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A 10th-grade student committed suicide at a metro station. | दिल्ली मेट्रो स्टेशन से कूदकर 10वीं के बच्चे का सुसाइड: पिता का आरोप- टीचर्स प्रताड़ित कर रहे थे; रैगिंग-बुलिंग स्टूडेंट सुसाइड का चौथा सबसे बड़ा कारण

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11 मिनट पहले

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दिल्ली के एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ने वाले 16 साल के लड़के की मंगलवार को मृत्यु हो गई। वो अशोक पैलेस इलाके के सेंट कोलंबिया स्कूल में टोकरा था।

छात्र ने एक शहीद नोट भी जारी किया है जिसमें उसने लिखा है कि उसके अंगदान कर और उसकी पीड़ा को किसी भी बच्चे को नहीं मिलना चाहिए।

दूसरी ओर गुरुवार को सेंट कोलंबिया स्कूल के सामने पेस्टे के माता-पिता का प्रदर्शन हुआ। इसमें स्कूल के दूसरे छात्र भी शामिल थे।

पीड़ित ने FIR भी दर्ज कराई है. उनका आरोप है कि बच्चे को स्कूल में कई टीचर्स ने परेशान किया, जिसकी वजह से वो काफी लंबे समय तक मानसिक तनाव में रहा।

मेट्रो स्टेशन पर किया गया निधन

16 साल की पीड़िता 10वीं कक्षा की छात्रा थी। मंगलवार सुबह वो घर से ड्रामा क्लब के लिए निकला था। दोपहर करीब 2.34 मिनट पर उन्होंने दिल्ली के राजेंद्र प्रसाद मेट्रो स्टेशन के मंच से सबसे व्यस्त लगा दिया। छात्र को तत्काल बीएलके अस्पताल के पास ले जाया गया, जहां दार्शनिकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

छात्र ने एक आत्मघाती नोट भी निकाला। इसमें कुछ टीकर्स पर नाराजगी जताने और मानसिक प्रताड़ना के आरोप हैं। नाश्ते के पिता ने कहा कि बेटे को स्कूल के शिक्षकों ने महीनों तक डांटा।

पिता ने कहा, ‘उसने मुझे और उसकी मां को किर्स को हर छोटी-छोटी बात सिखाई थी और उन्हें प्रोत्साहित किया था।’ कई बार इन टीचर्स की याचिका भी आई लेकिन कोई फ़ायदा नहीं हुआ। हमने भी इसलिए कोई कड़ा कदम नहीं उठाया क्योंकि उसके 10वीं के उदाहरण आ रहे थे। हमने उनसे यह भी कहा कि एग्ज़ामेट्स के बाद उनके कारोबारी दूसरे स्कूल में चले गए।’

ड्रामा क्लास के बाद हुई हत्या

बच्चे के पिता का कहना है कि डांस क्लास के दौरान कुछ ऐसा हुआ जिससे वह बहुत परेशान हो गई और उसने यह कदम उठा लिया। पिता ने कहा, ‘ड्रामा क्लास के दौरान वो फ्रीकर गिर गईं। टीचर ने उन्हें पूरी क्लास के सामने झटका दिया और कहा कि वो ओवरएक्टिंग कर रहे हैं।’

बच्चे के कुछ क्लासमेट्स ने उसे बताया कि एक टीचर ने उसे प्लास्टिसिटी दे दी या उसके माता-पिता को स्कूल बुला लिया। ये सिर्फ उसके साथ नहीं हो रहा था. उसकी क्लास के 2-3 दूसरे दोस्त को भी यही सब सहन करना पड़ रहा था।

‘सोरी भैया, मैंने आपसे अच्छी तरह की बात नहीं की।’

घटना के समय बच्चे के माता-पिता महाराष्ट्र के कोल्हापुर गये थे। मंगलवार दोपहर 2:45 बजे उन्हें घटना के बारे में पता चला।

शहीद नोट में उन्होंने लिखा,

‘सोरी भैया, मैंने आपसे बदतमीजी से बात की। सॉरी मैडम, मैंने पहले भी कई बार आपका दिल जीता था, ये बस आखिरी बार है।’

10 साल में 70% से ज्यादा की मौत का मामला

एनसीआरबी की रिपोर्ट के मुताबिक, 2014 से 2023 के बीच हत्या के मामलों में 72.9% तक की बढ़ोतरी हुई है। इसी के साथ पिछले दशक में यह तीसरी बार है जब कैदी की मौत के मामले इस तरह सामने आए हैं।

