डोंगरगढ़: 21 नवंबर 2025 को मांगलिक क्रियाये संपन्न हुई, मुनि श्री धर्म सागर जी महाराज के मुखारविंद से शांति धारा संपन्न हुई आचार्य श्री की पूजन संपन्न हुई दुर्ग ,भिलाई की जैन समाज ने श्री फल अर्पण किया, कमेटी ने बताया कि 22 नवंबर को आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज का आचार्य पद आरोहण महोत्सव दुर्ग में मनाया जाएगा वहीं आहार संपन्न होगा.

इस अवसर पर धर्म सभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री धर्म सागर जी महाराज ने कहा कि कई बार परिवार में कोई केयर करने वाला नहीं होता है ,कितने लोग होते हैं जिनके पास घर नहीं होता है ,अमूल्य संपत्ति आपका शरीर है, धन संपदा से संतुष्टि नहीं होती है,
मुनि श्री भावसागर जी महाराज ने कहा कि..
मंदिर के लिए प्रभु के लिए जो भी अर्पण किया जाता है। वह भी पूजा के अंतर्गत आता है। भक्ति में तन्मयता के लिए हम प्रभु को सर्वश्रेष्ठ सामग्री अर्पण करते हैं। वैज्ञानिकों ने भी सिद्ध किया है चावल नेगेटिव एनर्जी को खींचता है। मंदिर सुख ,शांति, समृद्धि, प्रदान करने वाले होते हैं। भगवान को छत्र, चमर, भामंडल, प्रतिमा विराजमान करवाना वेदी का निर्माण ,शिखर का निर्माण, मंदिर के लिए भूमि आदि का दान भी पूजन के अंतर्गत आता है ।इसलिए मंदिर के लिए हमेशा सर्वश्रेष्ठ सामग्री का दान करते रहना चाहिए। जिससे जीवन में पाप कम होता है और पुण्य की वृद्धि होती है। और हमेशा इष्ट पदार्थों की प्राप्ति होती रहती है ।और आगामी भवो में भी इसका फल मिलता है,छत्र दान करने से एक छत्र राज्य करता है छत्र देने वाला और चमर दान करने से उसके ऊपर चमर ढुरते हैं। प्रभु की भक्ति सेवा भक्त बनकर करना चाहिए मालिक बनकर नहीं,
प्रभु का हो या परोपकार का कार्य उसके लिए जो भी दान दिया जाता है ,अर्पित किया जाता है फिर उस धन संपत्ति का उपयोग नहीं करना चाहिए ,दान देने से भगवान और महान बनता है व्यक्ति ,दान से शत्रुता का नाश होता है ,दान बोलकर नहीं देने से बीमारियां होती हैं, परेशानी आती है, प्रतिमा मंदिर ,शिखर के लिए दान देने वाले की महिमा का वर्णन करने के लिए सरस्वती भी समर्थ नहीं है, पूर्वजों ने जो भी मंदिर बनवाए थे हम उनकी सुरक्षा कर रहे हैं यह महत्वपूर्ण कार्य है ,दान से सम्मान मिलता है ,पूरी दुनिया में प्रसिद्धि फैलती है ,घर से जो पूजन की शुद्ध सामग्री लाता है वह विशेष पुण्य का अर्जन करता है ,
दानियों के गौरव का बखान दुनिया में होता है ,दान देने वाला दुनिया का सरताज होता है,दान देने वाला करोडो में एक होता है,दान देने वाले को पूरी दुनिया में सम्मान मिलता है ,दान देने से लालच का अंत हो जाता है,सिद्ध भगवान की जो निष्ठा पूर्वक पूजा करता है वह लोकपाल बनता दानियों के गौरव का बखान दुनिया में होता है ,दान देने वाला दुनिया का सरताज होता है,दान देने वाला करोडो में एक होता है,दान देने वाले को पूरी दुनिया में सम्मान मिलता है ,दान देने से लालच का अंत हो जाता है,सिद्ध भगवान की जो निष्ठा पूर्वक पूजा करता है वह लोकपाल बनता है, प्रथम स्वर्ग का कुबेर एक भव अवतारी होता है, लोकपाल का एक भेद कुबेर है,सिद्ध पूजा भव का अंत करने वाली है, सिद्धचक्र विधान कभी भी कर सकते हैं, करोड़ों वर्षों के उपवास का फल जन्म जन्मांतर में किया गया तप तथा करोड़ों दानो का फल यदि किसी को एक साथ मिल जाए तो वह नवीन मंदिर निर्माण करने वाले को मिलता है, संसार अंजुलिभर जल के सामान रह जाता है प्रतिमा विराजमान करने वाले का, पाप का नाश करने के लिए दान सर्वश्रेष्ठ माध्यम है, अपनी आमदनी का 25% 17% 10% दान करना चाहिए.
