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- भारतीय विज्ञापन उद्योग के ‘एड गुरु’ पीयूष पांडे का निधन
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भारतीय विज्ञापन जगत के दिग्गज और पद्मश्री से सम्मानित पीयूष पैंडेवल का गुरुवार 23 अक्टूबर को निधन हो गया। वे 70 साल की उम्र में मुंबई में अंतिम सांस ली। उनकी बहन तृप्ति पैंडेज़ ने स्टालिन पर पोस्ट कर इसकी जानकारी दी।
एडवर्टाइजमेंट इंस्टीट्यूट का ‘एड गुरु’ माने जाते थे
पीयूष को भारतीय एडवर्टाइजमेंट इंस्टीट्यूट का ‘एड गुरु’ माना जाता था। पीयूष ने साल 1994 में ‘पल्स एस्टोनियाई अभियान- टू स्टार्स’ का नारा दिया था। साथ ही 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नारे ‘अबकी बार मोदी सरकार’ लिखा था।

पिवसव के पिता एक बैंक में काम करते थे। पीयूष के नौ भाई-बहन थे, जिनमें 7 बहनें और दो भाई शामिल थे। उनके भाई-बहन फिल्म निर्माता प्रसून पैंडेस और सिंगर-एक्ट्रेस इला अरुण शामिल हैं। उनके पिता राजस्थान स्टेट कोमोबिलिटी बैंक में रेलवे थे।

विज्ञापन जगत में आने से पहले उन्होंने कई अलग-अलग सेक्टर में काम किया। इनमें क्रिकेट, चाय चखना (चाय चखना) और मसाले शामिल हैं। वर्ष 2018 में कई पुराने खिलाड़ी भी खेले थे।
मशहूर वो क्रिकेटर कीर्ति आजाद और अरुण लाल के साथ दिल्ली यूनिवर्सिटी के लिए पहुंचे थे। उन्होंने रणजी टूर्नामेंट में भी खेला था।

पीयूष (दाएं से दूसरे) ने रणजी ट्रॉफी में राजस्थान का प्रतिनिधित्व भी किया था।
एडवरटाइजिंग कंपनी ओगिल्वी इंडिया से कारोबार शुरू हुआ
पीयूष ने 1982 में ओगिल्वी एंड माथर इंडिया (ओगिल्वी एंड माथर इंडिया) में एक ट्रेनी ई-कॉमर्स वेबसाइट पर अपने करियर की शुरुआत की। उस समय उनकी उम्र 27 साल थी। 6 साल बाद वो कंपनी के कॉस्टेबल डिपार्टमेंट में चले गए।
अपनी प्रतिभा के दम पर वो जल्द ही ओगिल्वी इंडिया के स्टूडेंट डायरेक्टर, फिर नेशनल स्टूडेंट असिस्टेंट और अंततः ऑल इंडिया के स्टूडेंट ओगिल्वी इंडिया के स्टूडेंट बने। 2023 में उन्होंने एक्जीक्यूटिवा लिटरेचर पद से हटकर सलाहकार की भूमिका निभाई।

वर्ष 1986 में वर्ष 1986 में वर्ष 2007 में सनलाइट रेज़िका के लिए पहला प्रिंट विज्ञापन लिखा गया था।
1987 में सस्ते सस्ते सैक्सेस लूना मोपेड के विज्ञापन से मिली। इसका जिंगल था- ‘चल मेरी लूना’। हालाँकि उन्हें राष्ट्रीय पहचान साल 1988 में मिली। जब उन्होंने लोकसंचार परिषद के लिए गीत ‘मिले सुर मेरा’ लिखा।
वर्ष 2020 के 5 यादगार जिंगल
- फेविकोल (फेविकोल)- फेविकोल का जोड़ है मजबूत, टूटेगा नहीं’
- कैडबरी -‘कुछ खास है, जिंदगी में’
- एशियन पेंट्स – ‘हर घर, कुछ कहा जाता है’
- हच (वोडाफोन) – ‘व्हेयरवेर यू गो, हच इज़ विद यू’
- पल्सर ऑर्केस्ट्रा अभियान – ‘दो ड्रम जिंदगी की’
पॉलिटिकल स्लोगन- ‘अबकी बार, मोदी सरकार’ गढ़ा
साल 2014 में पीएम नरेंद्र मोदी के डिजाइन को डिजाइन करने में 50 दिन का समय लगा था। उन्होंने एक टीवी इंटरव्यू में बताया था कि इस लैपटॉप के पीछे का अध्ययन क्या था।
मोदी की तस्वीर और चेहरे पर फोकस रखा गया था। उन्होंने ‘अबकी बार मोदी सरकार’ का नारा दिया। यह पंक्ति नाममात्र की बात करने की भाषा में लिखी गई थी, जिससे लोग आसानी से जुड़कर उपयोगी बन गए।

‘अबकी बार मोदी सरकार’ में डिपेंडेंट में पीयूष की टीम ने 50 दिन में 200 से ज्यादा टीवी कॉमर्शियल, 100 से ज्यादा प्रिंट रेडियो एड और हर रात 100 से ज्यादा प्रिंट वाले एलबम जारी किए।
2 किताबें भी लिखीं
पैगवान 40 साल से सबसे ज्यादा समय तक विज्ञापन बनाने वाली कंपनी ओ गिल्वी इंडिया से जुड़े रहे। इस दौरान उन्होंने ‘पांडेमोनियम: पीयूष पांडे ऑन एडवरटाइजिंग (पांडेमोनियम: पीयूष पांडे ऑन एडवरटाइजिंग) और ‘डी स्केल ऑफ ए ब्रांड: एशियन पेंट (द मेकिंग ऑफ ए ब्रांड: एशियन पेंट्स)’ जैसी किताबें लिखीं।
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