2015 में 900 लापता मृतकों के मामले थे। साल 2020 में 2,100 सबसे ज्यादा बच्चों की मौत हुई। यह चित्र 2022 में थोड़ा कम जरूर हुआ लेकिन 2023 में फिर 848 मृतकों का विवरण दर्ज किया गया।

‘बच्चों को फेलियर हैंडल करना सिखायाते ही नहीं’

मप्र मृतक प्रिवेंशन टास्क फोर्स के सदस्य और साइकैट्रिस्ट डॉ. सत्यकांत रैना ने कोटा में हो रहे गुप्तचर विशेषज्ञ को लेकर कहा, ‘किसी का भी आत्महत्या का कोई एक कारण नहीं होता। वही उदाहरण सभी बच्चे दे रहे हैं। ऐसे में मृतकों के लिए मिले-जुले कारक जिम्मेदार होते हैं। इसमें जेनेटिक कारण, सामाजिक कारण, पिता-माता का निरीक्षण, शिक्षा तंत्र सब शामिल है।’

डॉ. छात्र कहते हैं कि कहीं न कहीं हम बच्चों को ये सिखाया में नाकामयाब हो जाते हैं कि स्ट्रेस, रिजेक्शन या फेलियर से कितना नुकसान होता है। आज बच्चे को लगा कि उसकी शैक्षणिक उपलब्धि उसकी शैक्षणिक उपलब्धियों से भी बड़ी है। बच्चे की तैयारी रिहाई के लिए तैयार नहीं है, जीवन वापसी के लिए तैयारी है। सोसाइटी ने वैली वैली को बहुत ज्यादा महिमामंडित कर दिया है, जिसकी वजह से बच्चे को यह महसूस होता है कि मैं अभी भी पूरी तरह से हो जाऊंगा जब कोई एग्जॉम क्रैक कर लूंगा।

कोई उदाहरण 14-16 लाख कागजात दे रहे हैं लेकिन सीटें सिर्फ कुछ हजार हैं। ऐसे में सभी जानते हैं कि इसमें सिलेक्शन ना होने वाले बच्चों का नंबर सबसे ज्यादा रहता है। लेकिन फेलियर से डिलिवरी करने के लिए बच्चों को कोई तैयारी ही नहीं है। बाल सभा में मोटिवेशन लेक्चर देने से, काउंसलर लगाने से, कोई मूवी दिखाने से कुछ नहीं होगा। पूरा सिस्टम पर काम करना होगा।

भारत में ऑटोमोबाइल्स की रोकथाम के लिए सरकार ने बनाए ये नियम

1. मेंटल स्कॉर्पियो अधिनियम, 2017

इस अधिनियम के अनुसार, मानसिक रूप से प्रशिक्षित व्यक्ति को इसकी खुराक लेने और गरिमा के साथ जीवन जीने का पूरा अधिकार है।

2. एंटी रैगिंग मेजर्स

सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार, रैगिंग की याचिका पर सभी शिक्षण संस्थानों में पुलिस के पास एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। वर्ष 2009 में हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूट्स में रैगिंग की कहानियों पर रोक के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने यूजीसी द्वारा रेगियोलॉजी जारी की थी।

3. आर्किटेक्चर सिस्टम

छात्रों की एंजाइटी, स्ट्रेज़, होमसिकनेस, फ़ेल होने के डर जैसे प्रश्नों के लिए यूजीसी ने 2016 में यूनिवर्सिटीज को स्टैटिक सिस्टम सेट-अप करने को कहा था।

4. शहीद प्रिवेंशन बॉय निमहंस, एसपीआईएफ के लिए गेटीपर्स प्रशिक्षण

NIMHANS यानी नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरोसाइंस एंड SPIF यानी मेडिकल इंस्टीट्यूट प्रिवेंशन इंडिया फाउंडेशन इस प्रशिक्षण को संचालित करता है। इसके जरिए गेटकीपर्स का एक नेटवर्क तैयार किया गया है जो कि जानलेवा लोगों की पहचान करा सकता है।

5. एनईपी 2020

टीचर्स स्टूडेंट की सोशियो-इमोशनल लर्निंग और स्कूल सिस्टम में पार्टिसिपेशन पर ध्यान दें। साथ ही तकनीशियनों में सामाजिक श्रमिक और काउंसलर भी होने चाहिए।

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