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- पीएम नरेंद्र मोदी राहुल गांधी सार्वजनिक बहस चुनौती | लोकसभा चुनाव
नई दिल्लीकुछ ही क्षण पहले
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पूर्व जज बी मदन लोकुर, एपी शाह और पत्रकार राम नेपे ने मोदी और कांग्रेस नेता राहुल गांधी को सार्वजनिक रूप से चुनौती दी है। अतुल मोदी और राहुल के नाम एक पत्र लिखा है, जिसमें कहा गया है कि सार्वजनिक रूप से इस बात से चिंता है कि दोनों पक्षों से सिर्फ आरोप और सिद्धांत ही सुनने को मिले हैं, अब तक कोई सार्थक जवाब नहीं मिला है।
मदन बी लोकुर सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश, एपी शाह दिल्ली उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश हैं, जबकि एन राम वरिष्ठ पत्रकार और हिंदू के पूर्व एसोसिएट-इन-चीफ हैं। अपने पत्र में कहा गया है कि लोकतांत्रिक देश के गुण हमारी प्रतिष्ठा को दुनिया की नजर में रखते हैं। ऐसे में बीजेपी और कांग्रेस के शीर्ष नेताओं को गैर-पार्टी और गैर-व्यावसायिक मंच पर डिबेट करना चाहिए।
पूर्व जजों और पत्रकार ने इस पत्र में लिखा है पीएम मोदी और राहुल का नाम…

इस पत्र का पूरा विवरण पढ़ें…
इस पत्र में लिखा है कि हम भारत के नागरिक होने के नाते आपको ये पत्र लिख रहे हैं। हम अलग-अलग इलाकों में अपनी जिम्मेदारियां जाहिर करते हैं। हम आपके साथ एक प्रस्ताव रख रहे हैं, जो हमें लगता है कि किसी पार्टी की ओर से कोई प्रस्ताव नहीं है और जो सभी नागरिकों के हित में है।
18वीं लोकसभा के लिए लोकसभा चुनाव की प्रक्रिया पूरी हो गई है। रैलियों और भाषणों में धर्मनिरपेक्ष पार्टी भाजपा और मुख्य चर्च पार्टी कांग्रेस दोनों ने ही हमारे लोकतांत्रिक लोकतंत्र से जुड़े अहम प्रश्न पूछे हैं।
हमारे प्रधानमंत्री ने सबके सामने कांग्रेस को शून्य, धारा 370 और संपत्ति के कब्जे पर घेरा है। वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मोदी से संविधान, चुनावी बंधन, चीन के सवालों पर सवाल पूछे हैं और उन्हें सार्वजनिक बहस के लिए भी चुनौती दी है।
हमारा मानना है कि अगर कोई गैर-पार्टी और गैर-कॉमर्शियल मंच सार्वजनिक रूप से जनता के माध्यम से सीधे तौर पर हमारे नेताओं का पक्ष सुनेगी तो इससे जनता को फायदा होगा। बेहतर होगा कि पब्लिक न सिर्फ दोनों पक्षों के सवाल सुने बल्कि जवाब भी सुने। हमें लगता है कि यह हमारी सांस्कृतिक प्रक्रिया को दर्शाता है।
दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र होने के नाते सारी दुनिया हमारी ताकतों को गौरवान्वित कर रही है। ऐसे में ये सबसे ज्यादा सही रहेगा कि दोनों नेता पब्लिक डिबेट करें। ऐसा पब्लिक डिजिटल एक मिसाल बनता है, क्योंकि इससे न सिर्फ पब्लिक को सही जानकारी मिलती है, बल्कि स्वस्थ और जागती डेमोक्रेसी की छवि भी सबके सामने आती है।
यह पब्लिक डिबेट कहां होगी, कितनी देर की होगी, इसमें सवाल कौन पूछेगा और क्या रहेगा, यह पीएम मोदी और राहुल दोनों की सलाह तय की जा सकती है। यदि ये दोनों नेता मधुमेह के लिए नहीं आ सकते हैं, तो वे अपनी तरफ से किसी को भी नामांकित कर सकते हैं।
