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73 साल के PM मोदी को चुनावी अभियान में भारी बढ़त, कहां है विपक्ष? ऐसे कैसे टक्कर देगा I.N.D.I. अलायंस

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पीएम मोदी और राहुल गांधी- इंडिया टीवी हिंदी

छवि स्रोत: फ़ाइल फ़ोटो
मोदी और राहुल गांधी

लोकसभा चुनाव के तीन चरण का मतदान समाप्त हो गया है। चौथे चरण के चुनाव प्रचार में सभी आश्रमों ने अपनी पूरी रैली रखी है। सूची जहां एनडीए सरकार के कार्य पर प्रश्नचिन्ह लग रहा है। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके सहयोगी दल समेत भाजपा के नेता सरकार के 10 साल के विकास के लिए लेखा-जोखा लेकर जनता के बीच मौजूद हैं और लगातार देश के विकास को गति देने की सोच अपनी को भी जनता के बीच रख रहे हैं। ।। ऐसे में इस चुनाव में प्रधानमंत्री मोदी को चुनौती देने वाला नजर आ रहा है।

क्या कह रहे हैं सुपरमार्केट?

बेंचमार्क मोदी लगातार तीसरी बार सत्य सपोर्टकर अगली सरकार को हिला रहे हैं। बीजेपी और विजिटर की डिपार्टमेंट की संख्या को लेकर भविष्यवाणी की गई है। हर गंभीर बेंचमार्क इस बात पर सहमत है कि मोदी 3.0 के लिए इस चुनाव में नामांकन की घोषणा होनी है। इस चुनाव में इंस्टिट्यूशनल इंस्टिट्यूशन को शामिल करने के लिए सबसे पहले जनता के बीच अपने विचार लाना, लोगों के साथ संवाद आदि का प्रयास करना जरूरी है। लेकिन, इस चुनावी प्रचार में प्रचार के बीच से यह सब नदारद है।

तूफानी दौरों से लेकर पीएम मोदी ने बनाया सुपरमार्केट

दूसरी तरफ चुनाव की घोषणा के ठीक बाद मोदी ने मार्च में 9, अप्रैल में 68 और मई में 26 रैलियां की हैं। मोदी ने अब तक 24 से अधिक लोगों के साथ बातचीत में अपने रोबोटिक्स स्टार्टअप से समय निकाला है। वे क्षेत्रीय भाषाओं के चैनलों के साथ-साथ राष्ट्रीय चैनलों के विवरण भी देते हैं। इसके साथ ही मीडिया ने भी इंटरव्यू दिया है। पीएम मोदी की चुनावी घोषणा के बाद अब तक 21 रोड शो भी कर चुके हैं। इसके साथ ही लोग जुड़े रहने के लिए तीर्थयात्रियों और गुरुद्वारों की लगातार यात्राएं करने के साथ-साथ विशिष्ट लोगों और आम नागरिकों से भी मुलाकात कर रहे हैं।

चुनाव प्रचार से राहुल गांधी नदारद

वहीं, चुनावी सभा के सबसे बड़े नेता राहुल गांधी के प्रचार के तरीकों को देखें तो उनकी शुरू की गई ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ चुनाव की घोषणा 17 मार्च को खत्म हो गई। इसके बाद 8 मई तक राहुल गांधी ने 39 बाबाओं का खुलासा किया, जिसमें 1 मार्च, 29 अप्रैल, 10 मई शामिल हैं। इसके साथ ही इन मंत्रों में कई जगहें तो ऐसी हैं, जहां कांग्रेस के चुनाव की संभावना बहुत कम या ना के बराबर है। हालाँकि, राहुल के इन सिद्धांतों के दस्तावेज़ और भी बहुत कुछ हो सकते हैं। मीडिया के सामने राहुल गांधी ने अभी तक कोई इंटरव्यू नहीं दिया है। हालाँकि, ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ और इंडी गठबंधन के घटक तत्वों के साथ बैठकों के दौरान कुछ प्रेस कॉन्फ्रेंस जरूर हुई हैं।

पीएम मोदी को चुनौती देने वाले नेता चुनावी प्रचार से गायब

अब ऐसे में सवाल है कि मोदी को तीसरे साल में आने से रोकने के लिए किसी मजबूत पार्टी दल के नेता के एक सहयोगी से भी कम रेली कोपे को मोदी के लॉकर का दर्जा कैसे दिया जा सकता है। वहीं, लोकसभा चुनाव का प्रचार चरम पर है तो कोई भी किसान नेता लंबे समय तक चुनावी प्रचार से कैसे वंचित रह सकता है। कोई भी व्यावसायिक नेता जो मोदी को चुनौती देने की बात करता है, वह प्रयोगशाला या वैकल्पिक मीडिया में समीक्षा क्यों नहीं कर रहा है। ये सभी तथ्य इस ओर इशारा कर रहे हैं कि 2024 के आम चुनाव में प्रधानमंत्री मोदी को चुनौती देने वाले आंखें मूंदकर बैठे हुए हैं। (आईएएनएस बिजनेस के साथ)

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