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- सचिन कांबली के साथ खेला क्रिकेट, फर्स्ट क्लास में लगाए 30 शतक
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साल 1988 में हैरिस शील्ड टूर्नामेंट में सचिन तेंदुलकर और विनोद कांबली ने 664 साल की उम्र में मैड्रिड की चैंपियनशिप में भाग लिया था। इस गैलरी ने हर जगह जगहें इकट्ठी कीं। लेकिन सचिन और कांबली के बाद अगले बैटर जो पैडअप करके बैठे थे, वो थे अमोल मजूमदार, उनका नंबर कभी नहीं आया। आगे भी यही हुआ, इंटरनेशनल क्रिकेट में उनका कभी नंबर ही नहीं आया।
अब वे पहले कोच बने हैं, प्रोलोमो अवाज में भारतीय विमेंस क्रिकेट टीम ने अपना पहला विश्व कप जीता है।
अपने 21 साल के क्रिकेट खिलाड़ियों में वो कभी भी भारतीय टीम के लिए नहीं खेल पाए। साल 2014 में उन्होंने क्रिकेट से संन्यास ले लिया। लेकिन अब एक हेड कोच के रूप में वह महिला टीम को विश्व चैंपियन बना चुकी हैं।

सचिन-काबली के कोच आचरेकर से क्रिकेट ट्रेनिंग ली
मजूमदार को उनके पिता ने क्रिकेट से बनाया था। वो शुरुआती दिनों में शिवाजी पार्क में अभ्यास करते थे। इस दौरान उन्होंने सचिन, कंबली और बिल्ला आमरे के साथ क्रिकेट खेला।
मजूमदार ने बी.पी.एम. में शुरुआत की। हाई स्कूल में पढ़ाई की, लेकिन अपने कोच रमाकांत आचार्य के दर्शन के बाद उन्होंने शारदाश्रम विद्या मंदिर स्कूल में दाखिला लिया। इसी स्कूल में मजूमदार की साइंटिस्ट साकीत से हुई, जो कोच आचार्य ट्रेनिंग ले रहे थे।
प्रथम श्रेणी प्रारंभ में विश्व रिकॉर्ड बनाया गया
अमोल मजूमदार ने 19 साल की उम्र में 1993-94 के सीज़न में मुंबई में अपने फर्स्ट क्लास क्रिकेट करियर की शुरुआत की थी। फरीदाबाद में हरियाणा के खिलाफ क्वार्टर फाइनल में उनका पहला रणजी मैच था। उन्होंने अपनी पहली पारी में 260 रन बनाए, जो उस समय फर्स्ट क्लास क्रिकेट में डेब्यू पर वर्ल्ड रिकॉर्ड था।
हालाँकि, अभी स्कोर डेब्यू मैच में सबसे बड़ा व्यक्तिगत मेक का वर्ल्ड रिकॉर्ड बिहार के साकिबुल गनी के नाम है। उन्होंने 18 फरवरी, 2022 को मिजोरम के खिलाफ बिहार की ओर से खेलते हुए 341 रन बनाये थे.
‘भविष्य का सिद्धांत’ कहा जाता था
1990 और 2000 के दशक में अमोल मजूमदार मुंबई रणजी टीम के सबसे भरोसेमंद खिलाड़ी बन गए थे। ईसाई धर्म के शुरुआती दिनों में उन्हें ‘भविष्य का अनुयायी’ कहा जाता था। वो 1994 के इंग्लैंड दौरे पर भारत की अंडर-19 टीम के उप-कप्तान थे। उन्होंने राहुल द्रविड़ और सौरव विनोद के साथ इंडिया ए के लिए भी खेला था।
डोमेस्टिक में 30 शतक, 11 हजार रन बनाए
उस दौर में भारतीय बैटिंग लाइनअप इतना मजबूत था कि डोमेस्टिक क्रिकेट में 30 शतक और 11 हजार से ज्यादा रन, मुंबई के 8 स्टार खिलाड़ी (एक मजबूत कप्तान) के साथ टीम वाले खिलाड़ी अमोल मजूमदार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मौका नहीं मिला।
सितंबर 2009 में जब मजूमदार को मुंबई टीम में शामिल करने के लिए शाहिद मुश्ताक अली टी20 टूर्नामेंट के लिए नहीं चुना गया तो उन्होंने टीम में शामिल होने का फैसला किया। इसके बाद अक्टूबर 2012 में 2 साल के लिए आंध्र प्रदेश की रणजी टीम जुड़ी। फिर साल 2014 में युवाओं को मौका देने के लिए उन्होंने क्रिकेट के सभी संतों से संन्यास ले लिया।

मजूमदार ने अपने रनजी करियर में 48.13 के औसत से कुल 11,167 रन बनाए हैं, जिसमें 30 शतक और 60 शतक शामिल हैं।
किस्मत में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता नहीं थी
पूर्व क्रिकेटर डेब्यू जाफ़र एक टॉक शो में शामिल हैं, ‘उस दौर में बहुत कम अपोर्च्युनिटी डेटिंग थी। रणजी ट्रॉफी में अगर आप अच्छे खिलाड़ी रन बना रहे थे, तो ट्रॉफी ट्रॉफी में मौका था। दिलीप ट्रॉफ़ी ज़ोनल थे, जिनमें नॉर्थ ज़ोन, साउथ ज़ोन, वेस्ट ज़ोन और साउथ ज़ोन होते हैं। अगर आप दिलीप ट्रॉफी में रन बना रहे थे तो आपको ईरानी ट्रॉफी में मौका मिलता था, जिसमें रणजी ट्रॉफी और इंडिया ए टीम के बीच मैच होता है। अगर आपने ईरानी ट्रॉफी में अच्छा खेला या रन बॉक्स थे तो ओवरसीज टीम इंडिया ए के लिए आने का मौका था।
अमोल बहुत अनफोरचुनेट थे कि उनके कभी भी मैचेज में रन नहीं बने। शायद किस्मत में कोई अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता नहीं थी।’
‘चक दे इंडिया’ की ‘कबीर खान’ से तुलना हो रही है
टीम इंडिया का कप जीतने के लिए उनकी शायद फिल्म ‘चक दे इंडिया’ के ‘कबीर खान’ वाले पल जैसी ही होगी। साल 2007 में इस फिल्म में कबीर खान का रोल शाहरुख खान ने निभाया था।
फिल्म में कबीर खान हॉकी टीम को अपने खिलाड़ी में विश्व चैंपियन नहीं बने थे। लेकिन महिला टीम का कोच बनने के बाद उन्होंने टीम को वर्ल्ड चैंपियन बनाने का सपना पूरा कर लिया था। अब अमोल मजूमदार रियल लाइफ के असली कबीर खान बन गए हैं।
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