीर खतरा पैदा करता है और जबरदस्ती और दबाव में अबॉर्शन का खतरा बढ़ाता है.यह लेटर ग्लोबल सप्लाई चेन की ओर ध्यान खींचता है. इसमें कहा गया है कि विदेशी वेबसाइटों द्वारा बेची जाने वाली दवाइयां अक्सर भारत में कई तरह के मैन्युफैक्चरर्स से आती हैं.

बिना प्रिस्क्रिप्शन के बिक रहीं दवाएं

सांसदों ने कहा कि ऑनलाइन मार्केट का स्केल तेजी से बढ़ रहा है. एक प्रोवाइडर ने एक साल में 30 अमेरिकी राज्यों में 43,259 पैकेज भेजे. एक और अनुमान के मुताबिक 2023 में अमेरिका में लगभग 100000 पैकेज भेजे गए. सीनेटरों ने चार मुख्य चैनल की पहचान की है. इनमें अमेरिका-बेस्ड टेलीहेल्थ क्लीनिक, विदेशी क्लीनिक, इनफॉर्मल नेटवर्क और ऑनलाइन फार्मेसी शामिल हैं. उन्होंने कहा कि कई बिना प्रिस्क्रिप्शन या सही निगरानी के काम करती हैं. उन्होंने कहा कि कुछ वेबसाइटें एफडीए-अप्रूव्ड दवाएं बेचने का झूठा दावा करती हैं. असल में वे विदेशी मैन्युफैक्चरर्स से बिना अप्रूव्ड वाली दवाइयां भेजती हैं. लेटर में सेफ्टी की चिंताएं भी जताई गईं. कुछ प्लेटफॉर्म यूजर्स को सलाह देते हैं कि वे डॉक्टरों को यह न बताएं कि उन्होंने दवाएं ली हैं.

सांसदों ने की सख्ती बढ़ाने की अपील

सांसदों ने एफडीए से सख्ती बढ़ाने की अपील की. ​​उन्होंने वॉर्निंग लेटर, वेबसाइट डोमेन के खिलाफ एक्शन और शिपमेंट रोकने के लिए कस्टम और पोस्टल अधिकारियों के साथ मजबूत तालमेल की मांग की. उन्होंने क्रिमिनल जांच की भी मांग की. लेटर में 2020 के एक केस का जिक्र किया गया, जिसमें एक अमेरिकी निवासी पर भारत से मंगाई गई अबॉर्शन पिल्स को बिना प्रिस्क्रिप्शन के बेचने के लिए मुकदमा चलाया गया था. सीनेटरों ने कहा कि एफडीए को अपनी अथॉरिटीज का पूरा इस्तेमाल करना चाहिए और इस मुद्दे को प्राथमिकता देनी चाहिए. लेटर को सीनेटर बिल कैसिडी ने लीड किया था. इस पर सीनेटर स्टीव डेन्स, जेम्स लैंकफोर्ड, सिंडी हाइड-स्मिथ और लिंडसे ग्राहम ने साइन किए थे. उन्होंने एफडीए से 8 अप्रैल तक एनफोर्समेंट स्टेप्स की डिटेल्स के साथ जवाब देने को कहा है. आपको बता दें कि अमेरिका में मेडिकेशन अबॉर्शन का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है. इसमें आमतौर पर रेगुलेटेड कंडीशंस के तहत मिफेप्रिस्टोन के बाद मिसोप्रोस्टोल शामिल होता है.

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Prateeti Pandey

News18 में इंटरनेशनल डेस्क पर कार्यरत हैं. टीवी पत्रकारिता का भी अनुभव है और इससे पहले Zee Media Ltd. में कार्य किया. डिजिटल वीडियो प्रोडक्शन की जानकारी है. टीवी पत्रकारिता के दौरान कला-साहित्य के साथ-साथ अंतरर…और पढ़ें



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