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Only 5 of 26 E-commerce Giants Are Truly Dark Pattern-Free: LocalCircles | 26 में से सिर्फ 5 ई-कॉमर्स ही डार्क पैटर्न फ्री: लोकल सर्किल्स का दावा- 21 कंपनियों के प्लेटफार्म अब भी वसूल रहे हिडन चार्जेस

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नई दिल्ली8 मिनट पहले

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देश के 26 बड़े ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स ने अपने एप्स और वेबसाइट्स पर डार्क कलर्स का इस्तेमाल बंद करने की घोषणा की थी, लेकिन इनमें से सिर्फ 5 बिजनेस ही पूरी तरह से डार्क ट्रेंड्स फ्री हो पाए हैं।

अन्य 21 कंपनी के प्लेटफॉर्म पर अब भी कंज्यूमर्स से हिडन चार्जेज वसूले जा रहे हैं। यह दावा सिटीजन एंगेजमेंट प्लाउक्लॉवर्स ने अपनी स्टडी रिपोर्ट में किया है।

26 कंपनी ने CCPA को सेल्फ-डिक्लेरेशन के संस्थापक के रूप में नियुक्त किया

कंडजुमर अफेयर्स विभाग ने गुरुवार (20 नवंबर) को बताया कि 26 कंपनी ने ग्रेड-पार्टी जनरल स्टॉक एक्सचेंज (सीसीपीए) को सेल्फ-डिकलेरेशन लेटर के बाद सेंट्रल कंज्यूमर रिजर्वेशन लिमिटेड (CCPA) को बेच दिया है।

इनमें फैक्ट्री, मिंत्रा, जोमेटो और स्विगी जैसे मंच शामिल हैं। ये किराने का सामान, खाद्य भंडार, टोकरी, फैशन और सजावटी सामान की हैं। कंपनी ने ये डिक्लेरेशन अपनी वेबसाइट पर भी अपलोड किया है।

कंज्यूमर अफेयर्स विभाग ने इसे डिजिटल कंज्यूमर रेजीमेंट के लिए एक बड़ा कदम बताया था और कहा था कि बाकी कंपनियों को भी आत्म-शासन के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए।

कंपनी ने सिर्फ ड्रिप बिजनेस के ईशू को खत्म किया

लोकल मार्केटर्स ने इन प्लेटफॉर्म्स की तरफ से दिए गए दावे की पड़ताल की। 26 में से सिर्फ 5 स्टेज पर ही अपना दावा पेश करें। संस्था के संस्थापक सचिन तपेड़िया ने कहा कि ई-कॉमर्स संस्था ने सेल्फ-ऑडिट की घोषणा की है। हमारी जांच में इनमें से 90% मंच पर 13 तरह के डार्क पैटर्न से कोई ना कोई अब भी सक्रिय मिला।

‘ऑब्जेक्ट मीशो, इज़ माई ट्रिप, जेप्टो और बिग बॉस्केट ही डार्क कैरेक्टर-फ्री हैं।’ उन्होंने आगे कहा कि ज्यादातर प्लेटफॉर्म्स ने ड्रिप मार्केटिंग के ईशू को खत्म कर दिया है। तीसरे भर से ऐसा प्रतीत होता है कि ये गहरे रंग के चित्र मुफ़्त हो गए हैं। इन प्लैटफ़ॉर्म पर इलेक्शन एक्शन वाले डार्क पैटर्न अब भी हैं। मसलन, आप कोई भी उत्पाद लें तो उसमें दूसरी सेवा भी जुड़ जाती है। एक और सेवा जुड़ाव से एक्स्ट्रा चार्ज लग जाता है।

किन 26 कंपनी ने खुद को डार्क एडिटिंग से मुक्त कराया?

CCPA को मिले डिकलेरेशन लेटर्स के मुताबिक, 26 स्टेज्स ने जीरो डार्क कलर्स पर अपनी साइट्स होने की पुष्टि की है।

3 महीने में सेल्फ डिक्लेरेशन सब्मिटिंग को कहा गया था

डिपार्टमेंट ऑफ कंज्यूमर अफेयर्स ने जून 2025 में एक एड डिमांडरी रिलीज की थी, जिसमें ई-कॉमर्स कंपनी को 3 महीने के अंदर सेल्फ-ऑडिट करने और डिकेलेशन सबमिट करने की बात कही गई थी।

नेशनल कंज्यूमर नॉमिनेटर (एनसीएच) के माध्यम से सोशल मीडिया कैमपैन, इंफॉर्मेवेटिव वीडियोज और वर्कशॉप्स चलाए गए, ताकि कंज्यूमर्स डार्क टूरिस्ट्स की पहचान और शिकायत कारा आकर्षक हो।

सीसीपीए ने इसे एक मिसाल बताया है और बाकी डिजिटल प्लेयर्स से भी आदर्श ही कहने को कहा है। अगर कोई कंपनी डेडलाइन मिस करती है तो रेगुलेटरी एक्शन हो सकता है।

डार्क स्टार्स फ्री प्लेटफ़ॉर्म से कंज्यूमर्स को क्या फ़ायदा होता है

अभी ऑर्किथ ने अपने मठ से ये वादा किया है कि वो डार्क टूर्स की सुविधा नहीं है, लेकिन आने वाले समय में सरकार इसे मंजूरी देकर लागू भी कर सकती है। इससे कंजुमर्स को अब शॉपिंग ऐप्स का इस्तेमाल करने में समय कम ट्रिक्स का सामना करना पड़ता है, जिससे सेफ और ट्रांसपेरेंट एक्सपीरियंस मिलते हैं।

विभाग ने कहा कि यह अभियान डिजिटल कंज्यूमर टाउनशिप को मजबूत करेगा। भविष्य में और भी उद्योगों में शामिल हैं। कंजुमर्स को डार्क ट्रैवर्स के बारे में एजुकेशनल प्लानिंग से ये भी बताएं कि डार्क ट्रैवर्स क्या होते हैं और कैसे पकड़े जाएं।

गहरे रंग के चित्र क्या हैं?

डार्क ट्रैवर्स वो ट्रिक्स हैं, जो ऑनलाइन शॉपिंग के दौरान उपभोक्ताओं को अनाकर्षक बनाते हैं। जैसे कि अर्न्सेनी ने निर्माता बनना शुरू कर दिया, जहां लिखा था ‘अभी खरीदो अन्यथा स्टॉक खत्म हो गया’, या स्क्रैप से कार्ट में एक्स्ट्रा आइटम का सामान कर देना। 2023 में प्रिवेंशन और रेगुलेशन ऑफ डार्कर्स के लिए नोटिफ़ाई की गई गाइडलाइंस में 13 ऐसे डायरेक्टर्स को बैन कर दिया गया है।

इनमें फोल्स आर्सेन्सी, बास्केटबॉल स्नाइकिंग, कन्फर्म शेमिंग, फ़ोर्ड एक्शन, सब्स लीडर ट्रैप, रियाल्टार इंटरफेरेंस, बेट एंड स्विच, ड्रिप ग्रैमिंग, डिसैग एलिजिशंस एड्स, नेगिंग, ट्रिक वर्डिंग, एसएएएस बिलिंग और रोग मैलवेयर शामिल हैं।

ये ट्रिक्स कंजूमर्स को अनचाहे प्रोडक्ट्स या सब्सक्रिप्शन में फंसने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। कंज्यूमर रिवोल्यूशन एक्ट 2019 के तहत ये गाइडलाइंस 30 नवंबर 2023 को लागू किया जाएगा, ताकि डिजिटल मार्केट में ट्रांसपेरेंसी आए।

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