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- हिंसा फैलने से पहले 2023 में मणिपुर में 2,480 अवैध अप्रवासियों का पता चला: सीएम बीरेन सिंह
इन्फाल2 मिनट पहले
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मुखर हिंसा से जुड़े 11 गंभीर मामलों की जांच जारी है। (फ़ैला चित्र)
2480 में हुई हिंसा से पहले अवैध हिंसा का पता चला था। यह जानकारी रविवार (12 मई) को मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने दी। उन्होंने कहा कि पिछले साल 3 मई को हिंसा भड़कने के बाद अवैध संपत्ति का पता लगाने के लिए कंपनी को बंद कर दिया गया था। सीएम ने आगे कहा कि कॉन्स्टैंट की कटाई और अवैध अप्रवासियों को लेकर सरकार चिंतित है।
सीएम ने बताया कि फरवरी 2023 में सदन की बैठक के बाद एक संसदीय समिति का गठन किया गया था। इसमें दो कुकी इंजीनियर लेटपाओ हाओकिप और नेमचा किपगेन ने हिस्सा लिया था। हाओकिप को अवैध आप्रवासियों की पहचान करने वाली समिति का प्रमुख बनाया गया था। इसी समिति ने 2,480 अवैध मूर्तियों का पता लगाया था।
बायो बिजनेस के लिए आप्रवासियों की पहचान
सीएम ने बताया कि चंदेल क्षेत्र में दसियों बायोटेक्नोलॉजी ली गई थी। इस दौरान 1,165 अवैध अप्रवासी पाए गए। वहीं, तेंगनाउपाल जिले के 13 जिले में 1,147 और चोरीचांदपुर में 154 अवैध अप्रवासी पाए गए। इसके अलावा शेष अवैध अप्रवासी कामजोंग जिले में पाए गए। कामजोंग जिले में आने वाले अतिरिक्त 5,457 अवैध प्रवासियों को शामिल नहीं किया गया है। उन्होंने आगे कहा कि 5,173 लोगों के जैव रसायन चले गए, जबकि 329 प्रवासी पड़ोसी देशों में स्थिति ठीक होने के बाद वापस लौट आए।

ये तस्वीरें पिछले चार महीने से जारी हिंसा की अलग-अलग घटनाओं की हैं।
कार्रवाई: 11 गंभीर मामलों की जांच कर रही है सी.बी.आई
मुखर हिंसा से जुड़े 11 गंभीर मामलों की जांच जारी है। पिछले साल मामले में सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रपति सरकार ने कहा था कि इस हिंसा से जुड़े 5,995 लोगों ने 6,745 लोगों को सजा दी है।
हिंसा के बाद 65 हज़ार से ज़्यादा लोगों को घर छोड़ दिया गया
विशेषज्ञों में अब तक 65 हजार से ज्यादा लोग अपना घर छोड़ चुके हैं। 6 हजार मामले दर्ज हैं और 144 लोगों की धोखाधड़ी हुई है। राज्य में 36 हजार सुरक्षाकर्मी और 40 आईपीएस तैनात हैं। पहाड़ी और घाटी दोनों में कुल 129 चौकियां स्थापित की गई हैं।
इम्फाल घाटी में मैतेई बहुलता है, ऐसे में यहां रहने वाले कुकी लोग आसपास के पहाड़ी इलाकों में बने कैंप में रह रहे हैं, जहां उनके समुदाय के लोग बहुसंख्यक हैं। जबकि, पहाड़ी अपने क्षेत्र के मैतेई घर से ठीक होकर इम्फाल घाटी में लोग बने हुए कैंपों में रह रहे हैं।

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कंपनियों की आबादी करीब 38 लाख है। यहां तीन प्रमुख समुदाय हैं- मैतेई, नागा और कुकी। मैताई ज्यादातर हिंदू हैं। नागा-कुकी ईसाई धर्म को मानते हैं। एसटी वर्ग में आते हैं। जापानी आबादी करीब 50% है। राज्य के करीब 10% क्षेत्र में इन्फाल घाटी मैतेई समुदाय बहुल है। नागा-कुकी की जनसंख्या करीब 34 प्रतिशत है। ये लोग राज्य के करीब 90% इलाके में रहते हैं।
कैसे शुरू हुआ विवाद: मैतेई समुदाय की मांग है कि उन्हें भी जनजाति का दर्जा दिया जाए। समुदाय ने इसके लिए डेमोक्रेट उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। कम्यूनिटी का विलय था कि 1949 में कम्युनिस्टों का भारत में विलय हो गया था। उन्हें सबसे पहले ट्राइब का ही लेबल मिला था। इसके बाद उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से सैक्सो की मैतेई को जनजाति जनजाति (एसटी) में शामिल कर लिया।
मैतेई का तर्क क्या है: मैतेई जनजाति का मानना है कि सबसे पहले उनके राजा को म्यांमार से कुकी विजय युद्ध के लिए बुलाया गया था। उसके बाद ये स्थायी निवासी चले गये। इन लोगों ने रोजगार के लिए जंगल केट और पहाड़ की खेती करना शुरू कर दिया। इन प्रयोगशालाओं का ट्रॉयंगल बन गया है। यह सब मेडिकल हो रहा है। अन्य नागा लोगों ने लड़ाई के लिए हथियार समूह बनाया।
नागा-कुकी विरोध में क्यों हैं: बाकी तीनों जनजाति मैतेई समुदाय को तटस्थता के विरोध में हैं। इसमें कहा गया है कि राज्य की 60 से 40 सीट पहले से मैतेई बहुल इंफाल घाटी में हैं। ऐसे में एसटी वर्ग में मैतेई को अनोखा मिलन से उनके अधिकार का बंटवारा होगा।
तृतीयक गुणांक क्या हैं: टीमों के 60 प्रतिनिधियों में से 40 नेता मैतेई और 20 सदस्य नागा-कुकी जनजाति से हैं। अब तक 12 CM में से दो ही जनजाति से रह रहे हैं।
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‘मणिपुर में हिंसा और लड़ाई एक साल होने वाली है।’ सरकार अब तक इसे नहीं रोकेगी। हम लोग डरकर जीतते हैं। परिवार को साथ नहीं रख पा रहे। बच्चों की पढ़ाई रुक गई है। बिजनेस बिजनेस है। कमाई की बात तो क्या उत्पादन। हम लोग 10 साल पीछे चले गए हैं। हर हाल में जी शराब, बस सरकार शांति करवा दे।’
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