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national film institute or construction site students complaint of incomplete building | नेशनल फिल्म इंस्टीट्यूट या कंस्ट्रक्शन साइट?: FTII ईटानगर के स्‍टूडेंट बोले- गर्ल्‍स हॉस्‍टल में अजनबी घुस आते; अधूरी बिल्डिंग में चल रहीं क्‍लासेज

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5 मिनट पहले

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अरुणाचल प्रदेश के फिल्म एंड टेलीविज़न इंस्टीट्यूट, ईटानगर में एफटीआईआई के पहले बैच के 45 छात्र कक्षाओं में भाग लेने की तैयारी नहीं है। दोस्त की मांग है कि या तो पायल को ठीक किया जाए या उन्हें दूसरे पायलेट में शिफ्ट किया जाए। जब तक ऐसा नहीं होगा वो क्लासेज अटेंड न करके अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखेगा।

कॉलेज में जिम के फर्स्ट फ्लोर की ये है स्थिति।

कॉलेज में जिम के फर्स्ट फ्लोर की ये है स्थिति।

फ्रेंचाइजी स्टूडियो ने नाम की पेशकश की शर्त पर कहा, ‘मैं स्क्रीन एक्टर्स का स्टूडियो हूं। बिहार से यहां इस कोर्स के लिए आया हूं। एफटीआई, ईटानगर के पहले बैच का स्टोर हूं।

जब मैं पहली बार पेटिल आया तो यहां का नजारा देखकर हैरान रह गया। आधा-अधूरा मेन गेट और पूरा पिला एक रेलवे साइट जैसा दिख रहा था। लड़के-लड़कियों के लिए नौकरानी तैयार नहीं थीं।

हमें गेस्ट हाउस में रहना होगा। बारिश के मौसम में तो स्थिति और ख़राब थी। संस्थान में पीने तक के लिए साफ पानी नहीं था। समय-समय पर बिजली जाती रहती है। कैंटीन का खाना महंगा और खराब था।’

45 चोरों का पहला बच्चा है

एफटीआईआई ईटानगर ‘सत्यजीत रे फिल्म एंड इंस्टीट्यूट इंस्टीट्यूट, कोलकाता’ का आवेदन है। यह देश का दूसरा राष्ट्रीय फिल्म संस्थान है। साल 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी स्टॉक रैली निकाली थी।

इसे बनाने के लिए इनफॉर्मेशन एंड ब्रॉडकास्ट मिनिस्ट्री ने 204 करोड़ रुपए की फंडिंग की थी और 25 महीने में इसे तैयार करने में लग गई थी यानी 2021 तक पिल पूरी तरह से तैयार हो गई थी। इसके बाद अगस्त-सितंबर 2024 में यहां आस्ट्रिया का स्टूडियो शुरू हुआ।

मार्च 2025 में इसके अंत-अधूरे पिल्ला में 45 बच्चों के बच्चों के साथ क्लासेज़ का पुनर्निर्माण शुरू हुआ। पहला सेमेस्टर किसी तरह पूरा हो गया लेकिन विड ने दूसरे सेमेस्टर की क्लासेज में शामिल होने से मना कर दिया।

इस इंस्टीट्यूट में 3 डिपार्टमेंट हैं जहां 2 साल की पोस्ट- वीआर क्लास चलती है। यहां एक्टर्स के 20, राइटिंग के 15 और डॉक्यूमेंट्री सिनेमा के 10 स्टूडेंट आए हैं। ये सभी सहयोगी एफटीआईआई जेट एग्जामिनेशन क्लियर कर यहां तक ​​हैं।

संस्थान के मेन गेट पर तो कोई साइनबोर्ड है और कोई नाम भी नहीं लिखा है।

संस्थान के मेन गेट पर तो कोई साइनबोर्ड है और कोई नाम भी नहीं लिखा है।

छोटी सी लाइब्रेरी में संचालित संचालित क्लासेज़

क्लासेज को लेकर बात करते हुए विद्यार्थी ने बताया, ‘फिल्म का कोर्स करने वाले विद्यार्थियों की क्लासेज आमतौर पर सीआरटी यानि क्लास रूम थिएटर में होनी चाहिए लेकिन हमारी आने तक यह तैयारी ही नहीं थी। इसलिए हमारी क्लासेज़ लाइब्रेरी में चलीं।

फिल्मों की फिल्मों के लिए लाइब्रेरी में एक छोटी सी स्क्रीन और प्रोजेक्टर का इस्तेमाल किया गया था, लेकिन ठीक से कुछ दिखाई नहीं दिया था। इसके अलावा बार-बार बिजली जाने से भी क्लासेज में स्ट्रक्चर पैदा होती रही।

