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Inhuman punishment for reaching school 10 minutes late | 10 मिनट देरी से स्‍कूल पहुंचने पर अमानवीय सजा: क्‍लास 6 की अंशिका से स्‍कूल बैग के साथ कराए 100 सिटअप्‍स; इलाज के दौरान मौत

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8 मिनट पहले

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महाराष्ट्र के पालघर जिले के एक निजी स्कूल में कक्षा 6 के शिलान्यास खंडिका की 15 नवंबर को मृत्यु हो गई। ‍पिछला पिछला एक सगुप्ताह से अस्पताल में था। असल में एक सगुप्ताह से पहले उसे 10 मिनट की देरी से यात्रा पर डॉक्युमेंटल में सीटअप यानी उठक-बैठक लगाने की सजा दी गई थी। इलेक्ट्रानिक की मां का कहना है कि उनकी बाद में उनकी बेटी भी नहीं पा रही थी। ऑक्सिजन की मौत के बाद प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

बढ़िया कूल बैग के साथ 100-100 उठक-बैठक

13 साल की अंशिका गौड़ वसई के सातिवली में स्थित श्री हनुमत स्कूल में पढ़ती थी। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के सदस्यों के अनुसार, 8 नवंबर को अंशिका और अन्य 4 साथियों के अनुसार 10 मिनट की देरी से स्कूल क्षेत्र थे। हमारी सज़ा के तौर पर 100-100 उठक-बैठक कराई गई।

अंशिका की मां का आरोप है कि उनकी बेटी की हत्या उसके टीचर ने ही की थी। स्कूल बैग पीठ पर 100 उठक-बैठक करने के बाद बेटी की हालत खराब हो गई। उसके पेट और पीठ में असहनीय दर्द हो रहा था और वो उठ भी नहीं पा रही थी, जिससे उसे क्लिनिक ले जाना पड़ा।

टीचर ने कहा- अभी मौत की वजह साफ नहीं

वसई के मनसे नेता सचिन मोरे ने बताया कि अंशिका को पहले कुछ स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें हुईं, फिर भी उन्हें ऐसी सजा दी गई। स्कूल के एक टीचर ने कहा, ‘यह ट्रैक पता नहीं है कि इस बच्चे ने असल में कितनी उठक-बैठक की जगह बनाई थी।’ यह भी निश्चित नहीं है कि उसकी मौत का कारण यही सज़ा थी या कुछ और।’

वास्तुशिल्प का भूकंप, मामले की जांच शुरू

पूर्व की मौत के बाद अंतिम संस्कार में गुस्तासा है। खंड शिक्षा अधिकारी पांडुरंग गालांगे ने मामले की जांच की पुष्टि की है। उन्होंने कहा, ‘जांच से ही पता चल गया कि मौत का असली कारण क्या है।’ अब तक इस मामले में कोई पुलिस शिकायत दर्ज नहीं हुई है।

अंतिम की मौत के बाद बड़ी साजिश में लोग सड़कों पर जमा हो गए।

अंतिम की मौत के बाद बड़ी साजिश में लोग सड़कों पर जमा हो गए।

मीडिया से बात करते हुए अंशिका की मां ने कहा, ‘सजा मिलने के बाद बेटी की हालत तेजी से बदल गई।’ उसे सिर झुकाया और पीठ में तेज दर्द हुआ और उठ भी नहीं पा रही थी।’ उन्होंने कहा कि जब वे अपनी बेटी की समस्या लेकर टीचर्स से बात करते थे, तो टीचर्स को सजा सुनाई जाती थी, उन्होंने कहा था कि प्रियकूल में सख्त निर्देश जरूरी है।

अंशिका की मां ने कहा, ‘मेरे टीचर्स ने कहा कि सजा देने का मतलब यह नहीं है कि बच्चों को बैग के साथ उठक-बैठक करने पर मजबूर किया जाए।’ ‘मेरी बेटी को दी गई ‘घोर सजा’, वजह से हुई उसकी मौत।’

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