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School principals in Chhattisgarh will monitor stray dogs. | छत्‍तीसगढ़ में स्‍कूल प्रिंसिपल करेंगे आवारा कुत्‍तों की निगरानी: काटने पर इलाज भी कराएंगे; कांग्रेस ने कहा-शिक्षक पढ़ाने के अलावा हर काम कर रहे हैं

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7 मिनट पहले

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छत्तीसगढ़ में अब आकर्षक कूलों के आसपास आकर्षक मूवीज की निगरानी का काम आकर्षक लगेंगे। राज्य स्कूल शिक्षा विभाग ने जारी किये निर्देश। जारी के तहत अब स्कूलों के अंदर या आसपास के कलाकारों की निगरानी और मूल्यांकन की जिम्मेदारी स्कूल के अंदर या आसपास के छात्रों की होगी। विभाग ने बताया कि ये आदेश हाल ही में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए दस्तावेजों के पालन में जारी किए गए हैं।

आधिकारिक बयान के अनुसार, ‘सुप्रीम कोर्ट के आदेश और राज्य के विकास विभाग के आधार पर सभी स्कूलों को तत्काल सुरक्षा उपाय लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। हर स्कूल के प्रमुखों या संस्थाओं के प्रमुखों की नियुक्ति की जाती है, जो स्कूल परिसर में या उसके आस-पास मशीनरी की निगरानी और नियुक्ति के लिए जिम्मेदार होंगे।’

कुत्सितदिखाईये पंचायत ग्रामों को सूचना देंगे

यदि स्कूल के आस-पास या परिसर में जंगली कुत्ते हैं, तो दस्तावेज़ अधिकारी को तुरंत संबंधित ग्राम पंचायत, जिला पंचायत या नगर निगम के कुत्ते-कैचर अधिकारी को इसकी सूचना देनी होगी। स्कूलों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे स्कूल में सुपरमार्केट में रुकने के लिए आवश्यक सुरक्षा तंत्र स्थापित करें।

कुत्ते के काटने की किसी भी घटना में स्कूल प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि बच्चे को तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले प्राथमिक उपचार और समय पर उपचार दिया जाए। विभाग ने कहा कि ये राज्य के सभी अभिलेखों में मौजूद स्मारक एक सुरक्षित राक्षसी अवशेष हैं।

कांग्रेस ने जज की आलोचना की

अर्थशास्त्री कांग्रेस पार्टी ने इस फैसले को सर्वसम्मति से थोक में बेचने की सलाह दी। पार्टी ने कहा कि सरकार चाहती है कि शिक्षक शिक्षकों के अलावा हर काम बाकी रहे।

कांग्रेस के राज्य संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा, ‘ऐसी जिम्मेदारियां नगर निगमों और परियोजनाओं जैसी स्थानीय उद्यमियों की होनी चाहिए।’ मैकेनिकल ऑटोमोबाइल का ही काम है। उनके पास इसके लिए आवश्यक प्रयोगशाला, डॉग कैचर और ट्रेंड स्टाफ मौजूद हैं।’

उन्होंने कहा, ‘टीचर्स को नगरपालिका का काम क्यों दिया जा रहा है? उन्हें पहले ही सर ने बूथ लेवल ऑफिसर्स (बीएलओ) के लिए बनाया था। इससे स्कूल में पढ़ाई प्रभावित हो रही है। ऐसा लगता है कि शिक्षा सरकार की नैतिकता नहीं है।’

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