लाइब्रेरी में लाइब्रेरी की संख्या भी बहुत कम थी। इसके अलावा पिल्यू में कोई प्रिव्यू थिएटर तैयार नहीं है और कोई साउंड स्टूडियो नहीं बना है। ऐसे में न तो कलाकार हो पा रही हैं और न ही कलाकारों की क्लास हो पा रही हैं।’

कुछ साधकों का कहना है कि उन्हें पूरा बैकपैक सीज़न लैंडस्लाइड के डर में रखा गया था। पाइप में टूटी हुई सड़कें नहीं है जिस कारण से फ़्लोरिकर चोट लीज़ का डर रहता है। आसपास कोई अस्पताल भी नहीं है।

वास्तविकता से यह स्पष्ट है कि अभी काफी समय पहले तक मित्र प्रीव्यू थिएटर का उपयोग नहीं किया गया था।

वास्तविकता से यह स्पष्ट है कि अभी काफी समय पहले तक मित्र प्रीव्यू थिएटर का उपयोग नहीं किया गया था।

रिसर्च साइट में पहला नमूना पूरा किया गया

विद्वान ने बताया कि उन्होंने सबसे पहले अंतिम-अधूरे पिलेट की पुष्टि की है। वो जब पेटिल आये तो यहां सिर्फ एक ही बिल्डिंग थी जो आधी-अधूरी बनी थी। उनके क्लासेज मोबाइल स्थान को देखें। एकफैक्ट्री सीआरटी के लिए भी कई बार विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है।

पेटिल बिल्डिंग्स के साथ-साथ सड़कों की हालत भी खराब है। मॉनसून में यहां पर खूबसूरत और लैंडस्लाइड के बच्चे का आना-जाना मुहाल रहता है।

पेटिल बिल्डिंग्स के साथ-साथ सड़कों की हालत भी खराब है। मॉनसून में यहां पर खूबसूरत और लैंडस्लाइड के बच्चे का आना-जाना मुहाल रहता है।

राजस्थान से यहां पढ़ें आई एक स्टोर में कहा गया है, ‘हमारा कीमती समय प्रदर्शन और पिछले-अधूरे टैटू की साइटभेंट चढ़ रहा है। एक नेशनल इंस्टिट्यूट में आने के बावजूद स्टूडेंट कोस्टिस्ट्स के लिए बैड पैड रखा जा रहा है।’

बेंगलुरु के एक रिटेलर ने बताया कि पिलेट में खाने के लिए बहुत सारी सुविधाएं नहीं हैं। यहां सिर्फ एक मेस है जहां मजबूरन सभी दोस्तों को खाना मिलता है। यहां भी कई सी सवारियां सामने आती रहती हैं।

सेमेल की शुरुआत में कई बार कुक्स का काम खत्म हो गया। ऐसे में कई बार मेस में शहीद हुए और उन्हें खाना ही नहीं मिला। कई बार खाना सभी दोस्तों को मिल भी नहीं पाता। लैंडस्लाइड की वजह से बहुत से श्रद्धालु भी आ गए।

लड़कियों में घुसेड़ें अजनबी होते हैं

फाइल में कहीं भी साइनबोर्ड नहीं लगाए गए हैं और कोई मार्किंग नहीं की गई है। टेक्नो गार्ड्स की भी व्यवस्था अच्छी नहीं है। ऐसे में कई ऐसे लोग आते हैं जब जासूस में कई लोग भटककर पायल के अंदर चले जाते हैं।

कई लोग लड़कियों के सदस्यों में भी घुसे हुए हैं। लड़कियों ने खुद को ही पहचान लिया घर के बाहर। इस तरह के फ़ायदे को लेकर कई बार आवेदक शिकायत कर चुके हैं लेकिन कोई नहीं हुआ।

पिलेट में क्लासेज शुरू हुए करीब एक साल हो गया लेकिन अब भी पिलेट की कोई भी ऑर्टिल साइट वैसी ही है।

पिलेट में क्लासेज शुरू हुए करीब एक साल हो गया लेकिन अब भी पिलेट की कोई भी ऑर्टिल साइट वैसी ही है।

पहले सेमल के प्रैक्टिकल भी ठीक से नहीं चले। इन्हें इस तरह डिजाइन किया गया है कि किसी इक्विपमेंट लैपटॉप की जरूरत ही न पड़े।

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