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- गौतम नवलखा पुणे एल्गार परिषद केस अपडेट; सुप्रीम कोर्ट | भीमा कोरेगांव हिंसा
नई दिल्लीकुछ ही क्षण पहले
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गौतम नवलखा की जमानत के मामले में जस्टिस एसवीएन भट्टी की बेंच ने सुनवाई की है।
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (14 मई) को महाराष्ट्र के एक्टिविस्ट गौतम नवलखा को जमानत दे दी है। जस्टिस न्यायमूर्ति सुंदरेश और जस्टिस एसवीएन भट्टी की बेंच ने कहा- उच्च न्यायालय के जमानत आदेश पर राज्य की अवधि बढ़ाने का कोई कारण नजर नहीं आ रहा है। पूरे केस की सुनवाई ख़त्म होने में कई साल लग जायेंगे।
असलहा, नवलखा पर 2017 में पुणे में एल्गार काउंसिल के आयोजित कार्यक्रम में अलोकतांत्रिक भाषण का आरोप है। इसके कारण भीमा-कोरेगांव में हिंसा भड़क उठी थी। नवलखा को बॉम्बे हाईकोर्ट के ख़िलाफ़ ज़मानत दी गई थी, जिसके लिए एनआईए ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे होइकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी।
सुप्रीम कोर्ट ने आज जमानत याचिका में कहा कि पूरे मामले पर विस्तार से चर्चा की गई है कि हम उच्च न्यायालय के फैसेल पर स्टे लगाने का कोई औचित्य नहीं है। नवलखा को ज़मानत दी गई है, लेकिन हाउस अरेस्ट के दौरान सिक्योरिटी के लिए 20 लाख रुपये चुकाने पड़े।
असल में, बिल्डर के बाद हाउस अरेस्ट की मांग नवलखा ने ही की थी। इसलिए कोर्ट ने उन्हें ही बिल की मंजूरी के लिए कहा है। एनआईए ने 9 अप्रैल को हुई पिछली तिमाही में नवलखा से 1 करोड़ 64 लाख रुपये के भुगतान की मांग की थी।

भीमा-कोरेगांव युद्ध के 200वें वर्षगांठ समारोह के दौरान भयंकर हिंसा हुई
पहले किया था 10 लाख का भुगतान
एनआईए के वकील ने पिछली समीक्षा में कहा था कि नवलखा के आवास पर बहुत से समय पर पुलिस बल तैनात किया गया था। इसपर नवलखा के वकील ने कहा कि हमें भुगतान करने में कोई परेशानी नहीं है। लेकिन, भुगतान में पैसा एक बड़ा भुगतान है। उन्होंने आगे कहा कि नवलखा से पहले 10 लाख का भुगतान कर दिया गया था लेकिन अब वो इससे बच रहे हैं।
ये है पूरा मामला
महाराष्ट्र के पुणे में साल 2017 में एल्गर काउंसिल के आयोजिट कार्यक्रम में मराठा चर्च के बाद भीमा-कोरेगांव में हिंसा भड़की थी। पुलिस का यह भी दावा है कि यह प्रोग्राम के प्रोग्रामरों से संबंधित है।
इस हिंसा के बाद जनवरी 2018 में गौतम नवलखा के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था, लेकिन गौतम नवलखा को बॉम्बे हाई कोर्ट ने दिसंबर 2023 में जमानत दे दी। एनआईए की समीक्षा में SC ने नवलखा की जमानत पर रोक लगा दी थी।
जेल भेजे जाने के बजाय नवलखा ने खुद को हाउस रेस्टोरेन्ट जाने की मोनिका दी थी। उन्होंने खुद के दावे से स्वास्थ्य का नुकसान किया था। SC ने 10 नवंबर 2022 को नवलखा को 1 महीने तक हाउस अरेस्ट जाने को मंजूरी दी थी। नवलखा में हाउस अरेस्ट के दौरान 24 घंटे महाराष्ट्र पुलिस की छापेमारी चल रही थी।
नवलखा के खिलाफ 2018 में मामला दर्ज हुआ था
13 सितंबर को हाई कोर्ट ने भीमा-कोरेगांव हिंसा मामले में गौतम नवलखा के खिलाफ केस दर्ज करने से इनकार कर दिया था, हालांकि कोर्ट ने तीन हफ्ते तक नवलखा पर प्रतिबंध लगा दिया था। पुणे पुलिस ने एक दिसंबर, 2017 को भीमा-कोरेगांव में हुई हिंसा के मामले में जनवरी 2018 में मामला दर्ज किया था। इस मामले में नवलखा के साथ वरवरा राव, डेवेलेंट फ़ेरा, विवरण गोंसालविज़ और सुधा भारती भी अधूरे पाए गए थे।

गौतम नवलखा के रिहा होने की तस्वीर।
इन मजदूरों के साथ मिली राहत
70 साल के गौतम नवलखा ने कोर्ट को बताया था कि वह स्कैल्प कैंसर की एलर्जी और दांतों की समस्याओं से पीड़ित हैं और वह संदिग्ध के परीक्षण कराना चाहते थे। कोर्ट ने उन्हें राहत देते हुए कहा कि कुछ प्रतिबंध लगाए गए थे, जिसमें कहा गया- नवलखा किसी से बातचीत के लिए मोबाइल, पीसी, कंप्यूटर का उपयोग करना जरूरी नहीं है। साथ ही कोई भी अवैध गतिविधि शामिल नहीं होगी। वे न मीडिया से बात करेंगे और केस से जुड़े लोगों और गवाहों से भी संपर्क नहीं करेंगे। पुलिस की जांच में एक दिन में केवल एक बार मोबाइल पर बात करने का मिशन दिया गया है।
