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Justice Surya Kant takes oath as the 53rd CJI | जस्टिस सूर्यकांत ने 53वें CJI पद की शपथ ली: SIR, तलाक-ए-हसन समेत 8 मामलों की सुनवाई करेंगे; जानें प्रोफाइल

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3 मिनट पहले

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जस्टिस सूर्यकांत ने आज 24 नवंबर को देश के 53वें चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) पद की शपथ ली। राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें पद की शपथ दिलाई।

भारत के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई ने सोमवार, 27 अक्टूबर को अपने उत्तराधिकारी के रूप में वरिष्ठ न्यायाधीश सूर्यकांत शर्मा का नाम रखा।

परंपरा यह है कि स्थायी सीजेआई अपने उत्तराधिकारी के नाम की शपथ लेते हैं, जब उन्हें कानून मंत्रालय से ऐसा करने का कहा जाता है। स्थायी सीजेआई गवई का कार्यकाल आज, 23 नवंबर को समाप्त हो गया। सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की आयु 65 वर्ष होती है।

आने वाले दिनों में जस्टिस सूर्यकांत 8 महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई करेंगे-

1. स्पेशल इंटेसिव रिवाइज़न (SIR) का मामला

21 नवंबर को जस्टिस सूर्यकांत की पृष्णि ने केरल सरकार की याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें राज्य में स्थानीय निकाय चुनाव समाप्त होने तक स्पेशल इंटेंसिव रिजन वाइज एसआईआर प्रक्रिया स्नातक करने की मांग की गई थी। राज्य सरकार चाहती है कि यह प्रक्रिया, जो जारी हो, अगले महीने वाले स्थानीय संस्थानों की नियुक्ति तक समाप्त कर दी जाए। इस मामले की सुनवाई 26 नवंबर को नए सीजेआई की बेंच पर होगी।

इससे पहले जुलाई, 2025 में बिहार के एसआईआर मामले में उनकी बेंच ने कहा था कि एसआईआर के लिए इलेक्शन कमीशन आधार और वोटर कार्ड को शामिल किया जा सकता है। यदि कोई अवैधता पाई गई तो अदालत हस्तक्षेप कर सकती है।

2. तलाक-ए-हसन का मामला

19 नवंबर को जस्टिस सूर्यकांत की 3 जजों की बेंच ने तलाक-ए-हसन के संवैधानिक पद को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई की थी। बेंच ने इसमें कहा है कि ये मामला 5 जजों की संविधान पीठ को भेजा जा सकता है। पृष्ट ने तीखा से उन कानूनी तस्वीरों की सूची को अनुमति दी है, जिन पर विचार करना जरूरी होगा। अगला परीक्षण 26 नवंबर को होगा।

3. बिल्डर-बैंक नेक्सस के घोटाले का मामला

सितंबर में जस्टिस सूर्यकांत के खिलाफ 3 जजों की बेंच ने सीबीआई को 22 मामलों के अलावा 6 नए मामले दर्ज करने की जानकारी दी। ये मामला बिल्डरों और फाइनेंसियलों के हितग्राहियों से घर के शेयरधारक को धोखा देने से जुड़े हैं।

1200 से अधिक होमबायर्स ने दावा किया था कि उनसे मुलाकात नहीं की गई, फिर भी ईएमआई की मांग को लेकर दबाव डाला जा रहा है। इस जांच का मतलब एनसीआर से लेकर मुंबई, बेंगलुरु, कोलकाता, मोहाली और अल्लाहाबाद के प्रोजेक्ट्स तक है।

4. सोशल मीडिया रेगुलेशन का मामला

जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने सोशल मीडिया पर रेगुलेट करने से जुड़े मामलों की भी सुनवाई की। यह बेंच स्टैंड-अप कॉमेडियन टाइम के खिलाफ रैलेन के खिलाफ उस याचिका को सुन रही है जिसमें उन पर असंवेदनशील मजाक करने का कथित आरोप है।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से सोशल मीडिया रेगुलेशन के लिए ड्राफ्ट गाइडलाइंस भी मांगे हैं।

5. उच्च न्यायालयों द्वारा निर्णय लिया गया कि गरीबों का निवास स्थान क्या है

अगस्त, 2025 में 4 फिलाडेल्फिया की याचिका पर सुनवाई के दौरान पी.आर.पी. ने कहा कि कई उच्च न्यायालयों ने अब तक निर्णय लेने की गारंटी नहीं दी है। ऐसे लोगों को न्याय नहीं मिल पाता।

सर्वोच्च न्यायालय ने अन्य उच्च न्यायालयों से भी इस संबंध में जानकारी की छूट थी। राजस्थान के उच्च न्यायालयों में रिजर्व जजमेंट के मामलों को भी नए सीजेआई के सामने रखे जाने वाले रिजर्व जजमेंट में शामिल किया जाएगा।

6. रोहिंग्या डकैती और अवैध घुसपैठ का मामला

जुलाई, 2025 में जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने रोहिंग्याओं को ‘शरणार्थी’ या ‘अवैध प्रवासी’ के साथ संबंध बनाने और उन्हें अनिश्चित काल तक न्याय में शामिल करने के लिए संबंधित मामलों पर सुनवाई के लिए सहमति दी। अगली तारीख तय नहीं है, लेकिन यह मामला नए सीजेआई के सामने आएगा।

