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Preparations underway to conduct NEET and JEE exams in Class 11 itself | NEET, JEE एग्‍जाम 11वीं में ही कराने की तैयारी: 12वीं के नंबर भी जुड़ेंगे, कोचिंग 3 घंटे से ज्‍यादा नहीं; केंद्र जल्‍द ला सकता है बदलाव

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25 मिनट पहले

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एनईईटी, जेईई ए पर नीट पर दबाव बनाने के लिए केंद्र सरकार 11वीं में ही ए कॉजिकजम का दबाव बनाने पर विचार कर रही है। इसके अलावा कोचिंग सेंटर के लिए निर्धारित समय पर भी विचार किया जा रहा है। कोचिंग सेंटर की चतुर्थ श्रेणी कम करने के लिए और केंद्र सरकार द्वारा लगाए गए डमी अभ्यर्थियों के लिए जल्द ही बड़े पैमाने पर बदलाव किए जा सकते हैं।

NEET-JEE और बोर्ड्स को मिलाकर एक हाइब्रिड मॉडल पर विचार

एक केंद्रीय पैनल को जिममामा द्वारा निष्कासित कर दिया गया था, जो वियापक सुधारों पर विचार कर रहा है। कक्षा 11 में नीट-जेईई आयोजित करने के लिए बोर्ड परीक्षा के साथ-साथ कोचिंग के रोजाना घंटों को 2-3 घंटे करना और बोर्ड परीक्षा के साथ एनईईटी-जेईई का एक और सेमेस्टर मार्किंग मॉडल शामिल है।

15 नवंबर को हुई बैठक में चर्चा

11 रोडवेज समिति की 15 नवंबर को हुई बैठक में इन फर्नीचर पर चर्चा हुई। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, कम्युनिटी ने उन चिन्हों की समीक्षा की है कि जो छात्र कोचिंग लेने के लिए मजबूर हैं।

अंतिम अनुशंसा प्रस्ताव पहले समिति से अलग-अलग बोर्ड के सिलेबस की तुलना। कई सदस्यों का तर्क है कि इसी तरह 12वीं बोर्ड का खामी कम होगा। इस बात पर भी चर्चा हो रही है कि इन खेलों का आयोजन साल में दो बार, एक बार अप्रैल और नवंबर में किया जा सकता है।

पैनल ने पाया कि अभी 5-6 घंटे तक कोचिंग में स्कूल के बाद रुके हुए हैं। कोचिंग के घंटे सीमित करने से विद्यार्थियों की थकान कम हो सकती है और स्कूल आधारित शिक्षा की भूमिका को मजबूत किया जा सकता है।

समिति ने हिमाचल प्रदेश मार्किंग मॉडल के लिए प्रवेश परीक्षाओं पर भी विचार किया, जिसमें बोर्ड के नंबर और प्लास्टिक परीक्षण दोनों को शामिल किया गया। अधिकारियों ने कहा कि इससे क्लासिक्स एजुकेशन मजबूत होगी, कोचिंग बेहतर होगी और कोचिंग पर शुरुआत कम होगी।

डमी आदर्श कूल, आदर्श की कमी पर भी चर्चा

बैठक में कई और विवरणों पर भी चर्चा की गई। अलग-अलग बोर्ड के सिलेबस में अंतर, डमी स्कॉल्स की समस्या, फॉर्मल फॉर्मेटिव एसेसमेंट, टीचर्स की क्लासिक क्वालिटी और स्कीन्स में क्लासिक आर्किटेक्चर की कमी पर भी विचार किया जा रहा है।

बैठक के बाद एनसीईआरटी को जिम्मेदारी दी गई कि वह सीबीएसई और राज्य बोर्डों के साथ मिलकर कक्षा 11 और 12 के सिलेबस की तुलना प्रतियोगी परीक्षाओं से करे। इसके बाद इनका अंतर्ज्ञान कम किया जाएगा और स्कूल सिलेबस में सुधार किया जाएगा।

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