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मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के फैसले से भोपाल की एक लड़की का आईएएस बनने का सपना साकार होगा। कोर्ट ने बिहार की एक महिला आईएएस अधिकारी को अपना यूपीएससी मेंटर और गाइड बनाया है, ताकि वो सिविल सर्विस की तैयारी कर सकें।
असल में, उसके पिता द्वारा जबरन शादी के लिए दबाव वाली लड़की को घर से अलग कर दिया गया था। वो पढ़ाई जारी रखना चाहती थी और सिविल सेवा परीक्षा देना चाहती थी, जबकि पिता उस पर शादी का दबाव बना रहे थे।
डिवीजन बेंच के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायाधीश विनय सराफ ने उन्हें एक ‘ब्राइट परफेक्ट मासूम बच्ची’ माना है।

शादी से बचने के लिए घर से भागी
जनवरी 2025 में भोपाल के बजरिया इलाके की एक लड़की का घर छोड़ दिया गया था। उसका आरोप है कि उसके पिता उसे पढ़ाई जारी नहीं रख रहे थे और शादी का दबाव बना रहे थे। कथित तौर पर उसे पासपोर्ट के रूप में रखा जा रहा था। परेशान वो लोग घर से निकल गए और इंदौर में एक निजी कंपनी में नौकरी करके अपना खर्चा चलाया और कहीं सिविल सेवा की तैयारी के लिए कोचिंग करने लगी।
इसके बाद लड़की के परिवार वालों ने उसके गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। लेकिन महीनों तक उनका कोई सुराग नहीं मिला। इस पिता ने जबलपुर में बंदी प्रत्यक्षीकरण अर्थात हैबियस शव अभिलेख की।
उच्च न्यायालय ने पुलिस अधिकारियों के लिए एक सूची तैयार की, जिसमें निर्देश दिए गए हैं। 10 महीने बाद पुलिस ने उसे बरामद कर लिया। तब पता चला कि वह किराए पर रहता था, एक निजी कंपनी में नौकरी कर रहा था और यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी में लगा हुआ था।
इंदौर से भोपाल लाई पुलिस
इंदौर में होने के कुछ महीने बाद लड़की 18 साल की हुई थी। अक्टूबर महीने में उसने अपना आधार कार्ड में मोबाइल नंबर जारी किया था। इसी से पुलिस को उसके इंजेक्शन का पता चला। पुलिस की टीम लड़की को इंदौर से भोपाल ले आई।
परिवार सहित वापस बिहार लौट आये थे पिता
लड़की के घर से गायब होने के बाद उसके पिता अपने अन्य 3 बच्चों की पढ़ाई के लिए छुड़वाकर पत्नी के साथ बिहार वापस अपने गांव चले गए थे। जब पुलिस ने लड़की को उसके परिवार से मिलाने की कोशिश की, तो उसने मना कर दिया। उसने पुलिस को बताया कि वह आईएएस अधिकारी बनना चाहती है और उसने स्कूल में ही पढ़ाई के साथ यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी थी।
एमपी उच्च न्यायालय में पेश किया गया
हैबियस कोसस ने उच्च न्यायालय के आदेश के बाद 5 नवंबर को लड़की को उच्च न्यायालय में पेश किया। चीफ जस्टिस संजीव संजीव सचदेवा और जस्टिसमर्ति अतुल श्रीधरन की पीठ के सामने लड़की ने पिता के साथ नहीं दी पार्टी की फिल्म। वहीं, पिता ने फिर उनसे कामचोर घर का आग्रह नहीं किया।
उसके बाद कोर्ट ने कहा कि वो 4-5 दिन तक माता-पिता के साथ रहें। अगर ऑटोमोबाइल बेहतर लगे तो ठीक है, नहीं तो छात्रों को आदेश दिया जाएगा कि वो बाहर रहें और पढ़ाई की व्यवस्था करें।
उच्च न्यायालय ने आईएएस बंदना प्रेयसी को मेंटोर बनाया
कोर्ट ने अगली सुनवाई में लड़की के भविष्य को लेकर अंतिम फैसला लिया। हेबियस कोसस की याचिका में उच्च न्यायालय ने कहा कि गर्ल ब्राइट प्लांट है और सिविल सेवा परीक्षा देने के लिए अपने लक्ष्य को लेकर है।
कोर्ट ने बिहार के सुपरमार्केट में सामाजिक कल्याण विभाग के सचिव, आईएएस बंदना प्रियाशी से कहा कि वे लड़की के ‘संरक्षक और मार्गदर्शक’ के रूप में उनकी तैयारी में सहायता करें।

बंदाना बिहार कैडर के 2003 बैच के आईएएस अधिकारी हैं।
आईएएस बंदना- यह मेरे लिए बहुत सम्मान की बात है
मेंटर और गाइड चुनने के बाद आईएएस बंदना ने कहा, ‘मुझे नहीं पता कि हाई कोर्ट ने तीन अधिकारियों से मुझे ही क्यों चुना, लेकिन यह मेरे लिए बहुत सम्मान की बात है कि मैं उस लड़की की मेंटर बनूं।
एक मित्र, मार्गदर्शक और सलाहकार के रूप में मैक्सिमम में टोरा बंदाना। उसे भी जिस तरीके से चाहिए होगा, उसकी मदद करनी होगी। अगर जरूरत है तो मैं उसके कोचिंग या पढ़ाई से जुड़ी कोई भी चीज के लिए नाइवैलिटी सहायता भी दे सकता हूं।
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