7. डिजिटल स्कैम या डिजिटल अरेस्ट का मामला

1 करोड़ रुपये के रिजर्व बैंक के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः स्तूप को हिरासत में ले लिया था। जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने ऐसे सभी मामलों की जांच सीबीआई को सौंपी। 27 अक्टूबर को बेंच ने सभी राज्यों और केंद्रों पर डिजिटल आवासीय व्यवसायियों के लिए नोटिस जारी किए और ऐसे मामलों में दर्ज एफआईआर की मांग की है।

8. रेस्तरां कानून का मामला

मई 2022 में, न्यायमूर्ति सूर्यकांत की राष्ट्रपति वली पृष्णि ने भारतीय दंड संहिता की धारा 124ए (राजद्रोह) के विरोधियों की केंद्र सरकार द्वारा पुनः समीक्षा और विद्रोह होने तक, यूनेस्को की अदालतों में सभी राजद्रोह मामलों पर रोक लगा दी थी। अब राजद्रोह कानून की संवैधानिक संस्था सरकार की समीक्षा के अधीन है। यह मुकदमा सुनवाई के लिए नए सीजेआई के पास आएगा।

10वें बोर्ड में पहली बार सिटी देखी गई थी

जस्टिस सूर्यकांत की जर्नी हरियाणा के एक गुमनाम गांव पेटवाड़ से शुरू हुई। उनके पिता टीचर थे। 8वीं तक उन्होंने एक गांव के स्कूल में पढ़ाई की, जहां बैठने के लिए बेंच तक नहीं थी। पहली बार सिटी टैब में देखा गया जब वे 10वीं के बोर्ड परीक्षा विवरण में एक छोटे से शहर हांसी गए थे।

हिमाचल उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति पर हुआ विवाद

जस्टिस सूर्यकांत की हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में जुगाली में रही रही। आगरा, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम में एक परामर्शदाता यीज़ कंसल्टी जज जस्टिस ए. के. गोयल ने अपना फिल्मी गाना अनाकर्षक रूप से प्रदर्शित किया था। आम तौर पर कॉलेजियम में किसी भी न्याय के प्रचार पर विचार करते समय उस उच्च न्यायालय से एसोसिएटेड कंसल्टी जज की राय ली जाती है।

इसके बावजूद, कॉलेजियम ने अपने समर्थकों को मंजूरी दे दी और जस्टिस सूर्यकांत को 5 अक्टूबर, 2018 को प्रदेश हिमाचल कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बनाए गए। इस पर पुनर्विचार जस्टिस ए. के. सोसाइटी ने जस्टिस सूर्यकांत के खिलाफ सीक्वल जारी करते हुए पत्र भी साझा किया था। इस बीच 2019 में कॉलेजियम ने जस्टिस सूर्यकांत को सुप्रीम कोर्ट में भी प्रमोट किया।

सीजेआई बनने वाले पहले हरियाणवी होंगे

जस्टिस सूर्यकांत इंडियन ज्यूडिशियरी की टॉप पोस्ट पर पहुंचने वाले हरियाणा से पहले। उनके नाम की पुष्टि करते हुए सीजेआई गवई ने कहा कि जस्टिस सूर्यकांत सुप्रीम कोर्ट के आदेश के लिए अयोग्य और अयोग्य हैं।

अनुच्छेद 370 में 1,000 से अधिक शामिल हैं

सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश सूर्यकांत कई संविधान पीठों का हिस्सा रहे हैं। अपने कार्यकाल के दौरान वे संवैधानिक, मानवाधिकार और संवैधानिक कानून से जुड़े मामलों को कवर करने वाले 1000 से अधिक शेयर में शामिल रहे।

जस्टिस सूर्यकांत के स्मारकीय निर्णय

  1. पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट की फुल बेंच का हिस्सा थे जिन्होंने 2017 में रेप के मामलों में राम रहीम सिंह को जेल की सज़ा सुनाई। हिंसा के बाद ट्रू डील को पूरी तरह से साफ करने का ऑर्डर भी दिया गया।
  2. जस्टिस सूर्यकांत उस बेंच का हिस्सा थे, जिन्हें कॉलोनियल एरा के राजद्रोह कानून में स्थानांतरित किया गया था। साथ ही निर्देश दिया था कि सरकार की समीक्षा तक इसके तहत कोई नई एफआईआर दर्ज न की जाए।
  3. सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन सहित बार एसोसिएशन में एक-तिहाई पैरवी के लिए महिलाओं को जाने का निर्देश भी जस्टिस सूर्यकांत ने दिया है।
  4. वे पेगासस स्पाइवेयर मामले की सुनवाई करने वाली बेंच का हिस्सा थे, जिन्होंने साइबर डिटेक्शन के लिए अवैध पर्यवेक्षकों का एक पैनल बनाया था। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा की शर्तों में छूट नहीं मिल सकती।

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