नई दिल्ली4 मिनट पहले
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सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (9 मई) को कहा कि जेलों में भीड़भाड़ और राहत की समस्या का समाधान हो सकता है। कोर्ट ने कहा कि खुली या आधी खुली जेलों को जेल परिसर से बाहर काम करने और शाम को जेल में वापस आने का पद दिया जाता है।
जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा कि ओपन जेल जेल को समाज में थपथपाएं-मिलें और उनके साइकोलॉजिकल म्यूजिक म्यूजिक को भी कम करने में मदद करें। साथ ही दस्तावेज़ की वैधता में भी सुधार।
देश भर में हो खुली जेल का विस्तार – सर्वोच्च न्यायालय
जेल और कैद की स्थिति से जुड़ी एक फाइल में अदालत ने कहा कि राजस्थान ओपन जेल की व्यवस्था पर स्थिर दौर में अच्छी तरह से काम हो रहा है। कोर्ट चाहता है कि देश भर में खुली जेल का विस्तार हो।
हालाँकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में अदालत के माध्यम से अन्य अदालतों में चल रही जेल और हिरासत से जुड़े साझे मामलों में हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा।
सुनवाई के दौरान राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण (एनएएलएसए) की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि एजेंसी ने सभी राज्यों को लेकर जेल खोलने के बारे में अपने विचार रखे थे। जिस पर अब तक 24 राज्यों ने अपना जवाब भेजा है।
कोर्ट ने ई-प्रजनन आर्किटेक्चर की आवश्यकता पर दिया जोर
मामले में न्यायमित्र के तौर पर काम कर रहे वरिष्ठ वकील विजय हंसारिया ने लॉ अवेयरनेस की कमी का हवाला देते हुए कहा कि दोषियों को सूचित नहीं किया गया है कि वे कानूनी सेवा प्राधिकरण के माध्यम से अपीलीय अदालत में संपर्क करके अपने मामले से जुड़े हुए हैं। कमियों को दूर करवा सकते हैं और सजा से बचा सकते हैं।
हंसरिया के इस तर्क पर कोर्ट ने देश में यूनीफॉर्म ई-प्रिजन आर्किटेक्चर की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि ई प्रिजन आर्किटेक्चर इस तरह की समस्याओं से आसानी से जुड़ा जा सकता है।
अदालत ने एनएएलएसए के वकील और वरिष्ठ वकील विजय हंसारिया से मामले में आगे भी न्यायमित्र को अदालत की सहायता करने की पेशकश की है। मामले की अगली सुनवाई 16 मई को होगी।
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