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Abdul Kalam held his hand and said – this is the hand of a soldier, Earning 800 rupees a month, his mother made him a lieutenant; cadets took an oath to defend the country at the IMA’s passing out par | अब्दुल कलाम ने हाथ थामकर कहा- ये फौजी का हाथ: महीने में 800 रुपए कमाकर मां ने बनाया लेफ्टिनेंट, IMA की पासिंग आउट परेड में कैडेट्स ने देश की रक्षा की शपथ ली

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  • अब्दुल कलाम ने हाथ पकड़कर कहा- ये एक सैनिक का हाथ है, 800 रुपए महीना कमाता था, मां ने लेफ्टिनेंट बना दिया; आईएमए के पासिंग आउट परेड में कैडेटों ने देश की रक्षा की शपथ ली
11 मिनट पहले

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भारतीय अकादमी अकादमी यानी आईएमए विश्विद्यालय में 13 दिसंबर को पासिंग आउट परेड हुई। इस दौरान कई युवा तांत्रिकों को सेना में शामिल किया गया। सभी कैडेट्स ने देश की रक्षा और सेवा की शपथ ली। अब ये अधिकारी भारतीय सेना में मठ के तौर पर शामिल होंगे।

पासिंग आउट परेड के बाद कई अधिकारी चर्चा में हैं। किसी उदाहरण में 6 बार फ़ेल होने के बाद सेना में सामान बनाया गया है। तो वहीं किसी का परिवार चार आदिवासियों से देश की सेवा कर रहा है। सेना में हरदीप गिल भी बने पद पर उनके पिता का बचपन में ही निधन हो गया था।

4. हरमनजीत का परिवार से देश की सेवा कर रहा है

22 साल के लेफ्टिनेंट हरमनमीत सिंह भी भारतीय सेना में शामिल हुए हैं। उनके परदादा, दादा, चाचा और पिता सभी सेना में सेवा कर चुके हैं। सेना में आने वाली वे परिवार की चौथी पीढ़ी हैं।

हरमनमीत जब 3 साल के थे, तब पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने आईएमए में उनके हाथ में तोड़फोड़ करते हुए कहा था, ‘ये फौजी के हाथ हैं’, और आज वही आईएमए से वे हथियार निकाले गए हैं।

लेफ्टिनेंट हरमनमीत सिंह अपने परिवार के साथ।

लेफ्टिनेंट हरमनमीत सिंह अपने परिवार के साथ।

उनके परदादा सूबेदार प्रताप सिंह 1948 की सेना में आये थे। दादा और चाचा भी सेना में अलग-अलग रैंक पर रह रहे हैं। उनके पिता एडमिरल कर्नल हरमीत सिंह 6 मराठा लाइट इन्फैंट्री के कमांडिंग ऑफिसर थे, जिनमें अब हरमीत सिंह नियुक्त हैं। इस मौके पर हरमनमीत सिंह ने कहा, ‘सेना में बचपन का सपना था, जो अब पूरा हो गया।’

12वीं के बाद सेना में सिपाही बने, 6 बार असफल हुए

32 साल के गुरुमुख सिंह सेना में शामिल हुए हैं। उनके पिता सिंह भी सेना में सेंचुरीदार मेजर रह चुके हैं। गुरमुख ने 12वीं के बाद सेना में सिपाही के रूप में देश की सेवा की। लेकिन हमेशा से आर्मी स्टेशन बनने का सपना था।

गुरमुख के सिपाहियों के मन में खुलेआम पोस्टिंग हुई। वहां उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी। 6 बार के अधिकारी का एग्ज़ाम दिया गया लेकिन पास नहीं मिला। आख़िरकार 7वीं बार सफलता हासिल की और अब सेना में लेफ्टिनेंट बन गए।

लेफ्टिनेंट गुरुमुख सिंह।

लेफ्टिनेंट गुरुमुख सिंह।

गुरुमुख सिंह ने कहा, ‘जब भी मैं पिताजी को झूठ बोलने के बारे में बताता था, तो मैं हमेशा मुझे विश्वास दिला देता था कि इस बार।’ परेड देखने आये उनके पिता सेनाध्यक्ष मेजर मित्रा सिंह ने कहा, ‘बेटे को अधिकारी के रूप में देखकर बहुत गर्व महसूस हो रहा है।’

बचपन में ही पिता का निधन, मां मिड-डे माइल्स कैरेबियन

हरदीप गिल सिख लाइट इन्फैंट्री में ऑफिसर बने हुए हैं। बचपन में ही उनके पिता का निधन हो गया था। उसके बाद उसकी माँ ने ही उसकी हत्या कर दी। मां स्कूल में मिड-डे मील कैरेबियन हैं और महीने भर में करीब 800 रुपये ही कमाए कैरेट हैं।

हरदीप गिल अपनी माता के साथ।

हरदीप गिल अपनी माता के साथ।

हरदीप स्टूडियो में एयरमैनइन्मिशन चाहते थे। उनका सिलेक्शन भी हो गया था लेकिन अग्निवीर योजना के बाद उनकी बैक जॉइनिंग नहीं हुई। इस सबके बाद भी हरदीप ने हार नहीं मानी और तैयारी करते रहे। अंततः अखिल भारतीय मेरिट सूची में उनका 54वाँ स्थान मिला।

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